राजनीति

कांग्रेस को अलविदा, भीम आर्मी का थामा दामन, राजगढ़ के मतीपुरा के कई लोगों ने ली सदस्यता

लेखक: Aazam Lala अंतिम अपडेट: 17 सितंबर 2026 👁️ 19 बार पढ़ा गया
प्रकाशक: जनता का संदेश
कांग्रेस को अलविदा, भीम आर्मी का थामा दामन, राजगढ़ के मतीपुरा के कई लोगों ने ली सदस्यता

राजगढ़। मतीपुरा क्षेत्र में सियासी हलचल उस वक्त तेज हो गई, जब कांग्रेस से जुड़े कई लोगों ने पार्टी से दूरी बनाते हुए भीम आर्मी की सदस्यता ग्रहण की। सदस्यता कार्यक्रम में भीम आर्मी के जिला अध्यक्ष राजगढ़ रक़ीब मिर्ज़ा और नरसिंहगढ़ तहसील अध्यक्ष शक़ील बाबा की मौजूदगी रही।

इस मौके पर पदाधिकारियों ने कहा कि संगठन का मकसद हिंदू-मुस्लिम एकता को मजबूत करना और गंगा-जमुनी तहज़ीब की मिसाल कायम रखना है। उनका कहना था कि समाज में नफरत और तफ़रक़ा बढ़ाने के बजाय आपसी भाईचारे और इंसाफ़ की आवाज को बुलंद करने की जरूरत है।

सियासत बांटने की नहीं, जोड़ने की हो

शकील बाबा ने कहा कि आज सियासत में कई बार मज़हब और जाति के नाम पर लोगों को बांटने की कोशिशें होती हैं। उनके मुताबिक आम जनता को आपस में बांटकर सियासी फ़ायदा उठाने के बजाय मज़लूम, दलित और अल्पसंख्यक वर्ग की आवाज़ को मजबूती से उठाना वक्त की जरूरत है।

उन्होंने कहा कि भीम आर्मी को गांव-गांव तक मजबूत करते हुए ऐसे लोगों को साथ लाने का प्रयास किया जाएगा, जो बराबरी, इंसाफ़ और सामाजिक भाईचारे की बात करते हैं।

मध्यप्रदेश में राजनीतिक विकल्प खड़ा करने का दावा

कार्यकर्ताओं ने कहा कि अब संगठन को केवल सामाजिक गतिविधियों तक सीमित न रखते हुए राजनीतिक तौर पर भी मजबूत किया जाएगा। आने वाले समय में मध्यप्रदेश में भीम आर्मी के प्रतिनिधियों को विधानसभा तक पहुंचाने की दिशा में काम करने की बात कही गई।

कार्यक्रम के दौरान नए सदस्यों ने संगठन के साथ मिलकर मज़लूमों की आवाज़ बनने, भाईचारा कायम रखने और सामाजिक इंसाफ़ के लिए काम करने का संकल्प लिया।

💡 पृष्ठभूमि (Background)

राजगढ़ के मतीपुरा में कांग्रेस से जुड़े कई लोगों ने भीम आर्मी में शामिल होकर पार्टी से दूरी बना ली। यह घटना क्षेत्र में राजनीतिक गतिशीलता को दर्शाती है, क्योंकि भीम आर्मी का उद्देश्य हिंदू-मुस्लिम एकता और गंगा-जमुनी संस्कृति को बढ़ावा देना है। इस कदम से स्थानीय जनता में राजनीतिक विकल्पों पर चर्चा बढ़ेगी, और कुछ लोग इसे सामाजिक एकता के लिए सकारात्मक कदम मान सकते हैं, जबकि अन्य इसे राजनीतिक रणनीति के रूप में देख सकते हैं।

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Aazam Lala

आज़म लाला भोपाल के वरिष्ठ पत्रकार हैं, जो लंबे समय से जनसमस्याओं और सामाजिक मुद्दों को अपनी पत्रकारिता के माध्यम से सामने लाते हैं। वे जमीनी स्तर की खबरों और जनसरोकार से जुड़े विषयों को प्रमुखता से उठाते हैं।