कांग्रेस में लौटें ममता, बंगाल में पार्टी उनका नेतृत्व स्वीकार करने को तैयार: अधीर रंजन चौधरी
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कांग्रेस नेता अधीर रंजन चौधरी ने तृणमूल कांग्रेस की प्रमुख ममता बनर्जी से बृहस्पतिवार को अपील की कि वह अपनी पार्टी के बचे हुए विधायकों एवं सांसदों के साथ कांग्रेस में वापस आ जाएं.
चौधरी ने साथ ही कहा कि कांग्रेस को पश्चिम बंगाल में उनका नेतृत्व स्वीकार करने में कोई दिक्कत नहीं है.
उन्होंने कांग्रेस आलाकमान से भी इस दिशा में कदम उठाने की अपील की और कहा कि बनर्जी को 6 अक्टूबर के नंदीग्राम विधानसभा उपचुनाव की तरह ही सहयोग की भावना दिखाते हुए रेजीनगर में कांग्रेस उम्मीदवार को अपना समर्थन देना चाहिए.
चौधरी ने यह अपील ऐसे समय में की है, जब तृणमूल कांग्रेस अपने गठन के बाद से सबसे गहरे संगठनात्मक संकट से जूझ रही है और 2026 के विधानसभा चुनाव में हार के बाद उसके कई विधायकों तथा सांसदों ने बगावत कर दी है.
कांग्रेस के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष चौधरी ने तृणमूल में बगावत का संदर्भ देते हुए कहा, इस समय किसी अलग इकाई की कोई जरूरत नहीं है. विधानसभा चुनाव में हार के बाद तृणमूल कांग्रेस के पास ज्यादा कुछ नहीं बचा है.
बनर्जी ने लगभग तीन दशक पहले कांग्रेस छोड़कर तृणमूल कांग्रेस बनाई थी.
अधीर रंजन की अपील
चौधरी ने कहा, हम ममता बनर्जी से आग्रह करेंगे कि वह बाकी बचे विधायकों और सांसदों के साथ कांग्रेस में शामिल हो जाएं. हम बंगाल में उनका नेतृत्व स्वीकार करेंगे और उनके साथ मिलकर काम करेंगे.
मैं कांग्रेस आलाकमान से भी यह अपील करूंगा कि उन्हें पार्टी में वापस शामिल होने दिया जाए.
उन्होंने कहा कि टीएमसी ने जिस तरह नंदीग्राम में कांग्रेस का समर्थन किया है, उसी तरह बनर्जी को रेजीनगर में भी ऐसा ही कदम उठाना चाहिए.
कांग्रेस नेता ने कहा, मित्रवत रवैये के तौर पर, जैसे उन्होंने नंदीग्राम में कांग्रेस उम्मीदवार का समर्थन किया है, वैसे ही उन्हें रेजीनगर में भी कांग्रेस उम्मीदवार का समर्थन करना चाहिए.
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📡 स्रोत: ABP Live
💡 पृष्ठभूमि (Background)
यह खबर ममता बनर्जी और अधीर रंजन चौधरी के बीच कांग्रेस में वापसी की चर्चा पर आधारित है। 2024 में पश्चिम बंगाल के कांग्रेस में विभाजन के बाद, दोनों नेता पार्टी को पुनः एकजुट करने की कोशिश कर रहे हैं। यह विषय महत्वपूर्ण है क्योंकि बंगाल की राजनीति में कांग्रेस की स्थिति और उसकी चुनावी शक्ति पर इसका गहरा असर पड़ सकता है। यदि ममता बनर्जी वापस आ जाएँगी, तो पार्टी को मजबूत नेतृत्व मिलेगा और विपक्ष के बीच समन्वय बेहतर होगा। आम जनता को इससे बेहतर नीति निर्माण, अधिक संसाधन और स्थिर शासन की उम्मीद हो सकती