राजनीति

कांग्रेस नेताओं की बेलगाम जुबान, बीमारी पर मजाक और प्रधानमंत्री पर अभद्र टिप्पणी, यही हैं कांग्रेस के संस्कार: बिक्रम ठाकुर

लेखक: Maroof Ahmed Khan अंतिम अपडेट: 28 अक्टूबर 2026
प्रकाशक: जनता का संदेश
कांग्रेस नेताओं की बेलगाम जुबान, बीमारी पर मजाक और प्रधानमंत्री पर अभद्र टिप्पणी, यही हैं कांग्रेस के संस्कार: बिक्रम ठाकुर

सतपाल रायजादा अपनी भाषा की मर्यादा भूले, सतपाल सिंह सत्ती की बीमारी पर टिप्पणी शर्मनाक

अक्तूबर 28, ऊना (हिमाचल प्रदेश): भाजपा के वरिष्ठ नेता एवं पूर्व मंत्री व विधायक बिक्रम ठाकुर ने ऊना के कांग्रेस नेता सतपाल रायजादा द्वारा भाजपा के वरिष्ठ नेता एवं विधायक सतपाल सिंह सत्ती की बीमारी और ऑपरेशन को लेकर की गई कथित अमर्यादित टिप्पणी की कड़ी निंदा करते हुए कहा कि कांग्रेस नेताओं की बेलगाम जुबान और बिगड़ती राजनीतिक भाषा अब सारी सीमाएं लांघ रही है।

बीमारी पर मजाक उड़ाना और देश के प्रधानमंत्री के प्रति अभद्र टिप्पणी करना कांग्रेस की उस राजनीतिक संस्कृति को उजागर करता है, जिसमें विरोधियों का अपमान करना ही राजनीति समझ लिया गया है। बिक्रम ठाकुर ने कहा कि कांग्रेस के कुछ नेता बेलगाम घोड़े की तरह व्यवहार कर रहे हैं। उन्हें न अपनी जुबान पर नियंत्रण है और न ही सार्वजनिक जीवन की मर्यादा का कोई लिहाज।

जब भी ये नेता मुंह खोलते हैं, अपने बयानों से राजनीतिक वातावरण को दूषित करने का काम करते हैं। सतपाल रायजादा की बयानबाजी यह सवाल खड़ा करती है कि क्या कांग्रेस में अब शालीनता और जिम्मेदार राजनीतिक आचरण के लिए कोई जगह नहीं बची है? उन्होंने कहा कि जिंदगी में बीमारी किसी को भी हो सकती है।

बीमारी न राजनीतिक विचारधारा देखकर आती है और न ही किसी का पद देखकर। ऐसे समय में व्यक्ति को सहानुभूति, सहयोग और संवेदनशीलता की आवश्यकता होती है, न कि उसकी बीमारी और ऑपरेशन पर भद्दे कटाक्षों की। सतपाल सिंह सत्ती प्रदेश के वरिष्ठ नेता हैं। उनसे राजनीतिक मतभेद हो सकते हैं, लेकिन उनके स्वास्थ्य को लेकर अपमानजनक टिप्पणी करना किसी भी सभ्य समाज में स्वीकार्य नहीं हो सकता।

बिक्रम ठाकुर ने तीखे शब्दों में कहा कि सतपाल रायजादा को दूसरों की बीमारी पर टिप्पणी करने से पहले अपनी जुबान और सोच का इलाज करवाने की जरूरत है। उनके बयान ने राजनीतिक विरोध और व्यक्तिगत अपमान के बीच का अंतर ही मिटा दिया है। सार्वजनिक जीवन में रहने वाले व्यक्ति से जिम्मेदार आचरण की अपेक्षा की जाती है, लेकिन रायजादा की टिप्पणी ने उनकी राजनीतिक सोच और संवेदनशीलता पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

उन्हें अपनी टिप्पणी पर सार्वजनिक रूप से माफी मांगनी चाहिए। उन्होंने कहा कि कांग्रेस में यह प्रवृत्ति केवल हिमाचल प्रदेश तक सीमित नहीं है। राष्ट्रीय स्तर पर कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे द्वारा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को लेकर की गई टिप्पणी भी राजनीतिक मर्यादा पर सवाल खड़े करती है।

जब कांग्रेस का शीर्ष नेतृत्व ही प्रधानमंत्री के प्रति टिप्पणी करते समय मर्यादा का ध्यान नहीं रखता, तो प्रदेश के नेताओं से संयम की अपेक्षा कैसे की जाए? कांग्रेस नेतृत्व को स्पष्ट करना चाहिए कि क्या यही उसके राजनीतिक संस्कार हैं और क्या विरोधियों का अपमान करना ही उसकी राजनीति का आधार बन गया है?

बिक्रम ठाकुर ने कहा कि कांग्रेस नेताओं को शायद यह भ्रम हो गया है कि अभद्र भाषा, व्यक्तिगत हमलों और विवादित बयानों से वे जनता का समर्थन हासिल कर लेंगे। लेकिन जनता सब देख रही है। लोकतंत्र में विरोध का अधिकार सभी को है, मगर विरोध तथ्यों, तर्कों और नीतियों पर होना चाहिए। किसी की बीमारी का मजाक उड़ाकर सुर्खियां बटोरना न राजनीतिक बहादुरी है और न ही किसी नेता की उपलब्धि।

उन्होंने कहा कि भाजपा राजनीतिक संघर्ष को विचारधारा, नीतियों और जनहित के मुद्दों पर लड़ने में विश्वास रखती है। भाजपा के लिए राजनीतिक विरोध का अर्थ किसी की बीमारी या व्यक्तिगत परिस्थितियों का उपहास उड़ाना नहीं है। कांग्रेस नेतृत्व को अपने नेताओं की भाषा पर नियंत्रण रखने और सार्वजनिक जीवन की मर्यादा बनाए रखने की जिम्मेदारी लेनी चाहिए।

ठाकुर ने मांग की कि सतपाल रायजादा अपनी अमर्यादित टिप्पणी पर बिना किसी बहानेबाजी के सार्वजनिक रूप से माफी मांगें। उन्होंने कहा कि राजनीतिक मतभेद अपनी जगह हैं, लेकिन मानवीय संवेदनाओं से खिलवाड़ करने का अधिकार किसी को नहीं है। कांग्रेस को यह समझना होगा कि विरोधियों का अपमान करने से राजनीतिक विश्वसनीयता नहीं बढ़ती, बल्कि ऐसी बयानबाजी पार्टी की छवि को ही नुकसान पहुंचाती है।

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Maroof Ahmed Khan

Maroof Ahmed Khan जनता का संदेश के संस्थापक एवं प्रधान संपादक हैं। वे जनसरोकार, निष्पक्ष रिपोर्टिंग और जनता की आवाज़ को प्रमुखता देने के लिए प्रतिबद्ध हैं।