कार्डियक अरेस्ट से गिरिडीह में मंत्री सुदिव्य कुमार की मौत, चार विभागों का संभाल रहे थे दायित्व
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Relevance: URGENT Slug: SUDIVYA KUMAR NIDHAN
Short Headline: कार्डियक अरेस्ट से गिरिडीह में मंत्री सुदिव्य कुमार की मौत, चार विभागों का संभाल रहे थे दायित्व
Synopsis: कार्डियक अरेस्ट से गिरिडीह में मंत्री सुदिव्य कुमार की मौत, गिरिडीह विधासभा क्षेत्र से दो बार रहे विधायक, नगर विकास, पर्यटन, कला, संस्कृति, खेलकूद तथा उच्च एवं तकनीकी शिक्षा विभाग का संभाल रहे थे प्रभार, वित्तीय समिति लोकलेखा के अतिरिक्त सामान्य प्रयोजन समिति और प्रत्यायुक्त विधान समिति के सदस्य भी किए गए थे मनोनीत।
Category: Celebrity News , Politics Deadline : 06 SEPTEMBER, GIRIDIH
06 सितंबर, गिरिडीह: झारखंड सरकार के कैबिनेट मंत्री और गिरिडीह सदर विधानसभा क्षेत्र से विधायक सुदिव्य कुमार का देर रात आकस्मिक निधन हो गया। बताया जा रहा है कि उनके गिरिडीह स्थित आवास पर अचानक सीने में दर्द हुआ। इसके बाद उन्हें मर्सी अस्पताल ले जाया गया, जहां उन्होंने अंतिम सांस ली।
सुदिव्य कुमार झारखंड मुक्ति मोर्चा के वरिष्ठ नेता थे और गिरिडीह सदर से लगातार दूसरी बार विधायक चुने गए थे। हेमंत सोरेन सरकार में उनके पास नगर विकास, पर्यटन, कला-संस्कृति, खेलकूद तथा उच्च एवं तकनीकी शिक्षा जैसे महत्वपूर्ण विभागों की जिम्मेदारी थी। उनके आकस्मिक निधन की खबर से झारखंड के राजनीतिक गलियारों और झामुमो कार्यकर्ताओं में शोक की लहर है। नेताओं और कार्यकर्ताओं ने उनके निधन पर गहरा दुख व्यक्त किया है।
आरंभिक जानकारी के मुताबिक रविवार तड़के करीब 2:40 बजे सुदिव्य कुमार की तबीयत बिगड़ गई थी। उन्हें तत्काल गिरिडीह में ही मर्सी हॉस्पिटल में भर्ती कराया गया। कहा जा रहा है कि चिकित्सकों ने अपनी तरफ से पूरी कोशिश की, लेकिन मंत्री सुदिव्य कुमार को नहीं बचाया जा सका। इलाज के दौरान करीब 3:30 बजे उन्होंने अंतिम सांस ली। कार्डियक अरेस्ट से सुदिव्य कुमार के निधन की बात कही जा रही है।
प्रोफाइल- सुदिव्य कुमार की पहचान झारखंड की राजनीति में सिर्फ गिरिडीह विधायक या मंत्री के तौर पर नहीं थी। वे झारखंड मुक्ति मोर्चा के भरोसेमंद नेताओं में शामिल थे। धनबाद के एक किसान परिवार शंभूनाथ और शकुन्तला देवी के घर में 26 जून 1970 को जन्मे सुदिव्य कुमार ने स्नातक तक पढ़ाई पूरी करने के साथ ही दिशोम गुरू शिबू सोरेन को आदर्श मानते हुए राजनीति में प्रवेश किया।
राजनीति में उन्होंने कई उतार-चढ़ाव देखे। वर्ष 2019 में पहली बार गिरिडीह विधानसभा क्षेत्र से विधानसभा सदस्य बनें। इससे पहले 2009 और 2014 में भी वे झामुमो के टिकट पर चुनाव मैदान में उतरे थे, लेकिन दोनों चुनावों में उन्हें सफलता नहीं मिली थी। वर्ष 2019 में विधायक बनने के बाद वे झारखण्ड विधानसभा की वित्तीय समिति लोकलेखा के अतिरिक्त सामान्य प्रयोजन समिति और प्रत्यायुक्त विधान समिति के सदस्य मनोनीत किए गए।
2019 के बाद 2024 में उन्होंने लगातार दूसरी बार जीत दर्ज की और हेमंत सोरेन सरकार में कैबिनेट मंत्री बने। उनके पास नगर विकास, पर्यटन, कला, संस्कृति, खेलकूद तथा उच्च एवं तकनीकी शिक्षा जैसे महत्वपूर्ण विभागों की जिम्मेदारी थी। वे अपने पीछे पत्नी श्वेता शर्मा समेत दो पुत्री और एक पुत्र छोड़ गए।
उन्हें पढ़ने का शौक था। उन्होंने कई राजनीतिक और आध्यात्मिक पुस्तकें पढ़ीं। राज्य हित और क्षेत्र हित को सर्वोपरी मानते हुए उन्होंने अपने काम-काज के जरिए राज्य के विकास को गति देने का काम किया, जो अविस्मरणीय रहेगा। 56 वर्ष की उम्र में उनके आकस्मिक निधन के साथ झारखंड की राजनीति ने एक ऐसे नेता को खो दिया, जिसने संगठन में लंबे समय तक काम करने के बाद सत्ता के शीर्ष तक अपनी पहचान बनाई।