कर्नाटक: मैसूरु में 9 दिवसीय शिल्प समागम मेला 2026 संपन्न
ताज़ा खबरों से अपडेट रहने के लिए हमारे WhatsApp चैनल से जुड़ेंJoin करें →
अक्टूबर 20, नई दिल्ली: कर्नाटक के मैसूरु स्थित दशहरा प्रदर्शनी मैदान में आयोजित नौ दिवसीय शिल्प समागम मेला 2026 हजारों लोगों की भागीदारी के साथ संपन्न हो गया। सामाजिक न्याय और अधिकारिता मंत्रालय की ओर से आयोजित इस मेले का उद्देश्य पारंपरिक हस्तशिल्प और हथकरघा उत्पादों के विपणन के लिए कारीगरों को मंच उपलब्ध कराना था।
मेले में अनुसूचित जाति, अन्य पिछड़ा वर्ग और सफाई कर्मचारी समुदायों के ऐसे कारीगरों ने भाग लिया, जिन्हें मंत्रालय के तीन राष्ट्रीय निगमों की योजनाओं के तहत सहायता मिली है। ये निगम राष्ट्रीय अनुसूचित जाति वित्त एवं विकास निगम (एनएसएफडीसी), राष्ट्रीय पिछड़ा वर्ग वित्त एवं विकास निगम (एनबीसीएफडीसी) और राष्ट्रीय सफाई कर्मचारी वित्त एवं विकास निगम (एनएसकेएफडीसी) हैं।
एनबीसीएफडीसी के उप महाप्रबंधक रजनीश बैंकर ने कहा कि इस पहल का उद्देश्य कारीगरों के लिए बाजार तक पहुंच मजबूत करना, पारंपरिक शिल्पकला को बढ़ावा देना और लक्षित समूहों के लिए आजीविका के टिकाऊ अवसर पैदा करना है।
उन्होंने बताया कि मंत्रालय वर्ष 2022 से शिल्प समागम मेलों का आयोजन कर रहा है। अब तक आयोजित 13 मेलों के माध्यम से 975 कारीगर लाभान्वित हुए हैं। मैसूरु में आयोजित मेला वित्त वर्ष 2026-27 का पहला शिल्प समागम मेला था।
बैंकर के अनुसार, मेले में कुल 83 स्टॉल लगाए गए थे, जिनमें से 80 कारीगरों को आवंटित किए गए थे। इनमें 37 महिला कारीगर शामिल थीं। आगंतुकों के लिए पारंपरिक व्यंजनों के खाद्य स्टॉल भी लगाए गए थे।
मेले में आंध्र प्रदेश, बिहार, कर्नाटक, केरल, राजस्थान, पुडुचेरी, गुजरात, मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र, तेलंगाना, तमिलनाडु और उत्तर प्रदेश के कारीगरों ने भाग लिया।
प्रदर्शनी में हस्तशिल्प, हथकरघा साड़ियां, मसाले, अचार, अगरबत्तियां, शहद से बने उत्पाद, ब्लॉक प्रिंट की वस्तुएं, कांजीवरम साड़ियां, चमड़े के सामान, लकड़ी के खिलौने, बैग, पर्स, टेराकोटा उत्पाद, कृत्रिम आभूषण, शीशम की लकड़ी से बनी दीवार सजावट की वस्तुएं, बेडशीट और कुशन कवर प्रदर्शित किए गए।
केंद्रीय सामाजिक न्याय और अधिकारिता राज्य मंत्री रामदास आठवले ने मेले का दौरा किया और समाज के कमजोर वर्गों के आर्थिक तथा सामाजिक सशक्तीकरण के प्रति केंद्र सरकार की प्रतिबद्धता दोहराई। उन्होंने विभिन्न स्टॉलों का निरीक्षण किया और हस्तशिल्प, हथकरघा उत्पादों तथा पारंपरिक व्यंजनों का प्रदर्शन देखा।
सामाजिक न्याय और अधिकारिता मंत्रालय के केंद्रीय सचिव सुधांश पंत ने भी मेले का दौरा किया। उन्होंने स्टॉलों का निरीक्षण किया और स्टॉल संचालकों तथा आगंतुकों से बातचीत की।
सुधांश पंत मैसूरु के दो दिवसीय आधिकारिक दौरे पर थे। इस दौरान उन्होंने राज्य के सामाजिक कल्याण विभाग के साथ बैठक कर मंत्रालय की योजनाओं, कार्यक्रमों और पहलों की समीक्षा की।
उन्होंने कहा कि मंत्रालय ऐसी पहलों के माध्यम से बाजार तक पहुंच मजबूत करने, उद्यमिता को प्रोत्साहित करने और वंचित समुदायों के आर्थिक सशक्तीकरण के लिए लगातार प्रयास कर रहा है।
शिल्प समागम मेला कारीगरों को अपने उत्पादों का व्यापक स्तर पर प्रदर्शन करने और संभावित ग्राहकों से जुड़ने का अवसर देता है। यह मंच भारत की पारंपरिक कलाओं और सांस्कृतिक विरासत को बढ़ावा देने में भी सहायक है।
मंत्रालय इस मेले के माध्यम से अपनी योजनाओं और कार्यक्रमों की जानकारी भी लोगों तक पहुंचाता है। इसका उद्देश्य पात्र लाभार्थियों को उपलब्ध सहायता और विकास के अवसरों के प्रति जागरूक करना तथा उद्यमिता और आर्थिक सशक्तीकरण को बढ़ावा देना है।
मंत्रालय ने लक्षित समुदायों के उत्पादों को भारत और विदेशों में बाजार उपलब्ध कराने के लिए भारत ट्यूलिप यानी पारंपरिक कारीगर आजीविका उन्नयन कार्यक्रम भी शुरू किया है। इसके तहत उत्पादों को 'भारत ट्यूलिप' ब्रांड के अंतर्गत प्रस्तुत किया जाता है, ताकि उनकी पहचान बढ़े और ऑनलाइन बिक्री को प्रोत्साहन मिले।
मंत्रालय कारीगरों को मेले में भाग लेने के लिए निःशुल्क स्टॉल के साथ यात्रा व्यय, दैनिक भत्ता, सामान के परिवहन और दोपहर तथा रात के भोजन सहित अन्य जरूरी सहायता भी उपलब्ध कराता है।
वित्त वर्ष 2026-27 में मंत्रालय गुवाहाटी, नई दिल्ली के दिल्ली हाट, जोधपुर और लखनऊ में भी शिल्प समागम मेलों का आयोजन करेगा।
मंत्रालय और उसके तीनों राष्ट्रीय निगम प्रमुख प्रदर्शनियों में भी भाग लेंगे। इनमें 14 से 27 नवंबर, 2026 तक नई दिल्ली के भारत मंडपम में आयोजित होने वाला भारत अंतरराष्ट्रीय व्यापार मेला (आईआईटीएफ) 2026 और फरवरी 2027 में फरीदाबाद में आयोजित होने वाला सूरजकुंड मेला शामिल हैं।
मंत्रालय के अनुसार, शिल्प समागम मेला और भारत ट्यूलिप जैसी पहलों के जरिए कारीगरों के लिए बाजार तक पहुंच, उद्यमिता और आजीविका के अवसर बढ़ाने के साथ पारंपरिक कलाओं के संरक्षण और प्रचार को भी समर्थन दिया जा रहा है।
(स्रोत: पीआईबी)