भोपाल

करोंद वार्ड 78 की बदहाली पर सियासी तंज़, देखें वीडियो

लेखक: Aazam Lala अंतिम अपडेट: 21 अगस्त 2026 👁️ 14 बार पढ़ा गया
प्रकाशक: जनता का संदेश
करोंद वार्ड 78 की बदहाली पर सियासी तंज़, देखें वीडियो

आज़म लाला की कलम से

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भोपाल। नरेला विधानसभा क्षेत्र के करोंद स्थित वार्ड 78 में सड़क, जल निकासी और साफ-सफाई से जुड़ी समस्याएं रहवासियों के लिए परेशानी का कारण बनी हुई हैं। सवाल सिर्फ यह नहीं है कि सड़कें कब बनेंगी, बल्कि सवाल यह भी है कि आखिर वार्ड 78 को अपना मानकर उसकी समस्याओं के समाधान के लिए कौन आगे आएगा?

वार्ड 78 की मौजूदा तस्वीर कई सवाल खड़े करती है। कई स्थानों पर सड़कों की स्थिति खराब है और गड्ढों के कारण आवागमन प्रभावित होता है। बारिश के दौरान कुछ रास्तों पर कीचड़ और गंदा पानी जमा होने से रहवासियों की मुश्किलें और बढ़ जाती हैं। ऐसे में घर से निकलना भी लोगों के लिए परेशानी का सबब बन जाता है।

बहता हुआ गटर
बहता हुआ गटर

रहवासियों का सवाल नगर निगम की जिम्मेदारी को लेकर भी है। प्रॉपर्टी टैक्स वसूली की व्यवस्था समय पर होती है, लेकिन सड़क, नाली और जल निकासी जैसी बुनियादी सुविधाओं को लेकर लोगों को अब भी इंतजार करना पड़ रहा है। यही वजह है कि वार्ड की गलियों में सुविधाओं को लेकर सवाल लगातार उठ रहे हैं।

बहती हुई नालियाँ
बहती हुई नालियाँ

स्थिति का एक पहलू यह भी है कि जिन सड़कों, नालियों और जल निकासी की व्यवस्था की जिम्मेदारी सरकारी तंत्र की है, वहां समाजसेवी अपने स्तर पर राहत पहुंचाने की कोशिश करते दिखाई दे रहे हैं। वार्ड 78 के रहवासियों की शिकायतों को कांग्रेस अल्पसंख्यक विभाग के प्रदेश महामंत्री हफ़ीज़ ख़ान ने सामने रखा और उनकी परेशानी कांग्रेस नेता मनोज शुक्ला के समक्ष रखी।

घरों में घुसता गंदा पानी
घरों में घुसता गंदा पानी

इसके बाद अमन कॉलोनी, आवास विकास कॉलोनी और मयूर विहार के रास्तों पर निजी स्तर से कोपरा व मलमा डलवाया गया। इससे प्रभावित रास्तों पर तत्काल राहत देने का प्रयास किया गया है, हालांकि स्थायी समाधान के लिए सड़क, नाली और जल निकासी जैसी बुनियादी व्यवस्थाओं में संस्थागत स्तर पर काम जरूरी रहेगा।

कांग्रेस नेता मनोज शुक्ला द्वारा कराया गया कार्य
कांग्रेस नेता मनोज शुक्ला द्वारा कराया गया कार्य

इसी के साथ इस पूरे मामले ने स्थानीय राजनीति को भी चर्चा में ला दिया है। सवाल यह उठ रहा है कि जिसे जनता ने वोट देकर अपना प्रतिनिधि चुना, वह जनता की इन समस्याओं के बीच कितना दिखाई दे रहा है और चुनाव में नकारे गए लोग आज जनता के बीच किस तरह अपनी मौजूदगी दर्ज करा रहे हैं।

सियासत में पद और टिकट अपनी जगह हैं, लेकिन जनसेवा का वास्तविक मूल्यांकन इस बात से भी होता है कि किसी व्यक्ति की मौजूदगी जनता की मुश्किल घड़ी में कितनी दिखाई देती है। वार्ड 78 के मामले में भी यही सवाल चर्चा का विषय बना हुआ है।

हफ़ीज़ ख़ान का कहना है कि वार्ड 78 के रहवासियों की परेशानी सिर्फ जनता की समस्या नहीं, बल्कि उनकी अपनी परेशानी भी है और वे इसके समाधान के लिए लगातार प्रयास करते रहेंगे।

अब सवाल यह है कि क्या कोपरे और मलमे की अस्थायी व्यवस्था से वार्ड 78 के रास्तों की तस्वीर बदलेगी, या फिर स्थायी सड़क, नाली और जल निकासी की समस्या के समाधान के लिए जिम्मेदार विभागों को आगे आना होगा?

मनोज शुक्ला ने निजी खर्चे से करवाया कार्य
मनोज शुक्ला ने निजी खर्चे से करवाया कार्य

वार्ड 78 के रहवासी टैक्स भी देते हैं, वोट भी देते हैं और बेहतर बुनियादी सुविधाओं की उम्मीद भी रखते हैं। ऐसे में उनकी मांग सिर्फ आश्वासन तक सीमित नहीं रहनी चाहिए—उन्हें बेहतर सड़क, व्यवस्थित नाली और साफ-सुथरे रास्ते भी चाहिए।

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अब सवाल जनता का है—जवाब कौन देगा?

💡 पृष्ठभूमि (Background)

करोंद वार्ड 78 की बदहाली पर सियासी तंज़, देखें वीडियो यह विषय है कि भोपाल के नरेला विधानसभा क्षेत्र के करोंद में स्थित वार्ड 78 की सड़क, जल निकासी और साफ‑सफाई जैसी बुनियादी सुविधाओं में गहरी कमी है। यह खबर महत्वपूर्ण है क्योंकि यह दर्शाती है कि स्थानीय प्रशासन और राजनीतिक दलों ने इस क्षेत्र के निवासियों की मूलभूत जरूरतों को अनदेखा किया है, जिससे सामाजिक असमानता और असंतोष बढ़ रहा है। इसका आम जनता पर असर यह है कि लोगों की जीवन गुणवत्ता घटेगी, आर्थिक गतिविधियाँ प्रभावित होंगी और क्षेत्र में राजनीति

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Aazam Lala

आज़म लाला भोपाल के वरिष्ठ पत्रकार हैं, जो लंबे समय से जनसमस्याओं और सामाजिक मुद्दों को अपनी पत्रकारिता के माध्यम से सामने लाते हैं। वे जमीनी स्तर की खबरों और जनसरोकार से जुड़े विषयों को प्रमुखता से उठाते हैं।