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कौशांबी ब्लास्ट के 7 गुनहगार:22 महीने में 2 थानेदार-5 चौकी इंचार्ज बदले लेकिन नहीं रुका अवैध कारोबार, अब विभागीय जांच झेलेंगे

लेखक: JKS News Desk अंतिम अपडेट: 5 अक्टूबर 2026 👁️ 1 बार पढ़ा गया
प्रकाशक: जनता का संदेश
कौशांबी ब्लास्ट के 7 गुनहगार:22 महीने में 2 थानेदार-5 चौकी इंचार्ज बदले लेकिन नहीं रुका अवैध कारोबार, अब विभागीय जांच झेलेंगे

कौशांबी के चिल्ला शहबाजी पटाखा फैक्ट्री ब्लास्ट के बाद निलंबित किए गए सात पुलिसकर्मियों पर अब आगे की कार्रवाई विभागीय जांच के जरिए तय होगी। जांच का सबसे अहम बिंदु यह होगा कि जिस पटाखा फैक्ट्री संचालक नौशाद अली के खिलाफ पहले ही अवैध पटाखा निर्माण और भंडारण का मुकदमा दर्ज हो चुका था और जो जेल भी जा चुका था, उसके जेल से बाहर आने के बाद करीब 22 महीने तक स्थानीय पुलिस ने उसके खिलाफ दोबारा कार्रवाई क्यों नहीं की।

इस अवधि में पिपरी थाने की कमान दो थाना प्रभारियों के पास रही, जबकि चायल चौकी पर पांच चौकी प्रभारी तैनात हुए। इसके बावजूद अवैध पटाखा फैक्ट्री चलती रही और 31 अगस्त को हुए विस्फोट में 11 लोगों की जान चली गई। जांच में अलग-अलग तैनाती अवधि होगी अहम विभागीय जांच में सातों पुलिसकर्मियों की जिम्मेदारी एक साथ तय नहीं होगी।

जिस अधिकारी की जितने समय तक पिपरी थाना या चायल चौकी में तैनाती रही, उस अवधि की घटनाओं और कार्रवाई का अलग-अलग रिकॉर्ड खंगाला जाएगा। यानी जांच का फोकस यह पता लगाने पर रहेगा कि नौशाद के जेल से छूटने के बाद किस अवधि में फैक्ट्री दोबारा शुरू हुई और उस दौरान थाना व चौकी में कौन अधिकारी तैनात था।

इसके लिए पुलिस अभिलेख, पूर्व मुकदमे, आरोपी की गिरफ्तारी और जमानत से संबंधित रिकॉर्ड, थाना जीडी, कार्रवाई संबंधी दस्तावेज और अवैध पटाखा निर्माण के संबंध में की गई कार्रवाई की जानकारी भी देखी जा सकती है। लाइसेंस निलंबित होने की जानकारी भी जांच का अहम बिंदु जांच में यह भी देखा जाएगा कि 4 अप्रैल 2024 को अनुज्ञप्ति निलंबित होने के बाद इसकी जानकारी स्थानीय पुलिस को किस स्तर पर थी।

क्योंकि अक्टूबर 2024 में इसी आरोपी के खिलाफ अवैध पटाखा निर्माण और भंडारण को लेकर मुकदमा दर्ज हो चुका था। ऐसे में विभागीय जांच में यह सवाल महत्वपूर्ण होगा कि मुकदमा दर्ज होने के बाद आरोपी की गतिविधियों पर आगे निगरानी क्यों नहीं रखी गई। एक आरोपी, सात पुलिसकर्मी और 22 महीने का सवाल इस मामले में विभागीय जांच का सबसे महत्वपूर्ण पहलू यही है कि नौशाद अली कोई ऐसा व्यक्ति नहीं था जिसके बारे में पुलिस को पहली बार जानकारी 31 अगस्त 2026 के विस्फोट के बाद मिली।

उसकी फैक्ट्री का लाइसेंस निलंबित था। उसके खिलाफ अवैध पटाखा निर्माण और भंडारण का मुकदमा दर्ज हो चुका था। वह जेल भी जा चुका था। इसके बावजूद जेल से बाहर आने के बाद उसने दोबारा कारोबार शुरू कर दिया। इसके बाद करीब 22 महीने में पिपरी थाने में दो थानेदार और चायल चौकी में पांच चौकी इंचार्ज बदल गए।

अब विभागीय जांच में यही देखा जाएगा कि इतने अधिकारियों के बदलने के बावजूद किसी ने आरोपी की गतिविधियों पर कार्रवाई क्यों नहीं की। लापरवाही साबित हुई तो मुश्किलें बढ़ेंगी निलंबन को अंतिम दंड नहीं माना जाएगा। विभागीय जांच में यदि किसी पुलिसकर्मी की गंभीर लापरवाही, कर्तव्य में शिथिलता या आरोपी की गतिविधियों की जानकारी होने के बावजूद कार्रवाई न करने की बात सामने आती है तो उसके खिलाफ आगे विभागीय दंड की कार्रवाई हो सकती है।

वहीं, यदि जांच में यह सामने आता है कि किसी अधिकारी के कार्यकाल में आरोपी की अवैध गतिविधि की जानकारी नहीं थी और उसके खिलाफ कार्रवाई के पर्याप्त आधार भी उपलब्ध नहीं थे, तो उसकी भूमिका का अलग आकलन किया जाएगा।

📡 स्रोत: NewsData.io

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🎙️ जनता का संदेश का मत

कौशांबी ब्लास्ट के बाद दिखा कि जब तक जवाबदेही नहीं होती, तब तक अवैध व्यापार चलता रहता है। हमें यह सिखना चाहिए कि हर अपराध का सामना कानूनी मार्ग से करना चाहिए, न कि अनदेखी से। समाज में विश्वास और सुरक्षा तभी बढ़ेगी जब हम साक्ष्य आधारित जांच और सख्त दंड सुनिश्चित करें। पीड़ितों के लिए सहानुभूति और न्याय की आशा को हमेशा आगे रखें।

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