कौशांबी में युवक की मौत:परिजनों ने प्रधान और पुलिस पर लगाए गंभीर आरोप, पोस्टमार्टम से पहले कार्रवाई की मांग
ताज़ा खबरों से अपडेट रहने के लिए हमारे WhatsApp चैनल से जुड़ेंJoin करें →कौशांबी के सैनी थाना क्षेत्र के त्रिलोकपुर गांव में एक युवक की मौत के बाद ग्रामीणों में गुस्सा फूट पड़ा। शुक्रवार को ग्रामीणों ने युवक का शव थाने के गेट के सामने रखकर जमकर हंगामा किया। मृतक की पहचान 25 साल के धीरज कुमार, पुत्र गामा भट्ट के रूप में हुई है। परिजनों और ग्रामीणों ने ग्राम प्रधान और उसके रिश्तेदारों पर धीरज को जहर देकर हत्या करने का आरोप लगाया है।
मृतक की मां का आरोप है कि बेटे धीरज की तबीयत बिगड़ने के बाद उसकी मौत हो गई। जब धीरज की महिला परिजन शिकायत लेकर थाने पहुंचीं, तो आरोप है कि पुलिसकर्मियों ने उनके साथ गाली-गलौज की और उन्हें थाने से भगा दिया। इससे ग्रामीणों में पुलिस के खिलाफ भी नाराजगी बढ़ गई। ग्रामीणों का आरोप है कि पुलिस ने उनकी शिकायत को गंभीरता से नहीं लिया।
इसके बाद गुस्साए ग्रामीण धीरज का शव लेकर सैनी थाने पहुंच गए और थाने के मुख्य गेट पर शव रखकर विरोध प्रदर्शन शुरू कर दिया। पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के बाद होगी जांच मृतक की मां ने त्रिलोकपुर गांव के प्रधान भारत और गांव के चार अन्य लोगों - टिल्लू, नरेंद्र, अमन, रितिक के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर कड़ी कार्रवाई की मांग की है।
थाने के सामने हंगामे की खबर मिलते ही सीओ सिराथू सत्येंद्र तिवारी और थाना पुलिस मौके पर पहुंची। पुलिस परिजनों को समझाने में जुटी है, लेकिन परिजन आरोपियों पर कार्रवाई होने के बाद ही शव का पोस्टमार्टम कराने की जिद पर अड़े हैं। पूरे मामले पर सीओ सिराथू सत्येंद्र तिवारी ने बताया कि परिजनों से बातचीत चल रही है।
उन्होंने कहा कि परिजन जिस हिसाब से शिकायत देंगे, उसके आधार पर शव को पोस्टमार्टम के लिए भेजा जाएगा। पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के बाद जांच कर कार्रवाई की जाएगी।
📡 स्रोत: NewsData.io
🎙️ जनता का संदेश का मत
धीरज की मृत्यु के बाद ग्रामीणों का गुस्सा समझ में आता है, परंतु हिंसा से समाधान नहीं मिलता। विवादों को कानूनी मार्ग, मध्यस्थता या पुलिस की सहायता से सुलझाना चाहिए। समाज में सहानुभूति और संयम की संस्कृति अपनाने से अनावश्यक संघर्ष कम होंगे। पीड़ित परिवार के प्रति गहरी संवेदना रखते हुए, हमें न्याय और शांति के लिए मिलकर प्रयास करना चाहिए, ताकि ऐसी त्रासदियाँ दोबारा न हों।