KBC 18: गुरुग्राम के नितिन ने भारत से इंस्पायर्ड स्ट्रीट फूड पर लगाया दांव, हुए गेम से बाहर
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कौन बनेगा करोड़पति 18 के लेटेस्ट एपिसोड में गुरुग्राम के बिजनेसमेन नितिन कुमार ने एक ऐसे स्ट्रीट फूड से जुड़े सवाल पर दांव लगाया, जिसका नाम सुनकर शायद आपको भी घड़ी के ब्रैंड का ख्याल आए.
सवाल में रोलेक्स नाम के एक इंडियन-इंस्पायर्ड स्ट्रीट फूड के बारे में पूछा गया था.
नितिन इस सवाल का सही जवाब नहीं दे पाए, लेकिन इससे पहले वह 5 लाख रुपये जीत चुके थे और 7.5 लाख के सवाल पर वो आउट हो गए.
इंडियन-इंस्पायर्ड स्ट्रीट फूड पर था सवाल
7.5 लाख रुपये के लिए अमिताभ बच्चन ने नितिन से पूछा कि किस देश में रोलेक्स नाम का लोकप्रिय स्ट्रीट स्नैक मिलता है, जिसे ऑमलेट को चपाती में लपेटकर बनाया जाता है.
सवाल के विकल्प थे - फिजी, साउथ अफ्रीका, युगांडा और यूएई. नितिन जवाब को लेकर असमंजस में थे.
उन्होंने 50:50 लाइफलाइन का इस्तेमाल किया, जिसके बाद फिजी और युगांडा दो विकल्प रह गए.
नितिन ने फिजी को सही जवाब मानकर लॉक कर दिया. हालांकि, सही जवाब युगांडा था.
इस तरह वह 7.5 लाख रुपये के सवाल का जवाब देने से चूक गए और 5 लाख रुपये लेकर गेम से बाहर हो गए.
क्या है युगांडा का रोलेक्स ?
जिस रोलेक्स को लेकर केबीसी में सवाल पूछा गया, वह कोई घड़ी नहीं बल्कि युगांडा का मशहूर स्ट्रीट फूड है. इसे चपाती और अंडे से तैयार किया जाता है.
आम तौर पर चपाती के ऊपर ऑमलेट रखा जाता है और फिर उसे रोल करके परोसा जाता है.
रोलेक्स नाम को रोल्ड एग्स से जोड़कर देखा जाता है.
यह स्नैक युगांडा में काफी फेमस है और वहां के स्ट्रीट फूड कल्चर का हिस्सा बन चुका है. इसकी खासियत यह भी है कि इसमें इंडियन चपाती जैसी चीज का इस्तेमाल होता है. इसे अंडा और सब्जियां मिलाकर बनाया जाता है.
22 साल की उम्र में शुरू किया अपना बिजनेस
नितिन गुरुग्राम में अपना बिजनेस चलाते हैं.
शो के दौरान उन्होंने अमिताभ बच्चन को अपने काम क
📡 स्रोत: ABP Live Film
💡 पृष्ठभूमि (Background)
गुरुग्राम के उद्यमी नितिन कुमार ने ‘कौन बनेगा करोड़पति’ के 18वें सीज़न में ‘रोलेक्स’ नामक स्ट्रीट फूड पर दांव लगाकर खेल से बाहर हो गए। यह विषय दर्शकों को भारतीय स्ट्रीट फूड की विविधता और उसके अनोखे नामों के प्रति जागरूक करता है। खबर महत्वपूर्ण है क्योंकि यह दर्शाती है कि कैसे साधारण खाद्य वस्तु भी राष्ट्रीय मंच पर चर्चा का विषय बन सकती है, और इससे खाद्य उद्योग पर नई रोशनी पड़ती है। आम जनता पर इसका असर यह हो सकता है कि लोग पारंपरिक स्ट्रीट फूड के प्रति जिज्ञासा बढ़ाएँ, जिससे स्थानीय खाद्य व्यवसाय