अब केरलम में बुजुर्गों को परेशान करने वालों की खैर नहीं! सरकार ने सदन में पारित किया बिल
ताज़ा खबरों से अपडेट रहने के लिए हमारे WhatsApp चैनल से जुड़ेंJoin करें →
केरलम सोमवार (26 अक्टूबर, 2026) को देश का पहला ऐसा राज्य बन गया है, जिसने वरिष्ठ नागरिकों को दुर्व्यवहार और शोषण से बचाने, बुजुर्गों की देखभाल करने वाले केंद्रों को विनमयित करने और उन्हें बेहतर स्वास्थ्य सेवा के साथ सामाजिक सुरक्षा उपलब्ध कराने के लिए सर्वसम्मति से एक व्यापक कानून पारित किया है.
इस मौके पर केरलम के मुख्यमंत्री वी. डी.
सतीशत ने बुजुर्गों की देखभाल के लिए एक ऐसा मॉडल तैयार करना का संकल्प लिया, जो दुनिया भर का ध्यान अपनी तरफ खींचेगा.
सत्तापक्ष और विपक्ष दोनों ने विधायक पर दी सहमति
न्यूज एजेंसी पीटीआई की रिपोर्ट के मुताबिक, केरलम वरिष्ठ नागरिक (देखभाल और अधिकार संरक्षण) विधेयक, 2026 को राज्य विधानसभा ने सर्वसम्मति से पारित कर दिया. मुख्यमंत्री वी. डी.
सतीशन की तरफ से सत्तापक्ष और विपक्ष, दोनों के सदस्यों की ओर से लाए गए कई प्रस्तावित संशोधनों को स्वीकार किए जाने के बाद यह विधेयक सदन में पारित कराया.
विधानसभा में 13 अक्टूबर को पेश किया गया था बिल
केरलम की विधानसभा में इस अहम बिल को इसी महीने 13 तारीख यानी 13 अक्टूबर को पेश किया गया था और संबंधित विषय की समिति की तरफ से पूर्ण समीक्षा किए जाने बाद इस प्रस्तावित विधेयक को सदन में एक बार फिर से पेश किया गया था.
इस प्रस्तावित विधेयक में बुजुर्गों की देखभाल करने के लिए एक कानूनी ढांचा स्थापित करने और वरिष्ठ नागरिकों के अधिकारों की रक्षा करने के प्रावधान है.
विधेयक में सजा और जुर्माने का भी प्रावधान
इस अहम विधेयक में वरिष्ठ नागरिकों के साथ दुर्व्यवहार करने, उनकी संपत्ति पर अवैध और गैर-कानूनी तरीके से कब्जा करने के साथ बिना रजिस्ट्रेशन के बुजुर्गों की देखभाल करने के लिए बिना रजिस
📡 स्रोत: ABP Live
💡 पृष्ठभूमि (Background)
यह खबर केरलम के वरिष्ठ नागरिकों की सुरक्षा के लिए पारित हुए नए कानून की है, जो दुर्व्यवहार और शोषण से बचाव, देखभाल केंद्रों का विनियमन और बेहतर स्वास्थ्य तथा सामाजिक सुरक्षा सुनिश्चित करता है। यह विषय इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि भारत में बुजुर्गों का दुरुपयोग एक बढ़ती समस्या है, और पहले कभी ऐसा व्यापक कानून नहीं था। इस कदम से आम जनता पर गहरा असर पड़ेगा: बुजुर्गों को सुरक्षित वातावरण मिलेगा, परिवारों पर बोझ कम होगा, और समाज में सम्मान तथा देखभाल की संस्कृति मजबूत होगी।