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Khamenei के सलाहकार की US को चेतावनी, नया हमला हुआ तो Indian Ocean तक पहुंचेगी जंग

लेखक: JKS News Desk अंतिम अपडेट: 24 सितंबर 2026
प्रकाशक: जनता का संदेश
Khamenei के सलाहकार की US को चेतावनी, नया हमला हुआ तो Indian Ocean तक पहुंचेगी जंग

तेहरान और वॉशिंगटन के बीच तनाव बना हुआ है, ऐसे में ईरान के सर्वोच्च नेता के एक वरिष्ठ सलाहकार ने चेतावनी दी है कि अगर अमेरिका ने एक और हमला किया, तो ईरान अपनी लड़ाई का दायरा हिंद महासागर तक बढ़ा सकता है। ईरान की फ़ार्स न्यूज़ एजेंसी द्वारा जारी एक वीडियो में याह्या रहीम सफ़वी ने कहा कि चूंकि यह टकराव फ़ारस की खाड़ी और होर्मुज़ जलडमरूमध्य से लाल सागर तक फैल गया है, इसलिए यह मुमकिन है कि और ज़्यादा युद्ध होने पर यह मोर्चा और भी आगे बढ़ेगा और हिंद महासागर और शायद उससे भी आगे तक पहुँच जाएगा।

ये टिप्पणियाँ ऐसे समय में आई हैं जब ईरान और अमेरिका के बीच तनाव बना हुआ है, खासकर फ़ारस की खाड़ी, ओमान की खाड़ी और समुद्री व्यापार के अहम रास्तों के आसपास। ईरानी अधिकारियों ने बार-बार चेतावनी दी है कि अमेरिका की ओर से कोई भी नई सैन्य कार्रवाई होने पर पूरे क्षेत्र में अमेरिकी हितों और संपत्तियों के ख़िलाफ़ जवाबी कार्रवाई हो सकती है।

एसोसिएटेड प्रेस के अनुसार, सोमवार को ईरान के रिवोल्यूशनरी गार्ड ने यह भी कहा कि अगर उन्हें और उकसाया गया तो वे अपनी सैन्य रणनीतियों और लक्ष्यों में बदलाव कर सकते हैं। इसे भी पढ़ें: अब भारत के भरोसे ट्रंप, Gulf देशों के सामने ट्रेड रूट को दिया फुल सपोर्ट हिंद महासागर क्यों महत्वपूर्ण है?

हिंद महासागर दुनिया के पाँच महासागरों में तीसरा सबसे बड़ा महासागर है। यह लगभग 70.5 मिलियन वर्ग किलोमीटर (27.2 मिलियन वर्ग मील) या पृथ्वी की जल-सतह का लगभग 20% हिस्सा घेरे हुए है। इसके उत्तर में एशिया है, जिसमें भारत, ईरान, पाकिस्तान और बांग्लादेश शामिल हैं। इसकी एक अहम कड़ी 'बाब-अल-मंदेब जलडमरूमध्य' (Strait) है, जो लाल सागर को अदन की खाड़ी और अंततः हिंद महासागर से जोड़ता है।

इस जलमार्ग से होने वाले जहाजों के आवागमन पर हमलों और सुरक्षा संबंधी बढ़ती चिंताओं का असर पहले ही पड़ चुका है। इस स्थिति ने 'होर्मुज जलडमरूमध्य' पर भी दबाव डाला है, जो फारस की खाड़ी को ओमान की खाड़ी से जोड़ने वाला एक संकरा रास्ता है। सप्ताहांत (weekend) के दौरान होर्मुज जलडमरूमध्य से केवल 17 कमोडिटी जहाज गुजरे, जबकि पिछले सप्ताह यह संख्या 37 थी और युद्ध से पहले प्रतिदिन औसतन लगभग 125 जहाज गुजरते थे।

रॉयटर्स की रिपोर्ट के अनुसार, बाब अल-मंडेब से गुजरने वाले जहाजों की संख्या में भी कमी आई है। इसे भी पढ़ें: UN में कश्मीर पर ऐसा क्या बोल रहे थे तुर्किए वाले एर्दोगान, तभी अचानक खड़ा हो गया भारत का दोस्त इजरायल, फिर...

भारत के लिए इसके क्या मायने हो सकते हैं यदि यह व्यवधान हिंद महासागर तक फैलता है, तो इसके परिणाम खाड़ी क्षेत्र से कहीं अधिक व्यापक होंगे, क्योंकि यह क्षेत्र एशिया से आने-जाने वाले ऊर्जा और वाणिज्यिक जहाजों के लिए एक प्रमुख मार्ग है। भारत हिंद महासागर के उत्तरी छोर पर स्थित है और खाड़ी क्षेत्र, अफ्रीका तथा दक्षिण-पूर्व एशिया के साथ उसके व्यापक समुद्री व्यापारिक संबंध हैं। इसलिए, पूर्ण पैमाने पर युद्ध छिड़ने से जहाजों के आवागमन, बीमा, ऊर्जा आपूर्ति और क्षेत्रीय व्यापार के लिए जोखिम बढ़ सकते हैं।

📡 स्रोत: NewsData.io

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