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क्लोरीन के दायरे में आए पेड़-पौधे झुलसे, बर्तन हुए बे-रंग:तांबे-पीतल के बर्तनों पर धब्बे, कपड़ों का रंग पड़ा फीका, अभी भी कई अस्पताल में

लेखक: JKS News Desk अंतिम अपडेट: 18 सितंबर 2026
प्रकाशक: जनता का संदेश
क्लोरीन के दायरे में आए पेड़-पौधे झुलसे, बर्तन हुए बे-रंग:तांबे-पीतल के बर्तनों पर धब्बे, कपड़ों का रंग पड़ा फीका, अभी भी कई अस्पताल में

मेरठ के पल्लवपुरम फेस-2 में मंगलवार शाम STP से हुए क्लोरीन गैस रिसाव के 24 घंटे बाद भी लोगों की सांसों से दहशत नहीं निकली। करीब एक किलोमीटर के दायरे में गैस का असर इतना रहा कि पेड़-पौधों के पत्ते झुलस गए। घरों के अंदर रखे तांबे और पीतल के बर्तनों पर धब्बे पड़ गए, जबकि कपड़ों का रंग तक फीका हो गया।

मंगलवार रात घर छोड़कर सुरक्षित स्थानों पर गए परिवारों में बुधवार शाम तक दोबारा रिसाव की आशंका बनी रही। आमतौर पर शाम को सड़कों पर घूमने वाले लोग घरों में दुबके रहे। यूथ की टोलियां भी नजर नहीं आईं। परिजनों ने बच्चों और युवाओं को बाहर निकलने से रोक दिया। बुधवार सुबह एक बार फिर हल्के गैस रिसाव की चर्चा ने लोगों की चिंता बढ़ा दी।

सूचना उच्चाधिकारियों तक पहुंची तो जल निगम के साथ दौराला आर्गेनिक की टीम प्लांट पर पहुंची और गैस की व्यवस्था की जांच की। इसके बाद जिस कैप्सूल से रिसाव हुआ था, उसे हटाया गया। दौराला ऑर्गेनिक के सहयोग से प्लांट में रखे सभी गैस कैप्सूल को बाहर करा दिया गया है। फिलहाल गैस कैप्सूल की जगह लिक्विड क्लोरीन का इस्तेमाल शुरू किया गया है।

जिस हॉल में तीन क्लोरीन कैप्सूल रखे थे, उसे भी खाली कराया जा रहा है। एक साल पहले रखे गए थे तीन कैप्सूल स्टाफ की मानें तो एक साल पहले प्लांट में क्लोरीन के तीन कैप्सूल रखे गए थे। एक कैप्सूल खत्म होने के बाद दूसरे को चालू किया जाता था और इसी तरह तीसरे का इस्तेमाल किया जाता। मंगलवार को इन्हीं में से एक कैप्सूल से क्लोरीन का रिसाव हुआ और देखते ही देखते आसपास के इलाके में इसका असर फैल गया।

जबकि एक इलाका ऐसा था, वहां कोई ज्यादा प्रभाव नहीं दिखा। पहले क्रमवार जानिए पूरे घटनाक्रम को - पल्लवपुरम फेस-2 स्थित STP से मंगलवार शाम क्लोरीन गैस का रिसाव शुरू हुआ। कुछ ही देर में आसपास के लोगों को आंखों में जलन, सांस लेने में परेशानी और घुटन महसूस होने लगी। - STP के आसपास के इलाके में अफरा-तफरी मच गई।

लोग घरों से निकलकर सुरक्षित स्थानों की ओर भागे। कई परिवारों ने घरों पर ताला लगाया और रिश्तेदारों के यहां चले गए। - गैस का प्रभाव STP से लगभग एक किलोमीटर के दायरे में दिखाई दिया। पेड़-पौधे झुलस गए। घरों में रखे तांबे-पीतल के बर्तनों पर धब्बे पड़ गए और कपड़ों का रंग फीका हो गया। - गैस की चपेट में आए लोगों को अलग-अलग अस्पतालों में भर्ती कराया गया।

प्रभावित करीब 70 प्रतिशत लोग उपचार के बाद अपने घर लौट चुके हैं। अभी भी आधा दर्जन लोगों को एहतियात के तौर पर अस्पतालों में रखा गया है। - कई परिवारों ने घरों में लौटने के बजाय रिश्तेदारों के यहां रात गुजारी। लौटे लोगों में भी गैस दोबारा फैलने की आशंका बनी रही। - लोगों ने सुबह हल्की गैस की गंध और रिसाव महसूस होने की बात कही।

इसकी सूचना अधिकारियों को दी गई। शिकायत के बाद टीम प्लांट पहुंची और व्यवस्था की जांच शुरू की। - जांच के बाद लोगों की शिकायत पर रिसाव वाले कैप्सूल को हटाने की कार्रवाई की गई। प्लांट में क्लोरीन गैस रखने की व्यवस्था को खत्म करने की दिशा में कदम उठाया गया। - कैप्सूल हटाए जाने के बाद फिलहाल लिक्विड क्लोरीन का इस्तेमाल शुरू किया गया है।

  • जिस हॉल में तीन कैप्सूल रखे थे, उसे खाली कराया जा रहा है, ताकि दोबारा इस तरह की स्थिति न बने। - हादसे के 24 घंटे बाद शाम को भी पल्लवपुरम फेस-2 की सड़कों पर सामान्य चहल-पहल नहीं दिखी। लोग घरों से बाहर निकलने से बचते रहे। धनंजय बोले- पहले हल्का रिसाव फिर बढ़ गई गैस STP के नजदीक रहने वाले धनंजय सिंह ने बताया कि गैस रिसाव के समय वह अपने बेटे पवित्र सिंह के साथ बाहर निकले थे।

उन्होंने पहले ही हल्के रिसाव की शिकायत कर्मचारी से की थी। उनका आरोप है कि कर्मचारी ने अंदर काम चलने की बात बताकर स्थिति सामान्य होने की बात कही। इसके बाद गैस का रिसाव बढ़ गया और उनकी पत्नी 41 वर्षीय प्रतिभा सिंह तथा आठ वर्षीय बेटी वैष्णवी सिंह भी इसकी चपेट में आ गईं। धनंजय के मुताबिक, दोनों को सांस लेने में परेशानी होने लगी।

उनकी बेटी वैष्णवी की ऑक्सीजन का स्तर 50 से नीचे पहुंच गया था, जबकि सामान्य स्तर करीब 98 माना जाता है। इसके बाद दोनों को उपचार के लिए अस्पताल ले जाया गया। बर्तन और कपड़ों तक पर दिखा गैस का असर रिसाव का असर केवल लोगों के स्वास्थ्य तक सीमित नहीं रहा। आसपास के घरों में रखे सामान पर भी इसका प्रभाव दिखाई दिया।

लोगों के मुताबिक तांबे और पीतल के बर्तनों पर धब्बे पड़ गए। कई कपड़ों का रंग फीका हो गया। घरों के बाहर और आसपास के पेड़-पौधों के पत्ते झुलसे हुए दिखाई दिए। इससे लोगों में आशंका और बढ़ गई कि गैस का प्रभाव कितना व्यापक था। लोग बोले- अब स्थायी समाधान चाहिए घटना के बाद स्थानीय लोगों की सबसे बड़ी चिंता STP से भविष्य में दोबारा गैस रिसाव की है।

लोगों का कहना है कि केवल लीकेज वाले कैप्सूल को हटाना पर्याप्त नहीं है। प्लांट में क्लोरीन के भंडारण और इस्तेमाल की पूरी व्यवस्था की जांच होनी चाहिए। आसपास रहने वाले परिवारों ने स्थायी सुरक्षा व्यवस्था, नियमित निरीक्षण और आपात स्थिति में तत्काल सूचना एवं बचाव की व्यवस्था की मांग उठाई है।

70 फीसदी लोग घर लौटे, लेकिन भरोसा नहीं लौटा प्रशासनिक और स्वास्थ्य स्तर पर उपचार के बाद करीब 70 प्रतिशत प्रभावित लोग अपने घर लौट चुके हैं। कुछ लोगों में संक्रमण और परेशानी अधिक होने के कारण उन्हें एहतियातन अस्पताल में रखा गया है। लेकिन बुधवार शाम तक इलाके में सामान्य जिंदगी पूरी तरह पटरी पर नहीं लौट सकी थी।

सड़कों पर पसरा सन्नाटा और घरों के अंदर मौजूद लोगों की चिंता बता रही थी कि गैस का रिसाव भले रोक दिया गया हो, लेकिन उसके बाद पैदा हुआ डर अभी कायम है।

📡 स्रोत: NewsData.io

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🎙️ जनता का संदेश का मत

क्लोरीन गैस रिसाव की इस दहशत ने हमें यह सिखाया कि पर्यावरणीय सुरक्षा सिर्फ एक विकल्प नहीं, बल्कि ज़िम्मेदारी है। जब किसी भी औद्योगिक दुर्घटना का सामना हो, तो त्वरित सूचना और आपातकालीन प्रोटोकॉल का पालन अनिवार्य है। समाज को मिलकर निगरानी, प्रशिक्षण और स्वच्छता मानकों को सुदृढ़ करना चाहिए। इस घटना से प्रेरित होकर हम सभी को सतर्क रहकर अपने और अपने परिवार की सुरक्षा के लिए सक्रिय कदम उठाने चाहिए।

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