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क्षमावाणी आत्मचिंतन, संवाद और अहंकार पर विजय प्राप्त करने का अनुपम पर्व : राज्यमंत्री श्रीमती गौर

लेखक: Maroof Ahmed Khan अंतिम अपडेट: 28 सितंबर 2026
प्रकाशक: जनता का संदेश
क्षमावाणी आत्मचिंतन, संवाद और अहंकार पर विजय प्राप्त करने का अनुपम पर्व : राज्यमंत्री श्रीमती गौर

श्रीमती गौर ने भारतीय संस्कृति की समावेशी चेतना का उल्लेख करते हुए कहा कि हमारी संस्कृति मूलतः जोड़ने की संस्कृति है। हमारी युगों पुरानी परंपराएं एवं धार्मिक पर्व समाज में परस्पर प्रेम, सौहार्द और भ्रातृभाव की जड़ों को सींचकर मजबूत करते हैं। जैन दर्शन के महत्व को रेखांकित करते हुए उन्होंने कहा कि जैन चिंतन ने सदैव जनमानस को अनुप्राणित किया है। यह दर्शन आत्मा की असीम विशालता तथा मानव जीवन में संयम, करुणा एवं सद्भाव के अपरिहार्य महत्व का प्रत्यक्ष बोध कराता है।

राज्यमंत्री श्रीमती गौर ने कहा कि क्षमावाणी के इस पावन संदेश को केवल व्यक्तिगत आचरण तक सीमित न रखकर सामाजिक जीवन के प्रत्येक आयाम में आत्मसात करने की महती आवश्यकता है। अंतःकरण में निहित प्रेम, करुणा और क्षमा के संवर्धन से ही समाज में पारस्परिक विश्वास, बंधुत्व और सामाजिक समरसता को और अधिक सुदृढ़ एवं अटूट बनाया जा सकता है।

महोत्सव के अवसर पर राज्यमंत्री श्रीमती गौर ने जैन समाज के प्रबुद्धजनों एवं श्रद्धालुओं को क्षमावाणी पर्व की बधाई व शुभकामनाएं भी दीं।

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Maroof Ahmed Khan

Maroof Ahmed Khan जनता का संदेश के संस्थापक एवं प्रधान संपादक हैं। वे जनसरोकार, निष्पक्ष रिपोर्टिंग और जनता की आवाज़ को प्रमुखता देने के लिए प्रतिबद्ध हैं।