राजनीति

‘कुछ बेरोजगार खुद को अर्थशास्त्री…’, विपक्ष-आलोचकों पर पीयूष गोयल का तंज

लेखक: JKS News Desk अंतिम अपडेट: 8 सितंबर 2026 👁️ 3 बार पढ़ा गया
प्रकाशक: जनता का संदेश
‘कुछ बेरोजगार खुद को अर्थशास्त्री…’, विपक्ष-आलोचकों पर पीयूष गोयल का तंज

कॉमर्स और इंडस्ट्री मिनिस्टर पीयूष गोयल ने विपक्षी पार्टियों और पूर्व फाइनेंस सेक्रेटरी सुभाष गर्ग की आलोचना की है.

उन्होंने बुधवार को बयान देते हुए 7.8 जीडीपी ग्रोथ पर गर्ग की टिप्पणियों का जवाब दिया. उन्होंने कहा कि उन्हें सही तुलना करना नहीं आता. वे भारत के लोगों को गुमराह करने की कोशिशें कर रहे हैं.

भारत की संशोधित जीडीपी सीरिज के मुताबिक, साल 2026 और 27 की पहली तिमाही में भारत की इकोनॉमी में वास्विक रूप से 7.8 की वृद्धि दर्ज की गई है.

गोयल ने कहा है कि उथल-पुथल भरी इस दुनिया में भारत रेगिस्तान में एक ओएसिसि की तरह है. देश दुनिया की बड़ी इकोनॉमी में सबसे तेजी से बढ़ने वाली इकोनॉमी बना हुआ है.

आलोचक जो चाहें कह सकते हैं, लेकिन 7.8 प्रतिशत ग्रोथ एक सच्चाई है: पीयूष गोयल

इसके अलावा केंद्रीय मंत्री ने कहा, 'आलोचक जो चाहें कह सकते हैं, लेकिन 7.8 प्रतिशत की ग्रोथ एक सच्चाई है.

जब मैं टेलीविजन पर कुछ विपक्षी नेताओं को देखता हूं और शायद आप उनमें पूर्व फाइनेंस सेक्रेटरी या पूर्व रिजर्व बैंक गवर्नर को शामिल कर सकते हैं, जो दोनों ही भारत या सरकार में अपना नेताओं को देखता हूं, तो मुझे लगता है कि उन्हें तुलना करना नहीं आता है.

बयान में उन्होंने पूर्व फाइनेंस सेक्रेटरी या पूर्व रिजर्व बैंक गवर्नर को भी शामिल किया है, जो भारत या सरकार में अपना कार्यकाल पूरा नहीं कर पाए.'

तिरुपुर में एक लाख लोग भेजिए, हम उन्हें नौकरी देंगे: पीयूष गोयल

गोयल ने कहा कि तिरुपुर में एक लाख भेजिए, हम उन्हें नौकरी देंगे.

उन्होंने कहा कि आलोचक किसी तरह यह पचा नहीं पा रहे हैं कि अब वे एकमात्र बेरोजगार लोग बचे हैं.

उनके पास बची खुची एकमात्र नौकरी टेलीविजन पैनल पर जाकर कोई तर्क गढ़ना या मनगढ़ंत बातें करना है.

गर्ग ने कहा कि अगर पिछले साल की जीडीपी को लगभग 86 लाख करोड़ रुपये से घटाकर 80 लाख करोड़ रुपये नहीं किया गया होता तो मौजूदा कीमतों पर जीडीप

📡 स्रोत: ABP Live

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💡 पृष्ठभूमि (Background)

पीयूष गोयल ने विपक्षी आलोचकों और पूर्व फाइनेंस सेक्रेटरी सुभाष गर्ग को 7.8% जीडीपी ग्रोथ पर टिप्पणी करते हुए गुमराह करने का आरोप लगाया। विषय है आर्थिक विकास आँकड़ों पर राजनीतिक बहस। यह खबर महत्वपूर्ण है क्योंकि जीडीपी वृद्धि को लेकर असहमति से नीतिगत निर्णयों पर असर पड़ सकता है और सार्वजनिक विश्वास प्रभावित हो सकता है। आम जनता पर इसका असर यह हो सकता है कि आर्थिक नीतियों के प्रति अनिश्चितता बढ़े, निवेशक विश्वास घटे और रोज़मर्रा की जीवनशैली पर असर पड़ सकता है।

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