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लाल पाड़ साड़ी, धोती, गमछा और पगड़ी पहने ग्रामीणों ने दशाई झंडा जतरा पर पारंपरिक नृत्य की दी प्रस्तुति

लेखक: Maroof Ahmed Khan अंतिम अपडेट: 23 अक्टूबर 2026
प्रकाशक: जनता का संदेश
लाल पाड़ साड़ी, धोती, गमछा और पगड़ी पहने ग्रामीणों ने दशाई झंडा जतरा पर पारंपरिक नृत्य की दी प्रस्तुति

खूंटी के राई गांव में पारंपरिक दशाई झंडा जतरा का आयोजन, लाल पाड़ साड़ी, धोती, गमछा और पगड़ी पहन ढोल-नगाड़ों की थाप पर थिरके ग्रामीण, पहान, पड़हा राजा और स्थानीय जनप्रतिनिधि हुए शामिल, आदिवासी परंपराओं को संरक्षित रखने का लिया संकल्प।

Short Headline: लाल पाड़ साड़ी, धोती, गमछा और पगड़ी पहने ग्रामीणों ने दशाई झंडा जतरा पर पारंपरिक नृत्य की दी प्रस्तुति

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खूंटी के राई गांव में पारंपरिक दशाई झंडा जतरा

ढोल-नगाड़ों की थाप पर थिरके ग्रामीण पहान, पड़हा राजा और स्थानीय जनप्रतिनिधि शामिल

आदिवासी परंपराओं को संरक्षित रखने का संकल्प

एंकर खूंटी के राई गांव में पारंपरिक दशाई झंडा जतरा पर रंगारंग कार्यक्रम आयोजित हुआ। कई गांवों से आए ग्रामीणों ने पारंपरिक वेशभूषा में ढोल-नगाड़ों की थाप पर नृत्य और गीतों के जरिए आदिवासी संस्कृति की खूबसूरत झलक पेश की। अतिथियों का स्वागत पारंपरिक सामूहिक गीतों से किया गया। वहीं, मेले में बच्चों के मनोरंजन के लिए झूले की भी लगाए गए।

होल्ड अप साउंड रिपोर्ट

वीओ 01. खूंटी के राई गांव का दशाई झंडा जतरा आदिवासी समाज की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत और सामूहिक एकजुटता का प्रतीक बना। लाल पाड़ साड़ी, धोती, गमछा और पगड़ी पहने महिला-पुरुषों के साथ बच्चे एवं युवाओं ने पारंपरिक वाद्य यंत्रों तथा गानों पर नृत्य की प्रस्तुतियां दी। जतरा में गांव के पहान, पड़हा राजा और बड़ी संख्या में ग्रामीण शामिल हुए।

वीओ 02. जतरा में शामिल जनप्रतिनिधियों और समाजसेवियों ने आदिवासी परंपराओं को संरक्षित रखने पर जोर दिया। समाजसेवी यासीन अंसारी ने कहा कि आधुनिक दौर में अपनी संस्कृति, पहनावे और रहन-सहन को सहेजना जरूरी है। वहीं, फुदी पंचायत की मुखिया अनिमा कच्छप ने जतरा को खेती-किसानी के बाद खुशियां साझा करने और थकान मिटाने का पारंपरिक अवसर बताया।

वीओ 03. खूंटी के विधायक रामसूर्या मुंडा भी कार्यक्रम में शामिल हुए। उन्होंने कहा कि दशाई झंडा जतरा सामाजिक एकता और आपसी भाईचारे का प्रतीक है, जहां सभी लोग मिल-जुलकर खुशियां मनाते हैं। जतरा की एक विशेष परंपरा यह भी है कि दूसरे गांवों में विवाह के बाद गई बेटियों और परिवार के सदस्यों को आमंत्रित किया जाता है, ताकि वे भी अपने गांव की परंपरा और उत्सव से जुड़े रहें।

अंतिम वीओ राई गांव का यह दशाई झंडा जतरा लोकगीतों, पारंपरिक नृत्य और सामूहिक सहभागिता के जरिए आदिवासी संस्कृति को सहेजने का संदेश दे गया।

खूंटी से ज्योत्सना की रिपोर्ट।

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Maroof Ahmed Khan

Maroof Ahmed Khan जनता का संदेश के संस्थापक एवं प्रधान संपादक हैं। वे जनसरोकार, निष्पक्ष रिपोर्टिंग और जनता की आवाज़ को प्रमुखता देने के लिए प्रतिबद्ध हैं।