लोग स्क्रैप चोरी सीबीआई जांच
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अप्रूव्ड स्टोरी
भिलाई स्पात संयन्त्र के बहुचर्चित लौह स्क्रैप चोरी मामले की जांच करेगी सीबीआई
दुर्ग :- भिलाई इस्पात संयन्त्र यानि BSP में हुए करोड़ों रुपये के बहुचर्चित लोहा और लौह स्क्रैप चोरी कांड में अब देश की सबसे बड़ी जांच एजेंसी CBI की एंट्री हो गई है। विभिन्न राजनीतिक व सामाजिक संगठनों की शिकायत और मुख्य आरोपियों की गिरफ्तारी की लगातार उठाई जा रही मांग के बाद केंद्रीय गृह मंत्रालय ने राजपत्र जारी कर केस की कमान सीधे केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (CBI) को सौंप दी है। करीब 100 करोड़ से भी ज्यादा के इस महाघोटाले में अब सिंडिकेट चलाने वाले बड़े सफेदपोशों और रसूखदारों पर शिकंजा कसना तय माना जा रहा है। मामला पुरानी भिलाई थाने का है, लेकिन इसकी गूंज अब दिल्ली तक पहुंच चुकी है।
मामले की शुरुआत 26 मई को हुई थी, जब दुर्ग पुलिस ने हथखोज इंडस्ट्रियल एरिया स्थित 'ए.के. ट्रेडर्स' पर छापा मारा था। पुलिसिया कार्रवाई में करीब 3 करोड़ 20 लाख रुपये की गाड़ियां और 90 लाख रुपये कीमत का 250 टन चोरी का स्क्रैप रंगे हाथों जब्त किया गया था। इस मामले में पुलिस अब तक 21 आरोपियों को सलाखों के पीछे भेज चुकी है।
अनुमान के मुताबिक लगभग 100 करोड़ से अधिक की देश की संपत्ति पर खुलेआम डाका डालने का एक संगठित रैकेट है। भिलाई इस्पात संयंत्र से वर्षों से जारी इस संगठित लूट के तार कई बड़े रसूखदारों और उच्च अधिकारियों से जुड़े हैं। अब जबकि गृह मंत्रालय के आदेश के बाद सीबीआई के हाथ में जांच की फाइलें आ चुकी हैं, इस्पात नगरी के स्क्रैप माफियाओं और उनके आकाओं में हड़कंप मच गया है।
सबकी निगाहें अब इस बात पर टिकी हैं कि सीबीआई की डायरी में किन-किन बड़े नामों पर गाज गिरने वाली है।
दुर्गा के अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक शोभराज अग्रवाल ने बताया कि मामले में विभिन्न संगठनों के लोग शामिल है इसलिए मामला और भी गंभीर हो जाता है. उन्होंने उम्मीद जताई कि सीबीआई की जांच के बाद और भी खुलासे हो सकेंगे.
बाईट: शोभराज अग्रवाल, अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक दुर्ग
उम्मीद जताई जा रही है कि स्थानीय पुलिस की जांच के बाद अब सीबीआई की फॉरेंसिक और वित्तीय जांच यह तय करेगी कि करोड़ों के इस सिंडिकेट का असली मास्टरमाइंड कौन है।
🎙️ जनता का संदेश का मत
भिलाई के स्क्रैप चोरी के मामले से हमें यह सिखने को मिलता है कि जब भी किसी संस्था या समाज में अनियमितता दिखे, तो हमें शांतिपूर्ण और कानूनी रास्तों से समाधान ढूँढ़ना चाहिए। शिकायत दर्ज कराना, पारदर्शिता मांगना और न्यायिक प्रक्रिया का पालन करना ही असली बदलाव लाता है। इस घटना से प्रभावित सभी को हम सहानुभूति देते हैं और आशा करते हैं कि सत्य और जवाबदेही से समाज में विश्वास फिर से स्थापित होगा।