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लोहरदगा के कस्तूरबा विद्यालय में 13 वर्षीय छात्रा की मौत, एंबुलेंस उपलब्ध नहीं कराए जाने का दावा

लेखक: Maroof Ahmed Khan अंतिम अपडेट: 14 अक्टूबर 2026
प्रकाशक: जनता का संदेश
लोहरदगा के कस्तूरबा विद्यालय में 13 वर्षीय छात्रा की मौत, एंबुलेंस उपलब्ध नहीं कराए जाने का दावा

लोहरदगा के कस्तूरबा गांधी आवासीय विद्यालय में 13 वर्षीय छात्रा की मौत, परिजनों ने लगाया लापरवाही का आरोप, एंबुलेंस उपलब्ध नहीं कराए जाने का दावा।

Short Headline: लोहरदगा के कस्तूरबा विद्यालय में 13 वर्षीय छात्रा की मौत, एंबुलेंस उपलब्ध नहीं कराए जाने का दावा

13 अक्टूबर, लोहरदगा: लोहरदगा के किस्को प्रखंड स्थित कस्तूरबा गांधी आवासीय विद्यालय में सातवीं कक्षा की 13 वर्षीय छात्रा सुनीता लोहरा की मौत से हड़कंप मच गया है। छात्रा रंगड़ा गांव की रहने वाली थी और पिछले दो वर्षों से विद्यालय में रहकर पढ़ाई कर रही थी।

परिजनों के अनुसार मंगलवार सुबह विद्यालय से फोन कर छात्रा की तबीयत खराब होने की सूचना दी गई। इसके बाद परिजन विद्यालय पहुंचे और गंभीर हालत में उसे मोटरसाइकिल से लोहरदगा सदर अस्पताल ले गए, जहां चिकित्सकों ने उसे मृत घोषित कर दिया। परिजनों ने आरोप लगाया कि छात्रा की तबीयत कई दिनों से खराब थी और समय पर उचित इलाज की व्यवस्था नहीं की गई। उन्होंने एंबुलेंस उपलब्ध नहीं कराए जाने का भी दावा किया है।

परिजनों ने विद्यालय प्रबंधन की भूमिका की निष्पक्ष जांच कर दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है। फिलहाल छात्रा की मौत के वास्तविक कारणों और लगाए गए आरोपों की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। मामले में विद्यालय प्रबंधन और जिला प्रशासन का पक्ष सामने आना बाकी है।

बाइट- परिजन

💡 पृष्ठभूमि (Background)

कस्तूरबा गांधी आवासीय विद्यालय में 13‑वर्षीय छात्रा सुनीता लोहरा की मौत के बाद, परिवार ने एंबुलेंस न मिलने का आरोप लगाया है। यह घटना स्कूल सुरक्षा और आपातकालीन सेवाओं के प्रावधान पर सवाल उठाती है। ऐसी दुर्घटना से यह स्पष्ट होता है कि शैक्षणिक संस्थानों में चिकित्सा सुविधाओं की कमी कितनी खतरनाक हो सकती है। यदि स्कूलों में एंबुलेंस या प्राथमिक चिकित्सा का इंतजाम न हो तो छात्र‑छात्राएँ और अभिभावक दोनों को जोखिम का सामना करना पड़ सकता है। इस प्रकार की घटनाएँ शिक्षा नीति और स्वास्थ्य सेवाओं के सुधार

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Maroof Ahmed Khan

Maroof Ahmed Khan जनता का संदेश के संस्थापक एवं प्रधान संपादक हैं। वे जनसरोकार, निष्पक्ष रिपोर्टिंग और जनता की आवाज़ को प्रमुखता देने के लिए प्रतिबद्ध हैं।