इतिहास

लोकवाद्य और लोकधुनों पर आधारित ‘रंग-तरंग’ कार्यक्रम का हो रहा है आयोजन

लेखक: Maroof Ahmed Khan अंतिम अपडेट: 8 सितंबर 2026
प्रकाशक: जनता का संदेश
लोकवाद्य और लोकधुनों पर आधारित ‘रंग-तरंग’ कार्यक्रम का हो रहा है आयोजन

रायपुर, 2 सितंबर 2026

रायपुर के महंत घासीदास संग्रहालय परिसर में कल से लोकवाद्य और लोकधुनों पर आधारित ‘रंग-तरंग’ कार्यक्रम का आयोजन किया जा रहा है। पहले दिन कल वाद्य और संगीत के साथ ही फ्यूजन, पियानो, तबला और बांसुरी वादन की अलग-अलग प्रस्तुतियां दी गईं। इस कार्यक्रम का उद्देश्य छत्तीसगढ़ की समृद्ध लोक संगीत परंपरा, पारंपरिक वाद्ययंत्रों और आधुनिक संगीत के सुरों को मंच प्रदान करना है।

संस्कृति और पुरातत्व विभाग के संचालक डॉक्टर संजय कन्नौजे ने कहा कि छत्तीसगढ़ की पहचान उसकी समृद्ध लोक संस्कृति और संगीत परंपरा से है।

उन्होंने कहा कि ‘रंग-तरंग’ के माध्यम से पारंपरिक लोकवाद्यों और लोकधुनों को आधुनिक संगीत के साथ प्रस्तुत करने का प्रयास किया जा रहा है।

💡 पृष्ठभूमि (Background)

रंग-तरंग कार्यक्रम एक सांस्कृतिक पहल है जो लोकवाद्य और लोकधुनों को मंच पर प्रस्तुत करता है। यह कार्यक्रम रायपुर के महंत घासीदास संग्रहालय परिसर में 2 सितंबर 2026 से शुरू होकर लोक संगीत की समृद्ध परंपरा को उजागर करता है। यह खबर महत्वपूर्ण है क्योंकि यह छत्तीसगढ़ की पारंपरिक ध्वनियों को आधुनिक संगीत के साथ जोड़ती है, जिससे सांस्कृतिक पहचान मजबूत होती है। आम जनता पर इसका असर सकारात्मक है: युवाओं को पारंपरिक वाद्ययंत्र सीखने का प्रेरणा मिलेगी, सांस्कृतिक पर्यटन बढ़ेगा, और समाज में संगीत के प्रति जाग

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Maroof Ahmed Khan

Maroof Ahmed Khan जनता का संदेश के संस्थापक एवं प्रधान संपादक हैं। वे जनसरोकार, निष्पक्ष रिपोर्टिंग और जनता की आवाज़ को प्रमुखता देने के लिए प्रतिबद्ध हैं।