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मड़ीखेड़ा डैम के चार गेट फिर खोले:डैम का जलस्तर फुल होने से 10 सेमी कम, कुल 547 क्यूमेक्स पानी छोड़ा गया

लेखक: JKS News Desk अंतिम अपडेट: 21 सितंबर 2026
प्रकाशक: जनता का संदेश
मड़ीखेड़ा डैम के चार गेट फिर खोले:डैम का जलस्तर फुल होने से 10 सेमी कम, कुल 547 क्यूमेक्स पानी छोड़ा गया

शिवपुरी जिले के मड़ीखेड़ा डैम के चार गेट रविवार दोपहर फिर खोल दिए गए हैं। डैम में पानी की आवक बढ़ने के बाद यह फैसला लिया गया। डैम का जलस्तर 346.15 मीटर तक पहुंच गया है, जो इसकी पूरी क्षमता से सिर्फ 10 सेंटीमीटर कम है। अटल सागर मड़ीखेड़ा डैम का जलस्तर रविवार दोपहर 3 बजे 346.15 मीटर रिकॉर्ड किया गया।

डैम का पूरा जलस्तर 346.25 मीटर है। डैम में अभी 827.88 एमसीयूएम पानी जमा है, जो इसकी कुल क्षमता 834.83 एमसीयूएम का 99.17 प्रतिशत है। जलस्तर बढ़ने के कारण डैम के गेट नंबर 5 और 6 को एक-एक मीटर खोला गया है। वहीं, गेट नंबर 4 और 7 को आधा-आधा मीटर खोला गया। चारों गेटों की कुल ओपनिंग 3 मीटर है।

इन गेटों से 411.358 क्यूमेक्स पानी छोड़ा जा रहा है। इसके अलावा पावर हाउस से 135.42 क्यूमेक्स पानी छोड़ा जा रहा है। इस तरह डैम से कुल 546.778 क्यूमेक्स पानी बाहर निकाला जा रहा है। शिवपुरी जिले में इस साल औसत से ज्यादा बारिश हुई है। भू-अभिलेख विभाग के आंकड़ों के मुताबिक, 1 जून 2026 से 18 सितंबर तक जिले में 953.42 मिमी औसत बारिश हुई है।

जिले की सामान्य औसत बारिश 816.3 मिमी है। पिछले कुछ दिनों से शिवपुरी में बारिश नहीं हुई है, लेकिन ऊपरी इलाकों में हुई बारिश से मड़ीखेड़ा डैम में पानी बढ़ा है। अब तक शिवपुरी में 995.20 मिमी, बैराड़ में 1057 मिमी, पोहरी में 979 मिमी, नरवर में 966 मिमी, करैरा में 981.80 मिमी, पिछोर में 975 मिमी, कोलारस में 812.80 मिमी, बदरवास में 980.50 मिमी और खनियाधाना में 833.50 मिमी बारिश रिकॉर्ड की गई है।

पिछले साल इसी समय जिले में 1382.34 मिमी औसत बारिश हुई थी। पूरे साल में 1585.86 मिमी बारिश रिकॉर्ड की गई थी। इस बार डैम का जलस्तर अपनी अधिकतम क्षमता के बहुत करीब पहुंच गया है। इसलिए पानी को कंट्रोल करने के लिए चार गेट खोलकर लगातार पानी छोड़ा जा रहा है।

📡 स्रोत: NewsData.io

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🎙️ जनता का संदेश का मत

मड़ीखेड़ा डैम के गेट फिर खोलने से जलस्तर में 10 सेमी की कमी हुई, परंतु इससे हमें यह सिखने को मिलता है कि प्रकृति के साथ सहजीवन के लिए संतुलित प्रबंधन आवश्यक है। जब जल स्तर बढ़ता है, तो समय पर गेट खोलना न केवल बाढ़ रोकता है, बल्कि कृषि और उद्योग को भी लाभ पहुँचाता है। हमें नदियों और बांधों के प्रति जागरूक रहकर, वैज्ञानिक निर्णय लेने और सामूहिक जिम्मेदारी निभाने की प्रेरणा मिलती है।

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