मध्यप्रदेश में अब छोटे अपराधों पर सामुदायिक सेवा की सजा लागू होगी, गृह विभाग का आदेश अस्पताल की सफाई से पौधारोपण तक करने होंगे काम
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भोपाल। मध्यप्रदेश में छोटे अपराधों के मामलों में न्याय व्यवस्था को सुधारात्मक स्वरूप देने की दिशा में सामुदायिक सेवा की व्यवस्था लागू कर दी गई है। गृह विभाग ने ‘मध्यप्रदेश कम्युनिटी सर्विस गाइडलाइंस-2026’ को अधिसूचित किया है। इसके तहत अदालत अपराध की प्रकृति और परिस्थितियों को देखते हुए दोषी को निश्चित अवधि तक बिना पारिश्रमिक सामुदायिक सेवा करने की सजा दे सकती है।
यह व्यवस्था भारतीय न्याय संहिता (BNS), 2023 में सामुदायिक सेवा को दंड के एक रूप के तौर पर शामिल किए जाने के बाद लागू हुई है। इसका उद्देश्य छोटे अपराधों के मामलों में दंड के साथ सामाजिक जिम्मेदारी की भावना विकसित करना और सुधारात्मक न्याय को बढ़ावा देना है।
गाइडलाइन के तहत सामुदायिक सेवा की अवधि एक दिन से लेकर अधिकतम 60 दिन या 40 से 240 घंटे तक निर्धारित की जा सकती है। सेवा की अवधि और स्वरूप तय करते समय अपराध की प्रकृति के साथ दोषी व्यक्ति की उम्र, शारीरिक क्षमता, शिक्षा, कौशल और सामाजिक-आर्थिक परिस्थितियों को भी ध्यान में रखा जा सकता है।
सामुदायिक सेवा के तहत दोषी व्यक्ति को अस्पताल या स्वास्थ्य संस्थान में सफाई और रखरखाव, नगर निगम अथवा नगर पालिका के साथ सफाई एवं सार्वजनिक स्थलों के रखरखाव, सड़क किनारे कचरा हटाने जैसे कार्य दिए जा सकते हैं। इसके अलावा सरकारी भवनों, सार्वजनिक पार्कों, वृद्धाश्रम, छात्रावास और अन्य सार्वजनिक संस्थानों में सेवा कार्य भी कराए जा सकते हैं।
पर्यावरण संरक्षण से जुड़े कार्यों में पौधारोपण, पौधों को पानी देना, खरपतवार हटाना और वन विभाग से जुड़े कार्य शामिल किए जा सकते हैं। पुलिस थाना परिसर में सफाई, यातायात नियंत्रण या भीड़ प्रबंधन में सहयोग जैसे कार्य भी सामुदायिक सेवा के दायरे में आ सकते हैं।
गाइडलाइन में व्यक्ति की योग्यता और कौशल को भी महत्व दिया गया है। यदि सामुदायिक सेवा की सजा पाने वाला व्यक्ति डॉक्टर, इंजीनियर, लेखापाल या अधिवक्ता जैसे किसी पेशे में कुशल है, तो अदालत उसके पेशेवर कौशल का उपयोग ऐसे कार्य में करने का निर्देश दे सकती है, जिससे जरूरतमंद या वंचित समुदाय को लाभ मिले।
BNS में कुछ निर्दिष्ट अपराधों के लिए सामुदायिक सेवा को सजा के रूप में रखा गया है। इनमें पहली बार पांच हजार रुपये से कम मूल्य की चोरी, चोरी की गई संपत्ति वापस किए जाने की स्थिति, नशे की हालत में सार्वजनिक स्थान पर दुर्व्यवहार, मानहानि, आत्महत्या का प्रयास कर किसी लोक सेवक को उसकी वैध शक्ति के प्रयोग से प्रभावित करने का प्रयास और लोक सेवक द्वारा विधि के निर्देश की अवज्ञा से जुड़े कुछ अपराध शामिल हैं।
सामुदायिक सेवा की निगरानी के लिए जिला परिवीक्षा अधिकारी या सरकार द्वारा नामित अधिकारी की भूमिका निर्धारित की गई है। इस व्यवस्था का उद्देश्य दंड देने के साथ दोषी व्यक्ति को समाज के प्रति अपनी जिम्मेदारी का एहसास कराना है।
कानून में पहली बार सामुदायिक सेवा को दंड के रूप में शामिल किया गया था और BNS के संबंधित प्रावधान 1 जुलाई 2024 से लागू हुए थे। अब मध्यप्रदेश में इसकी क्रियान्वयन व्यवस्था के लिए राज्य स्तर पर गाइडलाइन अधिसूचित की गई है।
💡 पृष्ठभूमि (Background)
मध्यप्रदेश सरकार ने छोटे अपराधों के लिए सामुदायिक सेवा की सजा लागू करने का निर्णय लिया है। यह कदम अपराधियों को बिना पारिश्रमिक के अस्पताल की सफाई, पौधारोपण आदि कार्यों में लगाकर सुधारात्मक मार्ग पर चलने का उद्देश्य रखता है। यह पहल न्याय व्यवस्था को अधिक मानवीय और समाजोपयोगी बनाने के प्रयास का हिस्सा है। जनता के लिए इसका मतलब है कि अपराधियों को जेल की बजाय समाज में योगदान देकर पुनर्वास का मौका मिलेगा, जिससे अपराध दर घटने और सामाजिक समरसता बढ़ने की आशा है।