महिला अस्पताल में प्रसव के बाद जच्चा-बच्चा की मौत:परिजनों का आरोप- ब्लड जुटाने में बर्तन-मोटरसाइकिल बेचने की नौबत आई
ताज़ा खबरों से अपडेट रहने के लिए हमारे WhatsApp चैनल से जुड़ेंJoin करें →सीतापुर के जिला महिला अस्पताल में शनिवार रात प्रसव के बाद जच्चा-बच्चा की मौत हो गई। घटना के बाद परिवार में कोहराम मच गया। परिजनों ने अस्पताल कर्मियों पर इलाज में लापरवाही बरतने और समय पर ब्लड की व्यवस्था नहीं कराने का आरोप लगाया है। उनका कहना है कि महिला की हालत गंभीर होने पर ब्लड की जरूरत बताई गई, लेकिन परिवार की आर्थिक स्थिति कमजोर होने के कारण इंतजाम करने में परेशानी हुई।
परिजनों के मुताबिक, ब्लड की व्यवस्था होने के बाद महिला को जिला अस्पताल रेफर किया गया। उनका आरोप है कि रेफर करने के बाद महिला को जिला अस्पताल के बाहर छोड़ दिया गया। इसके करीब 10 मिनट बाद उसकी मौत हो गई। परिजनों ने जच्चा-बच्चा की मौत के लिए इलाज और ब्लड की व्यवस्था में हुई कथित देरी को जिम्मेदार बताते हुए कार्रवाई की मांग की है।
सुबह प्रसव के लिए पत्नी को अस्पताल लेकर पहुंचा था पति खैराबाद थाना क्षेत्र के दीवानपुरवा गांव निवासी सुशील शनिवार सुबह करीब 11 बजे पत्नी शांति को प्रसव के लिए जिला महिला अस्पताल लेकर पहुंचा था। परिजनों के अनुसार, जांच के दौरान डॉक्टरों ने महिला में खून की कमी बताई और हालत गंभीर होने की जानकारी दी।
डॉक्टरों ने लखनऊ रेफर करने की बात कही और ब्लड की व्यवस्था करने को कहा। ब्लड जुटाने के लिए बर्तन-मोटरसाइकिल बेचने की कोशिश परिजनों का कहना है कि परिवार आर्थिक रूप से कमजोर है। शांति की जान बचाने के लिए ब्लड और इलाज का खर्च जुटाने के लिए उन्होंने बर्तन और मोटरसाइकिल तक बेचने की कोशिश की।
इसी बीच देर शाम शांति ने एक बच्चे को जन्म दिया। परिवार के मुताबिक, नवजात सामान्य हालत में पैदा हुआ था, लेकिन जन्म के कुछ देर बाद उसकी मौत हो गई। नवजात की मौत के बाद बिगड़ी महिला की हालत नवजात की मौत के बाद शांति की हालत भी बिगड़ गई। परिजनों का आरोप है कि इसके बाद डॉक्टरों ने उसे जिला अस्पताल रेफर कर दिया।
उनका कहना है कि ब्लड का इंतजाम होने के बाद रेफर किया गया, लेकिन महिला को अस्पताल पहुंचाने की समुचित व्यवस्था नहीं की गई। आरोप है कि महिला को जिला अस्पताल के बाहर छोड़ दिया गया और करीब 10 मिनट बाद उसकी भी मौत हो गई। परिजनों ने कार्रवाई की मांग की परिजनों ने अस्पताल में इलाज और समय पर ब्लड की व्यवस्था नहीं होने को जच्चा-बच्चा की मौत का कारण बताया है।
उनका आरोप है कि यदि समय पर उपचार और ब्लड की व्यवस्था हो जाती तो महिला और नवजात की जान बच सकती थी। परिवार ने मामले की जांच कर जिम्मेदार लोगों पर कार्रवाई की मांग की है।
📡 स्रोत: NewsData.io
🎙️ जनता का संदेश का मत
जन्म के बाद की छोटी-छोटी अनदेखी बड़ी पीड़ा बन जाती है। जब परिवार की आर्थिक कठिनाई हो, तो अस्पताल और समाज को मिलकर रक्तदान के विकल्पों को सुलभ बनाना चाहिए—रक्त बैंक, दान शिविर, और आपातकालीन सहायता योजनाएँ। इस तरह की आपदाओं से बचने के लिए स्वास्थ्य व्यवस्था में पारदर्शिता और समय पर सूचना अनिवार्य है। हर बच्चे की जान को समान अधिकार मानते हुए, हमें सहानुभूति और सहयोग से समाज को मजबूत बनाना चाहिए।