अपराध

'महिला के घर में घुसना,कपड़े उठाना रेप की कोशिश नहीं':झारखंड हाईकोर्ट ने आरोपी को दी राहत; कहा- 4 साल नहीं 8 महीने की सजा पर्याप्त

लेखक: JKS News Desk अंतिम अपडेट: 23 सितंबर 2026 👁️ 8 बार पढ़ा गया
प्रकाशक: जनता का संदेश
'महिला के घर में घुसना,कपड़े उठाना रेप की कोशिश नहीं':झारखंड हाईकोर्ट ने आरोपी को दी राहत; कहा- 4 साल नहीं 8 महीने की सजा पर्याप्त

झारखंड हाईकोर्ट ने दुष्कर्म के प्रयास के करीब 27 साल पुराने मामले में आरोपी की दोष सिद्धि बरकरार रखते हुए सजा में बड़ी राहत दी है। अदालत ने स्पष्ट किया कि रात में महिला के घर में घुसना, उसे पकड़ना, कपड़े उठाना या उसके साथ अशोभनीय हरकत करना गंभीर अपराध है, लेकिन हर ऐसी हरकत को स्वत: दुष्कर्म का प्रयास नहीं माना जा सकता।

दुष्कर्म के प्रयास का अपराध तभी बनता है, जब आरोपी की ओर से ऐसा प्रत्यक्ष और निर्णायक कृत्य किया गया हो, जो दुष्कर्म को अंजाम देने की दिशा में स्पष्ट रूप से आगे बढ़ रहा हो। जस्टिस प्रदीप कुमार श्रीवास्तव की अदालत ने घाटशिला से जुड़े कमलेंदु महतो उर्फ खोका की आपराधिक अपील पर सुनवाई करते हुए यह टिप्पणी की।

अदालत ने मामले में आईपीसी की धारा 354 के तहत अपराध माना और आरोपी को पहले सुनाई गई 4 साल की सजा के बजाय 8 महीने की सजा को पर्याप्त माना। आरोपी को भागते देखा, घटना किसी ने नहीं देखी हाईकोर्ट ने मामले में पेश किए गए गवाहों के बयानों का भी बारीकी से विश्लेषण किया। पीड़िता के भाई ने अदालत को बताया कि उसे घटना की जानकारी अपनी बहन से मिली थी।

वह घटना का प्रत्यक्षदर्शी नहीं था। वहीं पड़ोसी प्रफुल्लो कुमार सिंह, परी सिंह, बुधी सिंह, अनंतो सिंह समेत अन्य गवाहों ने पीड़िता की आवाज और शोर सुनने तथा आरोपी को उसके घर से भागते देखने की बात कही। किसी भी अन्य गवाह ने घटना को अपनी आंखों से नहीं देखा था। अदालत ने इन्हीं परिस्थितियों को देखते हुए माना कि आरोपी ने महिला की लज्जा भंग करने के इरादे से उस पर हमला किया था।

इसलिए उसके खिलाफ आईपीसी की धारा 354 के तहत अपराध बनता है। हालांकि उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर दुष्कर्म के प्रयास की धारा को उसी रूप में कायम रखना उचित नहीं माना गया। आधी रात को घर में घुसा था आरोपी, शोर मचाने पर भागा मामला 27 दिसंबर 1999 की आधी रात का है। पीड़िता अपने घर में सो रही थी, जबकि उसकी मां बगल के कमरे में थीं।

घर में उस समय कोई पुरुष सदस्य मौजूद नहीं था। रात करीब 12 बजे पीड़िता ने जबरन दरवाजा खोले जाने की आवाज सुनी। इसके बाद आरोपी कमलेंदु महतो उर्फ खोका कमरे में घुस आया और उसके साथ छेड़छाड़ करने लगा। पीड़िता के अनुसार, आरोपी उसके शरीर पर चढ़ गया और उसकी साड़ी उठाकर दुष्कर्म करने का प्रयास किया।

महिला ने शोर मचाया और आरोपी को अपने शरीर से हटाया। आवा

📡 स्रोत: Dainik Bhaskar

📰 पूरी खबर पढ़ें (Dainik Bhaskar पर जाएं)

💡 पृष्ठभूमि (Background)

झारखंड हाईकोर्ट ने 27‑साल पुराने दुष्कर्म के प्रयास के मामले में आरोपी की दोषसिद्धि बरकरार रखते हुए सजा में राहत दी। अदालत ने स्पष्ट किया कि महिला के घर में रात में घुसना, उसे पकड़ना, कपड़े उठाना आदि गंभीर अपराध हैं, परंतु हर एक हरकत को स्वतः दुष्कर्म का प्रयास नहीं माना जा सकता। केवल तभी प्रयास माना जाएगा जब आरोपी ने प्रत्यक्ष और स्पष्ट रूप से अपराध करने का इरादा दिखाया हो। यह फैसला दिखाता है कि न्यायालय अपराध के इरादे और क्रिया के बीच सूक्ष्म अंतर को पहचानता है। यह निर्णय समाज में लैंगिक अपराध

🎙️ जनता का संदेश का मत

इस निर्णय से हमें यह याद दिलाता है कि अपराध की परिभाषा केवल कार्य पर नहीं, बल्कि उसके इरादे और परिणाम पर भी निर्भर करती है। समाज में हिंसा के विकल्प के रूप में संवाद, मध्यस्थता और कानूनी मार्ग अपनाने की आवश्यकता है। पीड़ितों के लिए सहानुभूति और सहायता का ढांचा मजबूत करें, ताकि वे फिर से सुरक्षित और सम्मानित महसूस कर सकें।

J
JKS News Desk

जनता का संदेश की संपादकीय टीम आपके लिए भोपाल, मध्यप्रदेश और देश की सटीक और विश्वसनीय समाचार प्रस्तुत करती है।