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महिला LPG-सिलेंडर नहीं उठा सकती... कहकर नौकरी नहीं दी थी:अब इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन महिला को देगा 12 लाख रुपए का मुआवजा

लेखक: JKS News Desk अंतिम अपडेट: 2 अक्टूबर 2026 👁️ 21 बार पढ़ा गया
प्रकाशक: जनता का संदेश
महिला LPG-सिलेंडर नहीं उठा सकती... कहकर नौकरी नहीं दी थी:अब इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन महिला को देगा 12 लाख रुपए का मुआवजा

सुप्रीम कोर्ट ने इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन लिमिटेड (आईओसी) को एक योग्य महिला उम्मीदवार सुमित्रा को 12 लाख रुपए मुआवजा देने का आदेश दिया है। करीब 38 साल पहले आईओसी ने यह कहकर नौकरी देने से इनकार किया था कि 'महिला सिलेंडर नहीं उठा पाएगी। महिला अब रिटायरमेंट की उम्र तक पहुंच चुकी है। इसलिए कोर्ट ने उसे नौकरी देने के बजाय 12 लाख रुपए का मुआवजा देना तय किया है। जस्टिस अरविंद कुमार और जस्टिस विपुल एम पंचोली की बेंच ने कॉर्पोरेशन की कड़ी आलोचना करते हुए कहा कि केवल महिला होने के आधार पर नौकरी न देना नारीत्व का अपमान है। अब पूरा मामला समझिए...

हरियाणा के गुड़्हा गांव की रहने वाली सुमित्रा सुमित्रा उन 49 लोगों में शामिल थीं, जिनकी सिफारिश डिप्टी कमिश्नर की अध्यक्षता वाली एक स्थानीय समिति ने एलपीजी बॉटलिंग प्लांट में रिफिलिंग हेल्पर या कैजुअल खलासी के पद के लिए की थी। यह मामला गुढ़ा गांव में रहने वाली एक महिला से जुड़ा है।

साल 1988 में उनका नाम उन 49 लोगों की सूची में शामिल था, जिनकी सिफारिश डिप्टी कमिश्नर की अध्यक्षता वाली स्थानीय समिति ने इंडियन ऑयल कॉरपोरेशन के LPG बॉटलिंग प्लांट के लिए की थी। महिला ने खलासी, चपरासी या रीफिलिंग हेल्पर के पद के लिए इंटरव्यू दिया था। लेकिन उन्हें नौकरी नहीं मिली जबकि सूची में शामिल अन्य लोगों को नियुक्ति पत्र दे दिए गए थे।

इसके बाद महिला ने नौकरी नहीं दिए जाने के फैसले के खिलाफ ट्रायल कोर्ट का रुख किया। ट्रायल कोर्ट ने माना कि महिला नौकरी के लिए तय योग्यता पूरी करती थीं। कोर्ट ने एक गवाह के बयान का भी हवाला दिया, जिससे यह बात सामने आई कि महिला को सिर्फ इसलिए नौकरी नहीं दी गई क्योंकि वह महिला थीं। हालांकि, ट्रायल कोर्ट के फैसले के बाद आईओसी ने अपील की और 6 अगस्त 1993 को प्रथम अपीलीय अदालत ने ट्रायल कोर्ट का फैसला पलट दिया।

इसके बाद मामला हरियाणा हाईकोर्ट और फिर सुप्रीम कोर्ट पहुंचा था। क्या महिलाएं घरों में गैस सिलेंडर नहीं उठातीं: कोर्ट इंडियन ऑयल के वकील ने दलील दी थी कि इस काम में भारी LPG सिलेंडर उठाने पड़ते हैं और रात की शिफ्ट होती है, इसलिए शायद अधिकारियों ने महिला को उपयुक्त नहीं माना। इस पर कोर्ट ने वकील से सवाल किया- क्या महिलाएं घरों में गैस सिलेंडर नहीं उठातीं?

कोर्ट ने कहा- हम भारत से हैं और हर दिन महिलाओं के सम्मान की बात करते हैं।

📡 स्रोत: Dainik Bhaskar

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💡 पृष्ठभूमि (Background)

यह खबर एक महिला सुमित्रा के खिलाफ इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन लिमिटेड (आईओसी) द्वारा लिंग आधारित भेदभाव के मामले पर है। सुप्रीम कोर्ट ने आईओसी को 12 लाख रुपए का मुआवजा देने का आदेश दिया है, क्योंकि कंपनी ने 38 वर्ष पहले उसे नौकरी देने से इनकार कर दिया था, यह कहते हुए कि महिला सिलेंडर नहीं उठा पाएगी। यह घटना लिंग समानता और कार्यस्थल में भेदभाव के प्रति समाज की जागरूकता को दर्शाती है। यदि ऐसी भेदभावपूर्ण नीतियाँ सुधारी जाती हैं, तो इससे अन्य महिलाओं को भी समान अवसर मिलेंगे और कार्यस्थल में समानता बढ़ेगी

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