'मैं BA पास, सरकार मुझे नौकरी दे':बगहा के मैनेजर की हत्या पर पत्नी बोली-दो दुधमुंही बच्चियों को कैसे संभालूंगी; घर का एकमात्र कमाऊ व्यक्ति चला गया
ताज़ा खबरों से अपडेट रहने के लिए हमारे WhatsApp चैनल से जुड़ेंJoin करें →बगहा के रामनगर में धान के खेत में पानी पटाने को लेकर शुरू हुआ विवाद इतना बढ़ गया कि एक परिवार ने अपना कमाऊ सदस्य खो दिया। रामनगर थाना क्षेत्र के जुड़ा पकड़ी गांव में 15 सितंबर की सुबह पानी के मामूली विवाद को लेकर दो पक्षों में कहासुनी और मारपीट हुई। आरोप है कि इसी दौरान फरसा से हमला कर खटौरी गांव निवासी मैनेजर मांझी (32) की हत्या कर दी गई।
उसका भाई गुड्डू मांझी भी गंभीर रूप से घायल हुआ है। उसका इलाज जीएमसीएच में कराया गया, जहां पुलिस के समक्ष उसने अपना फर्दबयान दर्ज कराया। बाद में उसे बेहतर इलाज के लिए पटना PMCH भेजे जाने की जानकारी परिजन ने दी है। घटना के बाद पुलिस ने मामले में कार्रवाई करते हुए चार आरोपियों को गिरफ्तार किया है।
गिरफ्तार आरोपियों में भगेलू चौधरी, उसके बेटे कृष्णा चौधरी और चंदन कुमार और भगेलू की पत्नी सुनीता देवी शामिल हैं। पुलिस ने घटना में इस्तेमाल फरसा भी बरामद किया है। मैनेजर की मौत के बाद खटौरी स्थित उसके घर में मातम पसरा है। परिवार के लिए सबसे बड़ा संकट यह है कि जिस व्यक्ति की कमाई से घर चलता था, वही अब नहीं रहा।
पीछे पत्नी और दो छोटी बेटियां हैं। एक बच्ची महज सात माह की है, जबकि दूसरी करीब तीन साल की। सुबह खेत में पानी को लेकर शुरू हुआ विवाद परिजन और प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक विवाद की शुरुआत धान के खेत में पानी पटाने को लेकर हुई। खेत में पानी जाने और पानी रोकने को लेकर दोनों पक्षों के बीच पहले से विवाद था।
प्रत्यक्षदर्शी प्रसाद मांझी के मुताबिक, 15 सितंबर की सुबह पानी को लेकर विवाद की जानकारी मिलने के बाद वह मौके पर पहुंचे थे। उनका कहना है कि खेत की ओर पानी जाने से संबंधित विवाद को बातचीत से सुलझाने की कोशिश की जा रही थी। मामला बढ़ने के बाद पंचायत के जरिए विवाद खत्म करने की कोशिश हुई।
इसके लिए कुछ लोग मुखिया के दरवाजे पर भी पहुंचे, लेकिन वहां मुखिया नहीं मिले। इसके बाद लोग हरिहर यादव के दरवाजे पर जुटे। वहां भी दोनों पक्षों के बीच बातचीत हुई। इसी दौरान विवाद बढ़ने और मारपीट होने की बात सामने आई। 'पहले पंचायत से मामला सुलझाने की कोशिश हुई' प्रत्यक्षदर्शी प्रसाद मांझी ने बताया कि पानी के विवाद के बाद कई लोग एक जगह जुटे थे।
सभी का मकसद विवाद को बातचीत से खत्म करना था। उनका कहना है कि पहले मुखिया के पास जाने की कोशिश की गई, लेकिन उनके नहीं मिलने पर दूसरी जगह लोगों ने बैठकर बातचीत शुरू की। प्रसाद के मुताबिक, बातचीत के दौरान माहौल बिगड़ गया। आरोप है कि इसी दौरान मैनेजर पर पीछे से फरसा से हमला किया गया। बीच-बचाव करने पहुंचे गुड्डू मांझी पर भी हमला हुआ।
हमले के बाद मौके पर अफरा-तफरी मच गई। लोग इधर-उधर भागने लगे। घायल मैनेजर और गुड्डू को इलाज के लिए ले जाने की कोशिश की गई। इसी दौरान मैनेजर की हालत बिगड़ गई और उसकी मौत हो गई। पुलिस के फर्दबयान में गाली-गलौज और मारपीट का जिक्र पुलिस के अनुसार, घटना के बाद घायल गुड्डू मांझी का फर्दबयान पुलिस अधिकारी के समक्ष जीएमसीएच में दर्ज कराया गया।
फर्दबयान के मुताबिक, 15 सितंबर 2026 की सुबह करीब 8:30 बजे मामूली विवाद को लेकर भगेलू चौधरी और उसके सहयोगियों द्वारा गुड्डू मांझी और उसके बड़े भाई मैनेजर मांझी के साथ गाली-गलौज और मारपीट की गई। इसमें दोनों के गंभीर रूप से घायल होने की बात कही गई है। सूचना मिलते ही रामनगर थानाध्यक्ष 112 की टीम और पुलिस बल के साथ घटनास्थल पर पहुंचे।
पुलिस की दूसरी टीम ने भी मौके पर पहुंचकर मामले की जांच शुरू की। पुलिस के मुताबिक, जांच के बाद गुड्डू मांझी के फर्दबयान के आधार पर रामनगर थाना कांड संख्या 614/2026 दर्ज किया गया। इसके बाद पुलिस अधीक्षक के निर्देश पर रामनगर एसडीपीओ के नेतृत्व में विशेष टीम गठित की गई। पुलिस ने छापेमारी कर 4 आरोपियों को पकड़ा विशेष टीम ने मामले में छापेमारी की।
पुलिस के अनुसार, कार्रवाई के दौरान जुड़ा पकड़ी गांव से चार आरोपियों को गिरफ्तार किया गया। गिरफ्तार आरोपियों की पहचान इस प्रकार है भगेलू चौधरी, पिता महेश चौधरी; कृष्णा चौधरी, पिता भगेलू चौधरी; चंदन कुमार, पिता भगेलू चौधरी; सुनीता देवी, पति भगेलू चौधरी समेत चारों जुड़ा पकड़ी, थाना रामनगर, पश्चिम चंपारण के रहने वाले बताए गए हैं।
पुलिस ने घटना में इस्तेमाल फरसा भी बरामद किया है। मामले में आगे की कानूनी कार्रवाई की जा रही है। छापेमारी टीम में रामनगर के अनुमंडल पुलिस पदाधिकारी, थानाध्यक्ष रामनगर, पुलिस अवर निरीक्षक श्वेता रानी, पुलिस अवर निरीक्षक इम्तियाजुल खां और पुलिस निरीक्षक जितेंद्र यादव समेत पुलिस पदाधिकारी शामिल रहे।
रामनगर चीनी मिल में मजदूरी कर परिवार चलाता था मैनेजर मैनेजर मांझी स्व.
सुरेश मांझी का बड़ा बेटा था। वह रामनगर चीनी मिल में मजदूरी करता था। मजदूरी से मिलने वाली कमाई से ही परिवार का खर्च चलता था। उसकी पत्नी रीता कुमारी और दो छोटी बेटियां हैं। परिवार के मुताबिक, मैनेजर की आर्थिक स्थिति बहुत मजबूत नहीं थी, लेकिन वह मजदूरी कर परिवार की जरूरतें पूरी करता था।
अब उसकी मौत के बाद परिवार के सामने रोजमर्रा के खर्च से लेकर बच्चों की पढ़ाई तक का संकट खड़ा हो गया है। घर में मौजूद सात माह की बच्ची को शायद अभी यह भी नहीं पता कि उसके पिता अब कभी लौटकर नहीं आएंगे। वहीं करीब तीन साल की बेटी बार-बार घर में पिता को खोज रही है। परिवार की महिलाएं उसे संभालने की कोशिश कर रही हैं।
'पति गुजर गए, दो बेटियों को अकेले कैसे पालूंगी' मैनेजर की पत्नी रीता कुमारी ने कहा कि पानी जैसे मामूली विवाद में उनके पति की जान चली गई। उन्होंने आरोपियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग की। रीता ने कहा, “जिस तरह मेरे पति की हत्या की गई है, आरोपियों को उसी के अनुसार सजा मिलनी चाहिए।
मैं चाहती हूं कि दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई हो।” उन्होंने कहा कि उनके पति के जाने के बाद दो छोटी बेटियों की जिम्मेदारी पूरी तरह उनके ऊपर आ गई है। रीता बीए तक पढ़ी हैं। उनका कहना है कि वह नौकरी करना चाहती हैं, लेकिन बच्चों की जिम्मेदारी और आर्थिक स्थिति उनके सामने बड़ी चुनौती है।
उन्होंने सरकार से सरकारी नौकरी या कोई स्थायी रोजगार देने की मांग की है, ताकि दोनों बेटियों का पालन-पोषण और पढ़ाई ठीक से कर सकें। रीता कहती हैं कि पति की मौत के बाद सबसे बड़ी चिंता यही है कि दोनों बच्चियों का भविष्य कैसे सुरक्षित होगा। कोरोना में पति की मौत के बाद मैनेजर ही था मां का सहारा मैनेजर की मां सुगंधी देवी भी बेटे की मौत से टूट गई हैं।
उन्होंने बताया कि कोरोना काल में उनके पति की मौत हो गई थी। इसके बाद मैनेजर ही परिवार का सहारा बना। बेटे ने मजदूरी करके घर की जिम्मेदारी उठाई। परिवार को उम्मीद थी कि धीरे-धीरे बच्चों और घर की स्थिति बेहतर होगी। लेकिन अब मैनेजर की हत्या के बाद वह सहारा भी छिन गया। सुगंधी देवी के सामने अब घर चलाने के साथ जवान बेटी की शादी की जिम्मेदारी भी है।
वह कहती हैं कि कमाने वाला बेटा ही चला गया तो परिवार कैसे चलेगा, यह समझ नहीं आ रहा। 'पानी का विवाद नहीं, मनबढ़ई के कारण बढ़ा मामला' घटना के बाद हम पार्टी के जिलाध्यक्ष चंद्रिका प्रसाद भी पीड़ित परिवार से मिलने पहुंचे। उन्होंने घटना को लेकर कहा कि इसे सिर्फ पानी का विवाद मानकर नहीं देखा जाना चाहिए।
चंद्रिका प्रसाद के मुताबिक, गांव में लोगों से जानकारी लेने पर पता चला कि पानी को लेकर पहले से विवाद चल रहा था। उनका आरोप है कि संबंधित व्यक्ति की मनबढ़ई के कारण विवाद बढ़ा और मामला हत्या तक पहुंच गया। उन्होंने कहा कि अगर खेत का पानी आधा अपने खेत में और आधा दूसरे खेत की तरफ छोड़ दिया जाता तो विवाद की स्थिति नहीं बनती।
उन्होंने यह भी कहा कि गांव के लोगों से बातचीत के दौरान उन्हें संबंधित व्यक्ति के व्यवहार को लेकर कई बातें पता चलीं। हालांकि ये बातें ग्रामीणों और पार्टी नेता के आरोप हैं। इनकी स्वतंत्र पुष्टि पुलिस जांच से ही होगी। चंद्रिका प्रसाद ने कहा कि उन्होंने घटना की जानकारी पार्टी के प्रदेश नेतृत्व को दी है।
उन्होंने हम पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष सह बिहार सरकार के मंत्री संतोष कुमार सुमन से भी पीड़ित परिवार से मिलने और मामले में उचित कार्रवाई की मांग की। घटनास्थल से अस्पताल तक...
करीब एक घंटे बाद पहुंची पुलिस प्रत्यक्षदर्शी प्रसाद मांझी के मुताबिक, हमला होने के बाद मौके पर अफरा-तफरी मच गई। कुछ लोग वहां से भाग गए। घायल मैनेजर और गुड्डू को अस्पताल ले जाने की कोशिश की गई। प्रसाद के अनुसार, पुलिस करीब एक घंटे बाद मौके पर पहुंची। इसके बाद पुलिस ने घटनास्थल की जांच शुरू की और आसपास के लोगों से पूछताछ की।
पुलिस की ओर से बताया गया कि सूचना मिलते ही थानाध्यक्ष 112 की टीम और पुलिस बल के साथ मौके पर पहुंचे थे। इसके बाद पुलिस टीम ने घटनास्थल की जांच की और मामले में आगे की कार्रवाई शुरू की। पुलिस ने बाद में विशेष टीम बनाकर आरोपियों की तलाश शुरू की। छापेमारी के दौरान चार आरोपियों को गिरफ्तार किया गया और घटना में इस्तेमाल फरसा बरामद किया गया।
मामूली विवाद ने पीछे छोड़ दिया दो बच्चियों का पूरा भविष्य जुड़ा पकड़ी गांव की इस घटना में सबसे बड़ा सवाल यही है कि खेत में पानी पटाने का विवाद इतना कैसे बढ़ गया कि एक परिवार का कमाऊ सदस्य ही दुनिया से चला गया। मैनेजर की मौत के बाद अब उसकी पत्नी के सामने दो छोटी बच्चियों को पालने की चुनौती है।
मां के सामने घर चलाने और बेटी की शादी की चिंता है। घायल भाई अस्पताल में इलाज करा रहा है। एक तरफ पुलिस चार आरोपियों को गिरफ्तार कर मामले की जांच आगे बढ़ा रही है, दूसरी तरफ परिवार न्याय के साथ सरकार से मदद की उम्मीद लगाए बैठा है। मैनेजर की पत्नी कहती हैं कि वह बीए तक पढ़ी हैं और काम करने को तैयार हैं।
उन्हें सिर्फ ऐसा सहारा चाहिए जिससे वह अपनी दोनों बेटियों को पढ़ा-लिखाकर उनका भविष्य बना सकें। जिस खेत के पानी को लेकर विवाद शुरू हुआ था, उसी विवाद ने एक परिवार से उसका कमाने वाला सदस्य छीन लिया। अब उस घर में पानी की बात नहीं, दो छोटी बेटियों के भविष्य की चिंता है। मां के पास बेटे की यादें हैं, पत्नी के पास पति के जाने का दुख और बेटियों के सामने पिता के बिना बड़ा होने की मजबूरी।
पुलिस के अनुसार, मामले में चार आरोपी गिरफ्तार किए जा चुके हैं और घटना में इस्तेमाल फरसा भी बरामद कर लिया गया है। आगे की कार्रवाई फर्दबयान, जांच और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर की जा रही है।
📡 स्रोत: NewsData.io
🎙️ जनता का संदेश का मत
पानी के मामूली मतभेद से परिवार के एक प्रमुख को खोना, समाज की गहरी जड़ में व्याप्त संघर्षों की चेतावनी है। संघर्षों का समाधान कानूनी मार्ग, मध्यस्थता और संवाद से ही संभव है। गुस्सा और हिंसा का कोई स्थान नहीं; संयम और सहानुभूति से ही समाज को आगे बढ़ाया जा सकता है। पीड़ित परिवार के प्रति गहरी संवेदना रखते हुए, हम सभी को मिलकर शांति और न्याय की दिशा में कदम बढ़ाने की प्रेरणा देते हैं।