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मलबे के नीचे 11 दिन तक सांसें साधे रहीं दो जिंदगियां, नेपाल के महाप्रलय में दिखा एक और कुदरत का चमत्कार

लेखक: JKS News Desk अंतिम अपडेट: 16 सितंबर 2026 👁️ 1 बार पढ़ा गया
प्रकाशक: जनता का संदेश
मलबे के नीचे 11 दिन तक सांसें साधे रहीं दो जिंदगियां, नेपाल के महाप्रलय में दिखा एक और कुदरत का चमत्कार

Nepal Flood Rescue: प्रकृति के कहर और बेबस इंसानों की जंग में कभी-कभी ऐसे पल भी आते हैं जो हर किसी की आंखें नम कर देते हैं.

नेपाल में आई भयानक बाढ़ के ग्यारहवें दिन कुछ ऐसा ही अनोखा मंजर देखने को मिला, जब चारों तरफ बिछी तबाही के बीच दो जिंदगियां मौत को चकमा देकर बाहर आ गईं.

शनिवार को जब उम्मीदें पूरी तरह दम तोड़ रही थीं, तब बचाव टीमों के कड़े संघर्ष ने साबित कर दिया कि हौसले के आगे सबसे बड़ी मुश्किल भी घुटने टेक देती है.

इस त्रासदी में अब तक बड़ी संख्या में लोग अपनी जान गंवा चुके हैं, लेकिन इन दो जिंदगियों के मिलने से राहत कर्मियों का जोश फिर से दोगुना हो गया है.

सुरंग में घुटती सांसों के बीच ऐसे मिला नया जीवन बचाव कार्य के दौरान पहला बड़ा चमत्कार अपर त्रिशूली जलविद्युत परियोजना के पास हुआ.

यहां के ऑडिट चार नंबर सुरंग में पानी और भारी गाद घुसने के बाद माना जा रहा था कि अंदर किसी का बचना मुमकिन नहीं होगा.

इसके बावजूद नेपाल सेना और दक्षिण कोरिया से आई आपदा प्रबंधन की टीम ने उम्मीद का दामन नहीं छोड़ा. राहत कर्मियों ने जान जोखिम में डालकर उस अंधेरी और दलदल से भरी सुरंग में कदम रखा.

कई घंटों की कड़ी मशक्कत के बाद टीम ने वहां फंसे एक चीनी नागरिक को जिंदा ढूंढ निकाला.

उसे सुरक्षित बाहर निकालना किसी बेहद जटिल मिशन से कम नहीं था, क्योंकि वहां कभी भी और मलबा गिर सकता था.

चार मंजिला ढहे मकान से बुजुर्ग महिला की सुरक्षित वापसी दूसरी जांबाजी की कहानी नुवाकोट के विदुर इलाके से सामने आई, जहां बेत्रावती में आई बाढ़ ने चार मंजिला पक्के मकान को ताश के पत्तों की तरह ढहा दिया था.

इस विशाल मलबे के नीचे चौंसठ साल की चंडिका श्रेष्ठ फंसी हुई थीं.

ग्यारह दिनों तक बिना भोजन और पानी के उस घुटन भरे मलबे में दबे रहना किसी खौफनाक सपने जैसा था.

सब इंस्पेक्टर सुमन कुमार के नेतृत्व में नौ सदस्यीय जांबाज टीम ने पत्थरों और कंक्रीट को बेहद सावधानी से काटना शुरू किया ताकि महिला को चोट न पहुंचे.

जब कई घंटों के प्रयास के बाद महिला को बाहर निकाला गया, तो वहां मौजूद हर शख्स की आंखें भर आईं और बचाव दल की मेहनत रंग लाई. नेपाल में 11 दिनों बाद भी मलवे के अंदर महिला को ज़िंदा देखकर सनसनी फ़ैल गई...

आज आर्मी की टीम के द्वारा एक सफल रैस्क्यू कर दिया गया... उनके घर के लोगों की खोजबीन जारी है... फ़िलहाल महिला को एक अस्पताल में इलाज के लिए भेज दिया गया है... आख़िर इतने दिनों की हिम्मत और कीचड़ जैसे मलवे...

pic.twitter.com/MFhU7YRyzh — Indu (@induXwin) September 5, 2026 पनबिजली संयंत्रों पर सबसे ज्यादा मार और लापता लोगों का दर्द नेपाल की नदियों पर बने बांध और ऊर्जा संयंत्र इस प्रलय की सीधी चपेट में आए हैं.

बाढ़ के पानी ने ग्यारह प्रमुख जलविद्युत परियोजनाओं को पूरी तरह से तहस नहस कर दिया है.

सबसे चिंताजनक बात यह है कि इन बिजली संयंत्रों में काम करने वाले कर्मचारियों और मजदूरों समेत नौ सौ से अधिक लोग अब भी लापता हैं. नदी के किनारे बसे कई कार्यालय और मशीनरी कक्ष पूरी तरह से गाद में दबे पड़े हैं.

लगातार खराब होते मौसम और पहाड़ों से गिरते पत्थरों के बावजूद राहत कर्मी इन लापता लोगों की तलाश में दिन रात जुटे हुए हैं.

त्रासदी का बढ़ता दायरा और दिल दहला देने वाले हालात नेपाल में अचानक आई इस जल प्रलय ने जानमाल का ऐसा नुकसान किया है जिसकी भरपाई शायद कभी न हो सके.

देश के अलग अलग इलाकों से और शव मिलने के बाद मरने वालों का आंकड़ा एक हजार तीन सौ से भी ऊपर पहुंच चुका है.

हजारों लोग अब भी लापता बताए जा रहे हैं, जिनमें सैकड़ों विदेशी नागरिक भी शामिल हैं. सेना और पुलिस ने अब तक तेरह हजार से अधिक लोगों को सुरक्षित बाहर निकाल लिया है.

अस्पतालों और राहत शिविरों में हालात बेहद भावुक हैं, जहां कई शवों की शिनाख्त करना भी मुश्किल हो रहा है क्योंकि पानी के बहाव और भारी पत्थरों के दबाव ने इंसानी शरीरों को बुरी तरह क्षत विक्षत कर दिया है.

पहाड़ों पर कुदरती हलचल ने मचाई भारी तबाही यह समूची तबाही नेपाल और तिब्बत सीमा के पास हुए एक बड़े हिमस्खलन के बाद शुरू हुई थी.

विशाल ग्लेशियर के टूटने से भोटेकोशी नदी का जलस्तर अचानक बेकाबू हो गया और इसने रास्ते में आने वाली हर चीज को लील लिया. कंक्रीट के बड़े पुल, पक्की सड़कें और सैकड़ों वाहन तिनके की तरह बह गए.

सीमा के उस पार तिब्बत में भी भारी नुकसान हुआ है और वहां भी कई लोग लापता हैं.

नेपाल में सबसे बुरा असर चितवन में देखा गया, जहां से सबसे ज्यादा शव निकाले गए हैं.

इसके अलावा रसुवा, धादिंग और गोरखा जैसे पहाड़ी जिलों में नदियां अब भी शांत होने का नाम नहीं ले रही हैं.

राहत दल हर उस कोने तक पहुंचने की कोशिश कर रहे हैं जहां जिंदगी की हल्की सी भी उम्मीद बाकी है.

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📡 स्रोत: NewsData.io

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