मंदसौर में रावण दहन नहीं, होती है पूजा-अर्चना; दामाद के रूप में मिलता है सम्मान
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खानपुरा में दशहरे पर निभाई जाती है अनोखी परंपरा। मान्यता है कि मंदसौर मंदोदरी का मायका है, इसलिए रावण को दामाद माना जाता है।
35 फीट ऊंची प्रतिमा के पैर में लच्छा बांधकर सुख-समृद्धि की कामना करते हैं श्रद्धालु।
मंदसौर, अक्टूबर 20: जिले के खानपुरा में दशहरे पर रावण दहन नहीं, बल्कि उनकी पूजा की अनोखी परंपरा निभाई जाती है। पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, मंदसौर को मंदोदरी का मायका माना जाता है, इसी रिश्ते से रावण को यहां दामाद का सम्मान दिया जाता है। यहां रावण की करीब 35 फीट ऊंची प्रतिमा स्थापित है, जिसके नौ सिरों के ऊपर गधे का सिर भी बना है। दशहरे पर समाजजन ढोल-धमाकों के साथ प्रतिमा स्थल पहुंचकर पूजा-अर्चना करते हैं और रावण के पैर में लच्छा बांधकर सुख-समृद्धि की कामना करते हैं। मान्यता है कि यहां रावण का दहन नहीं होता, बल्कि आतिशबाजी के जरिए प्रतीकात्मक वध किया जाता है।
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बाइट - अशोक बघेरवाल , नामदेव समाज अध्यक्ष
बाइट - राजेश मेडतवाल, स्थानीय निवासी