मप्र की समृद्ध विरासत और विकास के संकल्प के साथ आगे बढ़ रही प्रदेश सरकार : खाद्य मंत्री श्री राजपूत
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मंत्री श्री राजपूत ने कहा कि मध्यप्रदेश केवल भारत के नक्शे पर बना एक राज्य नहीं, बल्कि देश की आत्मा, संस्कृति और सभ्यता का जीवंत स्वरूप है। यह राजा विक्रमादित्य की न्यायप्रियता, सम्राट अशोक के इतिहास, रानी दुर्गावती और रानी अवंतीबाई के शौर्य एवं बलिदान की भूमि है। भगवान महाकाल की नगरी उज्जैन, भगवान श्रीराम के वनगमन पथ, भगवान श्रीकृष्ण की शिक्षा स्थली सांदीपनि आश्रम और भगवान शिव के ज्योतिर्लिंगों से यह धरती आध्यात्मिक गौरव रखती है।
उन्होंने कहा कि मां नर्मदा की कल-कल बहती धारा, विंध्य और सतपुड़ा की पर्वत श्रृंखलाएं, कान्हा और बांधवगढ़ के वन, खजुराहो की अद्भुत कला तथा सांची का विश्वविख्यात इतिहास मध्यप्रदेश की विशिष्ट पहचान हैं। हमारा प्रदेश विविधताओं में एकता, परंपरा में आधुनिकता और संस्कृति में समरसता का अद्भुत उदाहरण है।
मंत्री राजपूत ने कहा कि मध्यप्रदेश की स्थापना 1 नवंबर 1956 को हुई थी और आज हम अपने प्रदेश के 71वें स्थापना दिवस का उत्सव मना रहे हैं। उन्होंने सरदार वल्लभ भाई पटेल की जन्म जयंती की सभी को बधाई देते हुए कहा कि लौह पुरुष सरदार पटेल ने देश का एकीकरण किया। उन्होंने कहा कि मध्यप्रदेश को भारत का हृदय प्रदेश और सागर को मध्यप्रदेश के हृदय कहा जाता है, यही हमारा गौरव है। आज किसान, युवा, महिलाओं की मेहनत और मुख्यमंत्री डॉ यादव के नेतृत्व में मध्यप्रदेश आत्मनिर्भर बनने की ओर अग्रसर है और विकासशील राज्य से विकसित राज्य की ओर बढ़ रहा है। आज मप्र विकास के नए आयाम स्थापित कर रहा है।
कृषि, उद्योग, शिक्षा और स्वास्थय के क्षेत्र में हम तेजी से आगे बढ़ रहे हैं। आज मध्यप्रदेश में निवेश, उद्योग, स्टार्टअप और रोजगार के नए अवसर पैदा हो रहे हैं। उन्होंने कहा कि आइए, हम सब मिलकर मध्यप्रदेश को एक आदर्श राज्य बनाएं। आइए, हम सब मिलकर मध्यप्रदेश के विकास में अपना योगदान दें।