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मशरूम उत्पादन को बढ़ावा देने के लिए केंद्र और प्रदेश सरकार लगातार प्रयासरत

लेखक: Maroof Ahmed Khan अंतिम अपडेट: 26 सितंबर 2026 👁️ 1 बार पढ़ा गया
प्रकाशक: जनता का संदेश
मशरूम उत्पादन को बढ़ावा देने के लिए केंद्र और प्रदेश सरकार लगातार प्रयासरत

सितंबर 17, कांगड़ा (हिमाचल प्रदेश): पहाड़ी राज्य हिमाचल प्रदेश में मशरूम उत्पादन को बढ़ावा देने के लिए केंद्र और प्रदेश सरकार लगातार प्रयासरत हैं। समेकित बागवानी विकास मिशन यानी एमआईडीएच के तहत किसानों और युवाओं को मशरूम उत्पादन इकाइयां स्थापित करने के लिए आर्थिक सहायता दी जा रही है।

पहले जहां इकाई स्थापित करने के लिए अधिकतम 8 लाख रुपये तक की सब्सिडी मिलती थी, वहीं अब इसे बढ़ाकर 15 लाख रुपये कर दिया गया है। इससे कम पूंजी में वैज्ञानिक और नियंत्रित वातावरण में मशरूम उत्पादन शुरू करने के इच्छुक किसानों और युवाओं को बड़ी राहत मिली है। प्रदेश के सबसे बड़े जिला कांगड़ा में योजना के तहत 42 मशरूम उत्पादन इकाइयां बनकर तैयार हो चुकी हैं।

खास बात यह है कि कई युवाओं ने नौकरी छोड़कर मशरूम उत्पादन को स्वरोजगार के रूप में अपनाया है। एक-एक इकाई से 25 से 50 लोगों तक के लिए रोजगार के अवसर पैदा हो रहे हैं। मशरूम की खेती के लिए अधिक भूमि की जरूरत नहीं होती, जिससे छोटे और सीमांत किसान भी इसे अतिरिक्त आय के साधन के रूप में अपना सकते हैं।

वहीं, महिलाओं और ग्रामीण युवाओं के लिए भी यह स्वरोजगार का नया अवसर बन रहा है।

💡 पृष्ठभूमि (Background)

मशरूम उत्पादन को बढ़ावा देने के लिए हिमाचल प्रदेश और केंद्र सरकार मिलकर कदम उठा रहे हैं। समेकित बागवानी विकास मिशन (MIDH) के अंतर्गत किसानों और युवाओं को 15 लाख रुपये तक की सब्सिडी देकर मशरूम इकाइयाँ स्थापित करने हेतु प्रोत्साहित किया जा रहा है। यह पहल कृषि क्षेत्र में वैकल्पिक आय स्रोत के रूप में मशरूम को प्रमुखता देती है, जिससे किसानों की आय में सुधार और ग्रामीण रोजगार के अवसर बढ़ेंगे। साथ ही, यह खाद्य सुरक्षा और पोषण में योगदान देगा, क्योंकि मशरूम प्रोटीन और विटामिन का अच्छा स्रोत है।

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Maroof Ahmed Khan

Maroof Ahmed Khan जनता का संदेश के संस्थापक एवं प्रधान संपादक हैं। वे जनसरोकार, निष्पक्ष रिपोर्टिंग और जनता की आवाज़ को प्रमुखता देने के लिए प्रतिबद्ध हैं।