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मशरूम उत्पादन से स्वरोजगार की राह, 35 किसानों ने सीखी वैज्ञानिक तकनीक

लेखक: JKS News Desk अंतिम अपडेट: 22 सितंबर 2026
प्रकाशक: जनता का संदेश
मशरूम उत्पादन से स्वरोजगार की राह, 35 किसानों ने सीखी वैज्ञानिक तकनीक

भास्कर न्यूज | बांका कृषि विज्ञान केंद्र बांका में मशरूम उत्पादन को बढ़ावा देने के लिए चल रहे प्रशिक्षण कार्यक्रम के चौथे दिन सोमवार को 35 किसानों को मशरूम की वैज्ञानिक खेती की जानकारी दी गई। इनमें 20 महिलाएं और 15 पुरुष शामिल हैं। 18 से 22 सितंबर तक चलने वाले प्रशिक्षण में किसानों को सैद्धांतिक जानकारी के साथ मशरूम उत्पादन की पूरी प्रक्रिया का प्रायोगिक प्रशिक्षण भी दिया जा रहा है। कृषि विज्ञान केंद्र के कृषि वैज्ञानिक डॉ.

अजय कुमार और प्रभारी डॉ.

बृजेन्दु कुमार ने किसानों को मशरूम उत्पादन की आधुनिक तकनीक से अवगत कराया। प्रशिक्षण में ऑइस्टर, बटन, स्ट्रॉ और दूधिया मशरूम की खेती की जानकारी दी जा रही है। किसानों को मौसम और बाजार की मांग के अनुसार मशरूम की प्रजाति का चयन, उत्पादन लागत, देखभाल और बेहतर उत्पादन के तरीके बताए गए। प्रशिक्षण के दौरान मशरूम का बीज तैयार करने, बैगिंग, उत्पादन के दौरान रखरखाव, हार्वेस्टिंग और पैकेजिंग की प्रक्रिया को किसानों से प्रायोगिक तौर पर कराया गया।

वैज्ञानिकों ने बताया कि कम जगह और कम लागत में मशरूम की खेती शुरू कर किसान अतिरिक्त आमदनी प्राप्त कर सकते हैं। इससे छोटे व सीमांत किसानों के साथ महिलाओं के लिए भी स्वरोजगार का अवसर तैयार हो सकता है। प्रशिक्षण पूरा करने वाले किसानों को कृषि विज्ञान केंद्र की ओर से प्रमाणपत्र दिया जाएगा।

प्रमाणपत्र के आधार पर किसान मशरूम उत्पादन के लिए सरकार की ओर से मिलने वाली सब्सिडी का लाभ लेने के लिए आवेदन कर सकेंगे। प्रशिक्षण में जिले की प्रगतिशील मशरूम उत्पादक विनिता कुमारी और रिंकू देवी ने भी अपने अनुभव साझा किए। उन्होंने उत्पादन के दौरान आने वाली व्यावहारिक समस्याओं और उनके समाधान की जानकारी किसानों को दी।

कृषि वैज्ञानिक डॉ.

अजय कुमार ने कहा कि प्रशिक्षण का मुख्य उद्देश्य किसानों को आधुनिक मशरूम उत्पादन तकनीक से जोड़कर आत्मनिर्भर बनाना है।

📡 स्रोत: NewsData.io

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