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मेडिकल डिवाइस से गंभीर नुकसान के मामले 3 गुना बढ़े:2020 में 808 थे, 2025 में 2 हजार से ज्यादा; RTI से पहली बार जानकारी मिली

लेखक: JKS News Desk अंतिम अपडेट: 6 नवंबर 2026
प्रकाशक: जनता का संदेश
मेडिकल डिवाइस से गंभीर नुकसान के मामले 3 गुना बढ़े:2020 में 808 थे, 2025 में 2 हजार से ज्यादा; RTI से पहली बार जानकारी मिली

देश में मेडिकल डिवाइस के इस्तेमाल से मरीजों को होने वाले गंभीर नुकसान के मामलों में पिछले छह साल में करीब तीन गुना बढ़ोतरी हुई है। इंडियन फार्माकोपिया कमीशन के आंकड़ों के मुताबिक, 2020 में ऐसे 808 मामले दर्ज हुए थे, जो 2025 में बढ़कर 2,176 हो गए। 2020 से अब तक कुल 9,373 गंभीर मामले सामने आए हैं।

इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक, ये आंकड़े पहली बार सूचना के अधिकार यानी RTI के जरिए सामने आए हैं। सेंट्रल इन्फॉर्मेशन कमीशन के आदेश के बाद IPC ने यह जानकारी उपलब्ध कराई। गंभीर मामलों में मरीज की जान को खतरा, लंबे समय तक अस्पताल में भर्ती रहने या दूसरी गंभीर स्वास्थ्य समस्याएं होने जैसी स्थितियां शामिल हैं।

पहले गंभीर मामलों के आंकड़े अलग से सार्वजनिक नहीं किए जाते थे IPC देशभर के 775 निगरानी केंद्रों से मेडिकल डिवाइस के इस्तेमाल के बाद होने वाली परेशानियों की जानकारी जुटाता है। इन्हें मेडिकल डिवाइस एडवर्स इवेंट यानी MDAE कहा जाता है। IPC अपनी सालाना रिपोर्ट में ऐसी सभी घटनाओं की कुल संख्या बताता था, लेकिन सीरियस एडवर्स इवेंट यानी SAE के आंकड़े अलग से जारी नहीं करता था।

इंडियन एक्सप्रेस के मुताबिक, केंद्रीय सूचना आयोग के 10 सितंबर के आदेश के बाद उसे 27 अक्टूबर को ये आंकड़े मिले। सूचना आयुक्त जया वर्मा सिन्हा ने 11 पन्नों का आदेश जारी कर IPC को गंभीर घटनाओं की जानकारी देने को कहा था। हालांकि, मेडिकल डिवाइस की श्रेणी और उसे बनाने वाली कंपनी का नाम सार्वजनिक करने की अनुमति नहीं दी गई।

IPC ने दलील दी थी कि कंपनी का नाम और डिवाइस की जानकारी सार्वजनिक करने से कारोबारी गोपनीयता प्रभावित हो सकती है। यह भी साफ नहीं है कि मरीज को हुई परेशानी डिवाइस की खराबी से हुई या इलाज के दौरान किसी गलती के कारण। हर साल हजारों शिकायतें, लेकिन बहुत कम मामले CDSCO भेजे गए IPC की सालाना रिपोर्ट के मुताबिक, मेडिकल डिवाइस से जुड़ी घटनाओं की जानकारी मिलने के बाद बहुत कम मामलों को आगे की कार्रवाई के लिए सेंट्रल ड्रग्स स्टैंडर्ड कंट्रोल ऑर्गनाइजेशन (CDSCO) के पास भेजा गया।

तीन वित्त वर्षों के आंकड़ों में शिकायतों और जांच के लिए भेजे गए मामलों के बीच बड़ा अंतर दिखाई देता है। संदिग्ध डिवाइसों में रोजमर्रा के मेडिकल सामान भी शामिल IPC की रिपोर्ट में दर्ज घटनाओं में से जिन मामलों को आगे की जांच के लिए भ

📡 स्रोत: Dainik Bhaskar

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