व्यापार

मेक इन इंडिया के 12 साल पूरे, दुमका की रिंकी मरांडी ने बांस की कारीगरी को दिलाई राष्ट्रीय बाजार

लेखक: Maroof Ahmed Khan अंतिम अपडेट: 2 अक्टूबर 2026
प्रकाशक: जनता का संदेश
मेक इन इंडिया के 12 साल पूरे, दुमका की रिंकी मरांडी ने बांस की कारीगरी को दिलाई राष्ट्रीय बाजार

मेक इन इंडिया के 12 साल पूरे, दुमका के पारंपरिक बांस शिल्प को मिली नई पहचान, रिंकी मरांडी आधुनिक उत्पाद बनाकर हुनर और रोजगार को दे रही बढ़ावा।

Short Headline: मेक इन इंडिया के 12 साल पूरे, दुमका की रिंकी मरांडी ने बांस की कारीगरी को दिलाई राष्ट्रीय बाजार

मेक इन इंडिया, दुमका, गौतम कुमार

मेक इन इंडिया के 12 साल पूरे दुमका के बैंबू आर्ट को मिल रही नई पहचान

मेक इन दुमका से मेक इन इंडिया का सफर तय रिंकी मरांडी के हुनर को मिला सम्मान

एंकर मेक इन इंडिया अभियान के 12 साल पूरे हो चुके हैं। इस दौरान देशभर में स्थानीय उत्पादों और पारंपरिक हुनर को बढ़ावा देने की कई तस्वीरें सामने आई हैं। झारखंड की उप राजधानी दुमका में भी बांस शिल्प ने स्थानीय स्तर से राष्ट्रीय बाजार तक का सफर तय करने की दिशा में कदम बढ़ाया है। यहां रिंकी मरांडी जैसी बैंबू आर्टिस्ट बांस से आकर्षक और उपयोगी उत्पाद तैयार कर रही हैं और दूसरे लोगों को भी इस हुनर का प्रशिक्षण दे रही हैं।

होल्ड- बांस से उत्पाद तैयार करने के विजुअल

वीओ 01. कभी घर और गांव की जरूरतों तक सीमित रहने वाला बांस अब बदलते बाजार और आधुनिक डिजाइन के साथ नया रूप ले रहा है। दुमका के बांस शिल्प को नई पहचान दिलाने में स्थानीय कारीगरों की अहम भूमिका है। इन्हीं में शामिल हैं बैंबू आर्टिस्ट रिंकी मरांडी। रिंकी के लिए बांस महज एक कच्चा माल नहीं, बल्कि रोजगार, रचनात्मकता और आत्मनिर्भरता का माध्यम है। वह खुद उत्पाद तैयार करने के साथ दूसरे लोगों को भी बांस शिल्प का प्रशिक्षण दे रही हैं।

बाइट- रिंकी मरांडी, बैंबू आर्टिस्ट

वीओ 02. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मेक इन इंडिया अभियान का उद्देश्य देश में स्थानीय उत्पादन और उद्यमिता को बढ़ावा देना है। दुमका जन शिक्षण संस्थान के निदेशक मोती उपाध्याय के मुताबिक, यहां बांस शिल्प को विकसित करने के लिए लोगों को प्रशिक्षण दिया जा रहा है। संस्थान के माध्यम से सात हजार से अधिक लोगों को प्रशिक्षण दिए जाने की जानकारी दी गई है। प्रशिक्षण के बाद कारीगर पारंपरिक उत्पादों के साथ आधुनिक और फैंसी उत्पाद भी तैयार कर रहे हैं, जिससे उनके उत्पादों को बाजार में नई संभावनाएं मिल रही हैं।

बाइट- मोती उपाध्याय, निदेशक, दुमका जन शिक्षण संस्थान

वीओ 03. दुमका प्रशासन भी स्थानीय उत्पादों को बाजार उपलब्ध कराने और पारंपरिक हुनर को आगे बढ़ाने पर जोर दे रहा है। उपायुक्त अभिजीत सिन्हा के मुताबिक, दुमका का बैंबू आर्ट मेक इन दुमका से मेक इन इंडिया की दिशा में आगे बढ़ रहा है। बासुकीनाथ सावन मेला और हिजला मेला जैसे बड़े आयोजनों में स्थानीय उत्पादों को बाजार उपलब्ध कराने का प्रयास किया जा रहा है, ताकि कारीगरों को अपने उत्पाद बेचने और नए ग्राहकों से जुड़ने का अवसर मिल सके।

बाइट- अभिजीत सिन्हा, उपायुक्त, दुमका

अंतिम वीओ बांस से तैयार किसी उत्पाद के पीछे कारीगर की मेहनत और हुनर के कई चरण होते हैं। बांस के चयन और कटाई से लेकर उसकी प्रोसेसिंग, बुनाई और फिनिशिंग तक हर स्तर पर कारीगर की कुशलता दिखाई देती है। जरूरत है कि इन कारीगरों को बेहतर डिजाइन, आधुनिक बाजार और प्रभावी मार्केटिंग से जोड़ा जाए, ताकि दुमका के पारंपरिक बांस शिल्प को व्यापक पहचान मिले और मेक इन दुमका से मेक इन इंडिया का यह सफर और मजबूत हो।

दुमका से गौतम कुमार की रिपोर्ट।

💡 पृष्ठभूमि (Background)

मेक इन इंडिया के बारहवें वर्षगांठ पर दुमका की रिंकी मरांडी ने पारंपरिक बांस शिल्प को राष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाई। यह विषय ग्रामीण शिल्पकारों के कौशल को आधुनिक बाज़ार से जोड़ने का प्रयास है। खबर महत्वपूर्ण है क्योंकि यह दिखाती है कि कैसे सरकार की पहल और स्थानीय हस्तशिल्प का संगम ग्रामीण अर्थव्यवस्था को सशक्त बना सकता है। इससे आम जनता को किफ़ायती, पर्यावरण‑अनुकूल उत्पाद मिलेंगे और दुमका जैसी पहाड़ी क्षेत्रों में रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे, जिससे क्षेत्रीय विकास को बढ़ावा मिलेगा।

M
Maroof Ahmed Khan

Maroof Ahmed Khan जनता का संदेश के संस्थापक एवं प्रधान संपादक हैं। वे जनसरोकार, निष्पक्ष रिपोर्टिंग और जनता की आवाज़ को प्रमुखता देने के लिए प्रतिबद्ध हैं।