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‘मेरी बाली ले लो, मंदिर सरयू में मत समाओ':बाराबंकी में 88 साल के मुस्तफा ने मांगी दुआ, 1100 साल पुराने मंदिर पर कटान का संकट

लेखक: JKS News Desk अंतिम अपडेट: 3 अक्टूबर 2026
प्रकाशक: जनता का संदेश
‘मेरी बाली ले लो, मंदिर सरयू में मत समाओ':बाराबंकी में 88 साल के मुस्तफा ने मांगी दुआ, 1100 साल पुराने मंदिर पर कटान का संकट

बाराबंकी के हेतमापुर में सरयू नदी की कटान के बीच हिंदू-मुस्लिम एकता और भाईचारे की तस्वीर सामने आई है। 88 साल के मुस्तफा बाबा नारायण दास के करीब 1100 साल पुराने मंदिर को सरयू में समाने से बचाने के लिए दुआ कर रहे हैं। उनकी भावुक अपील है- “मेरी बाली ले लो, लेकिन बाबा नारायण दास के मंदिर को सरयू में मत समाओ।” हेतमापुर में पिछले दिनों सरयू नदी का जलस्तर बढ़ने से ग्रामीणों की चिंता बढ़ गई थी।

अब नदी का पानी तेजी से घट रहा है, लेकिन जलस्तर कम होने के साथ ही कई जगह कटान तेज हो गई है। सरयू की तेज धारा लगातार किनारे की जमीन काट रही है। इसका असर बाबा नारायण दास मंदिर के आसपास भी दिखाई दे रहा है। मंदिर के अस्तित्व पर संकट को देखते हुए स्थानीय लोगों की नजरें लगातार नदी के रुख पर बनी हुई हैं।

मंदिर के आसपास कटान की स्थिति को लेकर ग्रामीण चिंतित हैं। ‘मंदिर आस्था और भाईचारे की निशानी’ मुस्तफा का कहना है कि बाबा नारायण दास मंदिर उनके लिए सिर्फ धार्मिक स्थल नहीं है, बल्कि इलाके की आस्था और वर्षों पुराने भाईचारे की निशानी है। वह चाहते हैं कि किसी भी कीमत पर मंदिर सरयू नदी में न समाए।

इसी उम्मीद के साथ वह ऊपर वाले से मंदिर की सलामती की दुआ कर रहे हैं। उनकी मंदिर को बचाने की भावुक अपील स्थानीय लोगों के बीच चर्चा में है। लोग इसे आपसी भाईचारे और इंसानियत की मिसाल के तौर पर देख रहे हैं। मंदिर बचाने में जुटा प्रशासन मंदिर को कटान से बचाने के लिए प्रशासन और बाढ़ खंड की टीमें मौके पर जुटी हुई हैं।

कटान वाले स्थानों पर निगरानी बढ़ाई गई है और बचाव कार्य किया जा रहा है। अधिकारियों की टीम नदी के बदलते रुख और कटान की स्थिति पर लगातार नजर रख रही है। बाढ़ खंड के अधिशासी अभियंता शशिकांत सिंह ने बताया कि बाबा नारायण दास मंदिर फिलहाल सुरक्षित है। उन्होंने कहा कि जलस्तर घटने के बाद कई स्थानों पर कटान तेज हो जाता है।

इसे देखते हुए विभाग की टीम लगातार मौके पर निगरानी कर रही है। फिलहाल प्रशासन और बाढ़ खंड की कोशिशों से मंदिर सुरक्षित है। वहीं, चच्चा मुस्तफा की मंदिर को बचाने की भावुक अपील हेतमापुर में हिंदू-मुस्लिम एकता और भाईचारे की मिसाल बनी हुई है।

📡 स्रोत: NewsData.io

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