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मोबाइल नंबर बदलकर खातों से निकाली FD की रकम:₹1.14 करोड़ के फ्रॉड में नाबालिग मास्टरमाइंड निकला; बैंक आने-जाने वालों पर नजर रखता था

लेखक: JKS News Desk अंतिम अपडेट: 28 अक्टूबर 2026
प्रकाशक: जनता का संदेश
मोबाइल नंबर बदलकर खातों से निकाली FD की रकम:₹1.14 करोड़ के फ्रॉड में नाबालिग मास्टरमाइंड निकला; बैंक आने-जाने वालों पर नजर रखता था

बैतूल के मोरखा स्थित बैंक ऑफ महाराष्ट्र में नेट बैंकिंग के जरिए लेन-देन और FD तोड़कर 1.14 करोड़ रुपए की धोखाधड़ी के मामले में पुलिस की जांच एक नाबालिग की भूमिका पर केंद्रित है। एसपी वीरेंद्र जैन के मुताबिक, गांव में एमपी ऑनलाइन और कियोस्क सेंटर चलाने वाला नाबालिग खाता धारकों को पहचानता था।

उसने बैंक के असिस्टेंट मैनेजर के साथ मिलकर इस पहचान का फायदा उठाया और खाता धारकों के नेट बैंकिंग से जुड़े मोबाइल नंबर बदलकर उनके खातों से रकम दूसरे खातों में ट्रांसफर की। गांव में पहचान बनी खातों तक पहुंचने का जरिया एसपी के अनुसार, गांव के कई खाताधारक नेट बैंकिंग का इस्तेमाल करते थे।

वे पासबुक अपडेट कराने के लिए बैंक आते थे। नाबालिग उन्हें पहचानता था और उन पर नजर रखता था। पुलिस के मुताबिक, इसी जानकारी का इस्तेमाल ऐसे खाता धारकों को निशाना बनाने के लिए किया गया, जिनके खातों से मोबाइल नंबर बदलने के बाद रकम ट्रांसफर की जा सकती थी। जांच के मुताबिक, इस प्रक्रिया में बैंक के असिस्टेंट मैनेजर लोकेश गुखे की भूमिका भी अहम थी।

उसके पास बैंक की आईडी थी। वह खाता धारकों के नेट बैंकिंग से जुड़े मोबाइल नंबर बदल सकता था। पुलिस अब यह जांच कर रही है कि इस प्रक्रिया में किस स्तर पर सत्यापन होना था और उसका पालन हुआ या नहीं। गौरव समेत नाबालिग के परिवार तक पहुंची रकम एसपी वीरेंद्र जैन के मुताबिक, करीब 1 करोड़ 14 लाख रुपए गौरव के खाते में ट्रांसफर किए गए।

असिस्टेंट मैनेजर लोकेश गोहे, उसकी मां और नाबालिग के तीन रिश्तेदार के खातों तक भी रकम पहुंची। पुलिस ने नाबालिग के रिश्तेदारों के साथ असिस्टेंट मैनेजर की मां को भी गिरफ्तार किया है। जांच में अब इन खातों में पहुंची रकम के स्रोत, आगे हुए लेन-देन और उसके इस्तेमाल का पता लगाया जा रहा है।

पुलिस यह भी जांच रही है कि प्रत्येक व्यक्ति की इस पूरे मामले में क्या भूमिका रही। जनवरी से चल रहा था घोटाला एसपी के मुताबिक, यह घोटाला जनवरी से चल रहा था। तीन-चार महीनों में बड़े पैमाने पर हुआ। पुलिस ने पहले असिस्टेंट मैनेजर, नाबालिग और गौरव को गिरफ्तार किया था। इसके बाद चार और गिरफ्तारियां की गईं।

एसपी ने मामले में आगे भी गिरफ्तारियां होने की संभावना जताई है। महंगी कार और मोबाइल भी जांच के दायरे में जांच के दौरान नाबालिग की जीवनशैली और संपत्ति की खरीद भी पड़ताल का हिस्सा बनी है। उसने करीब 10 लाख रुपए की मारुति कार खरीदी थी। उसके और उसके साथियों के महंगे मोबाइल इस्तेमाल करने की बात भी सामने आई है।

पुलिस यह पता लगा रही है कि कार और अन्य सामान की खरीद में इस्तेमाल की गई रकम का बैंक घोटाले से कोई संबंध है या नहीं। पुलिस ने पहले की कार्रवाई में छह मोबाइल फोन, 8.28 लाख रुपए का सोना, 1.40 लाख रुपए की चांदी सहित कुल 22.33 लाख रुपए की संपत्ति जब्त करने की जानकारी दी थी। जब्त मोबाइल फोन, इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों और सिम कार्ड की जांच के जरिए पुलिस ऑनलाइन लेनदेन और आरोपियों के बीच संपर्कों से जुड़े साक्ष्य जुटा रही है।

बैंक की SOP में चूक की भी जांच एसपी ने बताया कि पुलिस यह भी जांच कर रही है कि बैंक की मानक संचालन प्रक्रिया (SOP) का पालन हुआ या नहीं। एक ही कर्मचारी खाताधारकों के नेट बैंकिंग मोबाइल नंबर कैसे बदल पा रहा था। इस संबंध में वरिष्ठ अधिकारियों को अवगत कराया गया है। पुलिस बैंकों की प्रक्रियाओं से जुड़ी जानकारी जुटा रही है और खाताधारकों की सुरक्षा के लिए एडवाइजरी जारी करने की बात भी कही गई है।

रिटायर टीचर ने की थी पहली शिकायत 21 अक्टूबर को रिटायर्ड शिक्षक गेंदाराम सोनी ने शुरुआती शिकायत दर्ज कराई थी। उन्होंने अपने खाते से 7 लाख रुपए ट्रांसफर होने की जानकारी दी थी। इसके बाद दूसरे खाताधारकों की शिकायतों और बैंक रिकॉर्ड की जांच की गई। इधर, अब तक पुलिस ने छह अलग-अलग अपराध दर्ज किए हैं।

शुरुआत में बैंक के असिस्टेंट मैनेजर लोकेश गोहे, कियोस्क सेंटर चलाने वाले नाबालिग और टैक्सी ड्राइवर गौरव सूर्यवंशी को गिरफ्तार किया था। जांच में गौरव के खाते में कथित घोटाले की रकम पहुंचने की जानकारी सामने आई। पुलिस के मुताबिक, नाबालिग के रिश्तेदार मिथिलेश सोनी के नाम पर कियोस्क सेंटर की आईडी थी, जबकि सेंटर नाबालिग चलाता था।

इसके बाद पुलिस ने नाबालिग के अन्य रिश्तेदार शैलेंद्र सोनी और मिथलेश सोनी और मयंक सोनी को गिरफ्तार किया। बैंक के असिस्टेंट मैनेजर लोकेश गोहे की मां शीला गोहे को भी गिरफ्तार किया गया। जिंदा खाताधारकों को मृत बताने का भी आरोप पुलिस इस पहलू की भी जांच कर रही है कि कुछ खाता धारकों को रिकॉर्ड में मृत दिखाकर उनकी FD की रकम निकालने की कोशिश की गई या नहीं।

जांच में छह जीवित खाताधारकों से जुड़े मृत्यु प्रमाण पत्रों के इस्तेमाल का संदेह सामने आने की जानकारी दी गई है। इसकी पुष्टि और दस्तावेजों की भूमिका स्पष्ट होना अभी बाकी है।

📡 स्रोत: NewsData.io

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