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MP में प्रोबेशन का 70-80-90% वेतन नियम खत्म:हाईकोर्ट बोला- पूरा काम तो पूरी सैलरी; 2019 के बाद नियुक्त कर्मचारियों को मिलेगा बकाया एरियर

लेखक: JKS News Desk अंतिम अपडेट: 15 सितंबर 2026 👁️ 1 बार पढ़ा गया
प्रकाशक: जनता का संदेश
MP में प्रोबेशन का 70-80-90% वेतन नियम खत्म:हाईकोर्ट बोला- पूरा काम तो पूरी सैलरी; 2019 के बाद नियुक्त कर्मचारियों को मिलेगा बकाया एरियर

जबलपुर हाईकोर्ट ने प्रोबेशन पीरियड में कर्मचारियों को 70%, 80% और 90% न्यूनतम वेतनमान देने की व्यवस्था निरस्त कर दी है। इससे मध्य प्रदेश के हजारों सरकारी कर्मचारियों को राहत मिली है। कोर्ट ने कहा- जब कर्मचारी से पद के अनुरूप पूरा काम लिया जा रहा है, तो केवल प्रोबेशन पर होने के आधार पर उसे कम वेतन नहीं दिया जा सकता।

कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति विवेक रूसिया और न्यायमूर्ति प्रदीप मित्तल की डिवीजन बेंच ने 8 सितंबर 2026 को समान मुद्दे से जुड़ी कई रिट याचिकाओं पर साझा आदेश पारित किया। कोर्ट ने निर्देश दिया कि 25 नवंबर 2019 के बाद नियुक्त संबंधित शासकीय कर्मचारियों को प्रोबेशन अवधि में किए गए कार्य का पूरा वेतन दिया जाए।

पहले तीन साल 70%, 80% और 90% वेतन मिलता था राज्य सरकार की व्यवस्था के तहत प्रोबेशन के पहले साल में न्यूनतम वेतनमान का 70%, दूसरे साल में 80% और तीसरे साल में 90% भुगतान किया जाता था। हाईकोर्ट ने इस व्यवस्था से जुड़े नियमों और सर्कुलर को निरस्त कर दिया है। कोर्ट ने माना कि कर्मचारी निर्धारित भर्ती प्रक्रिया से चयनित होकर पद पर नियुक्त होता है।

प्रोबेशन के दौरान भी उससे नियमित कर्मचारी की तरह काम लिया जाता है। ऐसे में पूरा काम लेने के बावजूद केवल प्रोबेशन के आधार पर कम वेतन देना उचित नहीं है। 21 कर्मचारियों ने दी थी चुनौती स्वास्थ्य विभाग में पदस्थ 21 कर्मचारियों ने राज्य सरकार की इस व्यवस्था को हाईकोर्ट में चुनौती दी थी।

मामला हेमंत हेलोंडे अन्य बनाम मध्य प्रदेश शासन से संबंधित है। याचिकाकर्ताओं की ओर से अधिवक्ता अंशुल तिवारी और अधिवक्ता अभिषेक पांडेय ने पैरवी की। कोर्ट ने कहा- कम वेतन देने का ठोस आधार नहीं हाईकोर्ट ने कहा कि कर्मचारी जिस पद पर नियुक्त हुआ है, उसके अनुरूप उससे काम लिया जा रहा है। इसलिए उसे निर्धारित वेतनमान से कम भुगतान करने का कोई उचित आधार नहीं है।

कोर्ट ने इस व्यवस्था को कक्षा-III और कक्षा-IV कर्मचारियों के प्रति भेदभावपूर्ण भी माना। फैसले के मुताबिक, भर्ती नियमों में जिस पे-स्केल का प्रावधान है, कर्मचारी उसी के आधार पर वेतन पाने का हकदार है। केवल प्रोबेशन में होने के कारण उसके वेतन में कटौती नहीं की जा सकती। 10%, 20% और 30% एरियर का क्या होगा?

याचिकाकर्ताओं की ओर से बताया गया कि सरकार की ऐसी कोई नीति नहीं है, जिसके तहत प्रोबे

📡 स्रोत: Dainik Bhaskar

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💡 पृष्ठभूमि (Background)

यह खबर मध्य प्रदेश में प्रोबेशन पर कर्मचारियों के वेतन नियम में बदलाव के बारे में है, जहाँ 70%, 80% और 90% न्यूनतम वेतनमान की व्यवस्था को समाप्त कर दिया गया है। यह निर्णय तब आया जब जाबलपुर हाईकोर्ट ने माना कि प्रोबेशन के आधार पर कम वेतन देना अनुचित है, जब कर्मचारी अपने पद के अनुरूप पूरा कार्य कर रहे हैं। यह बदलाव हजारों सरकारी कर्मचारियों के लिए महत्वपूर्ण है क्योंकि उन्हें पूर्ण वेतन और बकाया एरियर का भुगतान मिलेगा, जिससे उनकी आर्थिक स्थिति में सुधार होगा। आम जनता पर इसका प्रभाव यह है कि सरकारी

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