मुख्य सचिव वी. श्रीनिवास ने टोंक में विकास कार्यों की समीक्षा की
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जल संचय, ईसरदा बांध और पीएचईडी परियोजनाओं की प्रगति जानी, साइबर थाने का भी किया निरीक्षण
टोंक, 8 अक्टूबर। राजस्थान के मुख्य सचिव वी. श्रीनिवास गुरुवार को टोंक दौरे पर पहुंचे। टोंक कलेक्ट्रेट पहुंचने पर उन्हें गार्ड ऑफ ऑनर दिया गया। जिला कलेक्टर टीना डाबी ने बुके भेंट कर उनका स्वागत किया। इस दौरान अजमेर संभागीय आयुक्त शक्ति सिंह राठौड़, टोंक पुलिस अधीक्षक रोशन मीना, एडीएम विनोद मीणा सहित प्रशासनिक एवं पुलिस अधिकारी मौजूद रहे।
मुख्य सचिव ने कलेक्ट्रेट सभागार में अधिकारियों के साथ समीक्षा बैठक की। बैठक में जिले में चल रहे जल संचय एवं जल संवर्धन कार्यक्रमों की विस्तृत समीक्षा की गई। इसके साथ ही ईसरदा बांध परियोजना की प्रगति और जन स्वास्थ्य अभियांत्रिकी विभाग (पीएचईडी) से जुड़े विभिन्न प्रोजेक्ट्स की स्थिति की जानकारी ली। समीक्षा के दौरान मुख्य सचिव ने अधिकारियों से जिले में चल रहे विकास कार्यों की प्रगति, विभिन्न योजनाओं के क्रियान्वयन और आमजन को मिल रहे लाभ की जानकारी ली। उन्होंने जल संरक्षण से जुड़े कार्यों को प्रभावी तरीके से आगे बढ़ाने और विकास परियोजनाओं को निर्धारित समय सीमा में पूरा करने के निर्देश दिए।
मुख्य सचिव ने अधिकारियों को योजनाओं के क्रियान्वयन में गुणवत्ता और समयबद्धता पर विशेष ध्यान देने को कहा। उन्होंने आमजन से जुड़े कार्यों में तेजी लाने और सरकारी योजनाओं का लाभ पात्र लोगों तक प्रभावी तरीके से पहुंचाने पर भी जोर दिया। समीक्षा बैठक के बाद मुख्य सचिव वी. श्रीनिवास ने साइबर थाना टोंक का निरीक्षण किया। इस दौरान उन्होंने साइबर अपराधों की रोकथाम, पुलिस की कार्यप्रणाली और साइबर अपराध से जुड़े मामलों में की जा रही कार्रवाई की जानकारी ली। अधिकारियों ने साइबर थाना द्वारा किए जा रहे कार्यों और उपलब्ध संसाधनों के बारे में मुख्य सचिव को अवगत कराया।
मुख्य सचिव का टोंक दौरा जिले में चल रही जल एवं विकास परियोजनाओं की प्रगति की समीक्षा के साथ साइबर अपराध नियंत्रण की व्यवस्थाओं के निरीक्षण पर केंद्रित रहा।
बाइट : वी. श्रीनिवास, मुख्य सचिव, राजस्थान
🎙️ जनता का संदेश का मत
टोंक के विकास कार्यों के बीच, हमें याद रखना चाहिए कि प्रगति केवल भौतिक नहीं, बल्कि मानवीय भी होनी चाहिए। जब भी किसी विवाद या गलतफहमी का सामना हो, कानूनी रास्ते और संवाद को प्राथमिकता दें, न कि हिंसा को। समाज में सहानुभूति और संयम का विकास करके हम सभी को सुरक्षित और समृद्ध भविष्य की ओर ले जा सकते हैं।