'मुक्के मारे, लात मारी', कांग्रेस के विरोध-प्रदर्शन के दौरान दिल्ली पुलिस के कॉन्स्टेबल की आपबीती
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मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार के खिलाफ विपक्ष के विरोध प्रदर्शन के दौरान दिल्ली पुलिस के जवानों ने हाथापाई और मारपीट के आरोप लगाए हैं.
पुलिस अधिकारियों का कहना है कि जब वे कानून-व्यवस्था बनाए रखने और सुरक्षा पाबंदियों को लागू करने की कोशिश कर रहे थे, तब उनके साथ धक्का-मुक्की की गई और उन पर हमला हुआ.
यह घटना तब सामने आई जब दिल्ली पुलिस ने कांग्रेस नेता राहुल गांधी के नेतृत्व में प्रदर्शन कर रहे विपक्षी सांसदों को हिरासत में लिया.
ये सांसद वोटिंग प्रणाली में गड़बड़ी और एसआईआर के मुद्दे पर मुख्य चुनाव आयुक्त के इस्तीफे की मांग कर रहे थे.
घटना के बारे में बताते हुए कांस्टेबल देवेंद्र संधू ने कहा कि पुलिसकर्मी शांतिपूर्वक प्रदर्शनकारियों से प्रतिबंधित इलाके को खाली करने और पुलिस बसों में बैठने की अपील कर रहे थे.
इसी दौरान कुछ प्रदर्शनकारियों ने कथित तौर पर पुलिसकर्मियों को खींचना और धक्का देना शुरू कर दिया.
कई अधिकारियों का दावा है कि प्रदर्शनकारियों को हटाते समय उनके साथ मारपीट की गई और लात-घूंसे मारे गए.
न्यूज एजेंसी एएनआई को दिए इंटरव्यू में कांस्टेबल देवेंद्र संधू ने बताया, 'पुलिसकर्मी प्रदर्शनकारियों को शांति से समझा रहे थे कि इलाके में धारा 163 लागू है, इसलिए वे वहां से चले जाएं.
पुलिस अधिकारी बहुत शांत तरीके से लोगों से बसों में बैठने की अपील कर रहे थे.
मामला तब और बढ़ गया जब प्रदर्शनकारियों ने पुलिस अधिकारियों की नेमप्लेट तोड़ दी और उनकी टोपियां छीनकर फेंक दीं. इसके बाद पुलिसकर्मियों को पीछे से खींचा गया और जमीन पर गिरा दिया गया.'
देवेंद्र संधू ने बताया कि उनकी कमर और सिर के पिछले हिस्से में काफी चोटें आई हैं.
उन्होंने कहा कि पुलिस ने प्रदर्शनकारियों पर किसी तरह का बल प्रयोग नहीं किया था, वे केवल उन्हें हिरासत में ले रहे थे. उन्होंने कहा, मुझे काफी चोट लगी है, मेरी कमर में और सिर के पीछे गहरा घाव हुआ है.
हंगामा शुरू होने से पहले पुलिसकर्मियों ने किसी के साथ मारपीट नहीं की थी और वे बेहद शांति से प्रदर्शनकारियों
📡 स्रोत: ABP Live
💡 पृष्ठभूमि (Background)
यह खबर दिल्ली के कांग्रेस विरोध प्रदर्शनों के दौरान पुलिस के कॉन्स्टेबल पर मुक्का और लात मारने के आरोपों पर आधारित है। पुलिस का दावा है कि वे व्यवस्था बनाए रखने के प्रयास में थे, पर उन्हें धक्का-मुक्की और हमला किया गया। यह घटना चुनावी माहौल में बढ़ती हिंसा और पुलिस-जनता के बीच तनाव को उजागर करती है, जिससे नागरिकों में सुरक्षा और न्याय व्यवस्था पर सवाल उठते हैं। जनता को यह संदेश मिलता है कि राजनीतिक असहमति के दौरान भी कानून और व्यवस्था का सम्मान अनिवार्य है, अन्यथा समाज में अस्थिरता बढ़ सकती है।