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मुनाफे के लिए प्राइवेट यूनिवर्सिटी नहीं चला सकते:सुप्रीम कोर्ट ने 6 हफ्ते में ऑडिटेड खाते, फीस और सैलरी की जानकारी मांगी

लेखक: JKS News Desk अंतिम अपडेट: 18 सितंबर 2026
प्रकाशक: जनता का संदेश
मुनाफे के लिए प्राइवेट यूनिवर्सिटी नहीं चला सकते:सुप्रीम कोर्ट ने 6 हफ्ते में ऑडिटेड खाते, फीस और सैलरी की जानकारी मांगी

सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि मुनाफा कमाने के लिए प्राइवेट यूनिवर्सिटी नहीं चलाई जा सकतीं। इनका मकसद शिक्षा के बड़े सार्वजनिक उद्देश्य को पूरा करना होना चाहिए। जस्टिस अहसानुद्दीन अमानुल्लाह और जस्टिस एनवी अंजारिया की बेंच ने गुरुवार को राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को निर्देश दिए। उनसे छह हफ्ते में यूनिवर्सिटी के ऑडिटेड खाते जमा करने को कहा गया है।

इन खातों में सरप्लस आय, खर्च, फीस वसूली और कर्मचारियों की सैलरी की जानकारी देनी होगी। राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को दाखिले, भर्ती और पढ़ाई के स्तर से जुड़ी जानकारी भी देनी होगी। यह आदेश एमिटी यूनिवर्सिटी से जुड़े मामले में दिया गया है। इसमें एक छात्रा ने कॉलेज रिकॉर्ड में नाम बदलने की मांग की थी, जिसके बाद उसे परेशान किया गया।

इस मामले में अगली सुनवाई 19 नवंबर को होगी। बेंच ने कहा, “यह व्यवस्था आम लोगों के लिए है, खासकर शिक्षा के मामलों में। हम साफ करते हैं कि कोई भी प्राइवेट यूनिवर्सिटी मुनाफा कमाने वाली संस्था के तौर पर नहीं चलाई जाएगी। उसे शिक्षा के बड़े सार्वजनिक उद्देश्य को पूरा करना होगा।” सुप्रीम कोर्ट ने राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को यूनिवर्सिटी से पूरी जानकारी लेने का निर्देश दिया है।

अदालत ने कहा कि इन संस्थानों को सिर्फ मुनाफा कमाने वाले उद्योग की तरह चलने की अनुमति नहीं दी जा सकती। फीस, स्टाफ और खर्च की जानकारी मांगी अदालत ने यूनिवर्सिटी में दाखिले के समय और कोर्स के दौरान अलग-अलग मदों में ली गई फीस का ब्योरा मांगा है। इसमें टीचिंग और नॉन-टीचिंग स्टाफ की भर्ती के लिए जिम्मेदार बोर्ड की जानकारी भी शामिल है।

राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को कर्मचारियों की सैलरी, दूसरे भुगतान और उनकी सेवा शर्तों की जानकारी भी देनी होगी। सभी यूनिवर्सिटी को जुटाए गए फंड, उसके इस्तेमाल और यूनिवर्सिटी से सीधे जुड़े नहीं होने वाले लोगों को किए गए भुगतान की ऑडिटेड रिपोर्ट देनी होगी। यूनिवर्सिटी को केंद्र या राज्य सरकारों से मिली सभी सुविधाओं और लाभों की जानकारी भी देनी होगी।

इसमें जमीन आवंटन और कानूनी छूट से जुड़े लाभ शामिल हैं। अदालत ने कहा कि सरप्लस फंड का इस्तेमाल कैसे किया गया, इसकी जानकारी भी देनी होगी। इन फंड्स से किए गए निवेश का ब्योरा भी खास तौर पर देना होगा। सुप्रीम कोर्ट ने राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को ज

📡 स्रोत: Dainik Bhaskar

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