म्यांमार-यूएई से तस्करी कर सोना भारत लाने का आरोप, हवाला के जरिए खपाए जा रहे थे फर्जी बिल
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प्रवर्तन निदेशालय (ED) के गुवाहाटी जोनल ऑफिस-I ने मनी लॉन्ड्रिंग के मामले में 37.064 किलोग्राम सोना और करीब 13 ग्राम चांदी जैसे धातु के फ्लेक्स को अस्थायी रूप से अटैच किया है.
अटैच किए गए सोने की अनुमानित कीमत 54 करोड़ रुपये से अधिक बताई गई है. इसमें 29 बड़े आकार की सोने की छड़ें और 50 छोटे आकार के सोने के टुकड़े शामिल हैं.
यह कार्रवाई अखिल भारतीय स्तर पर सोने की कथित तस्करी और उसके अवैध कारोबार से जुड़े मामले में अक्षय परशुराम बंसोडे और अन्य अज्ञात लोगों के खिलाफ की गई है.
30 जून को पुलिस ने पकड़ा था सोना
ED के मुताबिक, असम पुलिस ने 30 जून 2026 को गुवाहाटी के खारघुली हाटीसिल इलाके में अक्षय परशुराम बंसोडे के कब्जे से यह सोना बरामद किया था.
बरामद सोना फिलहाल कामरूप मेट्रो ट्रेजरी, गुवाहाटी की सुरक्षित अभिरक्षा में रखा गया है.
ED ने लतासिल थाना, कामरूप मेट्रो में दर्ज मामले के आधार पर PMLA के तहत जांच शुरू की थी.
कोड से चलता था कूरियर सिंडिकेट
जांच में सामने आया कि बंसोडे कथित तौर पर कई वर्षों से एक अज्ञात व्यक्ति के निर्देश पर देश के अलग-अलग हिस्सों में सोना पहुंचाने का काम कर रहा था.
बताया गया है कि इस नेटवर्क में कई कूरियर शामिल थे और उनकी पहचान के लिए कथित तौर पर कोड सिस्टम का इस्तेमाल किया जाता था. इसके बदले बंसोडे को हर महीने निश्चित रकम दी जाती थी.
म्यांमार और यूएई से तस्करी का शक
ED की जांच के अनुसार, बरामद सोना कथित तौर पर म्यांमार और यूएई के रास्ते भारत में तस्करी कर लाया गया था. इसके भुगतान के लिए हवाला चैनलों का इस्तेमाल किए जाने का भी आरोप है.
जांच एजेंसी को आशंका है कि तस्करी के सोने को वैध बुलियन कारोबार में शामिल करने के लिए कुछ कारोबारियों द्वारा ऐसे चालान तैयार किए गए, जिनका संबंध एक बुलियन रिफाइनिंग कंपनी से बताया गया है.
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📡 स्रोत: ABP Live
💡 पृष्ठभूमि (Background)
म्यांमार-यूएई से भारत लाया गया 37.064 किलोग्राम सोना और 13 ग्राम चांदी का तस्करी मामला है, जिसे गुवाहाटी के ED ने अटैच किया है। इस तस्करी में हवाला के जरिए फर्जी बिलों का इस्तेमाल कर अवैध धन शोधन हुआ। यह घटना भारत के सोने के अवैध व्यापार पर प्रकाश डालती है, जो देश की आर्थिक सुरक्षा और मुद्रा स्थिरता के लिए खतरा है। आम जनता पर इसका असर बढ़ते सोने के कर, कच्चे माल की कीमतों में उतार-चढ़ाव और निवेशकों के विश्वास पर पड़ सकता है, साथ ही धन शोधन के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग भी बढ़ेगी।