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'नाबालिग भाई-बहनों की जमीन नहीं बेच सकते', गुवाहटी HC का बड़ा फैसला

लेखक: JKS News Desk अंतिम अपडेट: 11 अक्टूबर 2026
प्रकाशक: जनता का संदेश
'नाबालिग भाई-बहनों की जमीन नहीं बेच सकते', गुवाहटी HC का बड़ा फैसला

असम के गुवाहाटी स्थित हाई कोर्ट ने हाल ही में साल 1975 में खरीदी गई जमीन पर महिला की दावेदारी को चुनौती देने वाली याचिका को खारिज कर अपना फैसला सुनाया है.

कोर्ट ने याचिका पर सुनवाई करते हुए टिप्पणी की कि जमीन बिक्री को चुनौती देने वाले परिवार के सदस्यों ने इस पर दावा करने में काफी देरी कर दी.

हालांकि, गुवाहाटी हाई कोर्ट ने मामले में सुनवाई के दौरान यह पाया कि जब संबंधित जमीन बेची गई थी, उस वक्त बड़े भाई की तरफ से की गई नाबालिग भाई-बहनों के हिस्से की जमीन की बिक्री वैध नहीं थी, लेकिन पिछले 30 सालों से ज्यादा समय से महिला उक्त जमीन पर काबिज है.

इसके साथ ही, कोर्ट ने बड़ी टिप्पणी करते हुए कहा कि इस्लामी कानून के तहत बड़े भाई को अपने नाबालिग भाई-बहनों के हिस्से की जमीन बेचने का हक नहीं है.

गुवाहाटी हाई कोर्ट ने इस मामले में इसी महीने की 24 तारीख यानी 24 अगस्त, 2026 को अपना अंतिम फैसला सुना दिया है.

कैसे खड़ा हुआ पूरा विवाद?

दरअसल, कोर्ट के आदेश से मिली जानकारी के मुताबिक, तारुबाला साहा ने 18 फरवरी, 1975 को एक रजिस्टर्ड सेल डीड के जरिए 4 बीघा, 2 कट्ठा और 10 लेचा जमीन खरीदी थी.

इस जमीन के उस वक्त असली मालिक याद अली थे, जिनके कई बच्चे थे, जो उनकी मौत के वक्त नाबालिग थे, लेकिन याद अली के बड़े बेटे नागर अली ने अपने और अपने नाबालिग भाई-बहनों की तरफ से वह जमीन तारुबाला साहा को बेच दी.

साहा ने अदालत को बताया कि नागर अली से जमीन खरीदारी करने के बाद उन्होंने उस जमीन पर कब्जा बनाए रखा था और उस जमीन पर मजदूरों से खेती भी करवाती थी.

इसके साथ ही, उनका नाम जमीन के रिकॉर्ड्स में भी दर्ज था.

उन्होंने आरोप लगाया कि प्रतिवादियों ने 15 फरवरी, 2008 को उन्हें जमीन से बाहर निकाल दिया और वहां अपना मकान बना लिया था.

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📡 स्रोत: ABP Live

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