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ऑनलाइन कट्टरपंथी नेटवर्क पर NIA का शिकंजा, ISIS के 9 आरोपियों पर चार्जशीट

लेखक: JKS News Desk अंतिम अपडेट: 20 सितंबर 2026
प्रकाशक: जनता का संदेश
ऑनलाइन कट्टरपंथी नेटवर्क पर NIA का शिकंजा, ISIS के 9 आरोपियों पर चार्जशीट

ऑनलाइन सोशल मीडिया के जरिए युवाओं को कट्टरपंथ की तरफ धकेलने और आतंकी संगठन ISIS की गतिविधियों को बढ़ावा देने के मामले में राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) ने बड़ी कार्रवाई की है.

NIA ने विजयवाड़ा की विशेष NIA अदालत में 9 आरोपियों के खिलाफ चार्जशीट दाखिल की है. ये मामला ऑनलाइन रेडिकलाइजेशन से जुड़ा है.

चार्जशीट में मोहम्मद रहमतुल्लाह शरीफ, मोहम्मद दानिश, मिर्जा सोहेल बेग, लकी अहमद, जीशान अब्दुल मजीद, मीर आसिफ अली, अब्दुल सलाम, शारुक खान और शेख फैज उर रहमान को आरोपी बनाया गया है.

हिंसक जिहाद के जरिए भारत में खिलाफत की रची थी बड़ी साजिश

NIA के मुताबिक, जांच में सामने आया है कि आरोपी प्रतिबंधित आतंकी संगठन ISIS के सदस्य या समर्थक थे.

आरोप है कि इन लोगों ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म, खासकर इंस्टाग्राम, का इस्तेमाल युवाओं को प्रभावित और कट्टरपंथी बनाने के लिए किया.

जांच एजेंसी का दावा है कि आरोपियों ने भारत की संप्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता को नुकसान पहुंचाने के इरादे से हिंसक जिहाद के जरिए भारत में खिलाफत स्थापित करने की बड़ी साजिश रची थी.

इसके लिए कथित तौर पर ऐसे युवाओं को निशाना बनाया गया, जो आसानी से उनके प्रभाव में आ सकते थे.

युवाओं को आतंकी गतिविधियों में शामिल करने और कट्टर बनाने का आरोप

NIA के मुताबिक, आरोपियों ने युवाओं को हिंसक आतंकी गतिविधियों में शामिल होने के लिए प्रेरित और कट्टरपंथी बनाने की कोशिश की.

जांच में ये भी सामने आया कि आरोपी विस्फोटक बनाने और हथियार चलाने की ट्रेनिंग की तैयारी कर रहे थे.

इस मामले में जांच के दौरान एक और चौंकाने वाली बात सामने आई, जहां आरोपियों ने आपस में गुप्त तरीके से बातचीत करने के लिए एक सिक्योर कम्युनिकेशन ऐप विकसित किया था.

आरोप है कि इस ऐप को तैयार कर

📡 स्रोत: ABP Live

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🎙️ जनता का संदेश का मत

ऑनलाइन कट्टरपंथ की चिंगारी को बुझाने के लिए हमें जागरूकता और सहानुभूति को बढ़ावा देना होगा। युवा मन को सकारात्मक संवाद, शिक्षा और रोजगार के अवसरों से जोड़ें, ताकि वे गलत रास्ते से हटकर समाज में रचनात्मक योगदान दें। किसी भी हिंसा या भड़काऊ विचार को कानूनी मार्ग और सामुदायिक संवाद से हल करें। इस तरह हम एक सुरक्षित, समावेशी और सहिष्णु समाज का निर्माण कर सकते हैं।

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