वक्त का पहिया घुमा: "जिस घर से पत्थर आएंगे, उसी घर से पत्थर निकाले जाएंगे" बयान देने वाले और पत्थरबाजों से मुआवजा वसूल करने का कानून बनाने वाले नरोत्तम मिश्रा के समर्थकों ने किया पथराव
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मध्य प्रदेश की राजनीति में एक ऐसा घटनाक्रम सामने आया है जिसने पुरानी बहस को फिर से जिंदा कर दिया है। पूर्व गृह मंत्री नरोत्तम मिश्रा के समर्थकों के प्रदर्शन के दौरान पुलिस पर पथराव और तोड़फोड़ की घटना सामने आई है। प्रशासन के अनुसार, इस हिंसा में एसपी समेत कई पुलिसकर्मी घायल हुए, कई वाहनों में तोड़फोड़ की गई और पुलिस वाहन को पलटने तथा आग लगाने की भी कोशिश की गई।
जिला प्रशासन के मुताबिक, प्रदर्शन के दौरान हालात इतने बिगड़ गए कि करीब 15 से 20 किलोमीटर लंबा जाम लग गया। सुबह करीब साढ़े चार बजे पथराव हुआ, जिसमें आठ पुलिसकर्मियों को गंभीर चोटें आईं। एसपी और एसडीओपी भी घायल हुए। प्रशासन का कहना है कि हालात तनावपूर्ण होने के बावजूद पुलिस ने लाठीचार्ज नहीं किया और पहले प्रदर्शनकारियों को शांतिपूर्वक हटाने की कोशिश की। इसके बाद सीमित रूप से आंसू गैस के गोले छोड़े गए। उपलब्ध जानकारी के अनुसार प्रदर्शनकारियों ने कई ट्रकों और पुलिस वाहनों को नुकसान पहुंचाया। (प्रशासन का दावा)।
इस घटना के बाद राजनीतिक हलकों में एक बार फिर वह दौर याद किया जा रहा है जब गृह मंत्री रहते हुए नरोत्तम मिश्रा ने पत्थरबाजों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई, सरकारी संपत्ति के नुकसान की भरपाई और आरोपियों से मुआवजा वसूलने की नीति का जोरदार समर्थन किया था। अब सवाल उठ रहे हैं कि यदि आरोप सही साबित होते हैं, तो क्या इस मामले में भी वही कसौटी अपनाई जाएगी जो पहले दूसरे मामलों में अपनाने की बात कही जाती थी।
फिलहाल पुलिस ने मामले की जांच शुरू कर दी है। घटना में शामिल लोगों की पहचान की जा रही है और प्रशासन का कहना है कि कानून के मुताबिक आगे की कार्रवाई की जाएगी। आम जनता भी इस मुद्दे को लेकर सरकार और भाजपा से जवाब मांग रहा है कि क्या कानून का एक जैसा इस्तेमाल इस मामले में भी होगा या नहीं।