नौणी विश्वविद्यालय के कार्यवाहक कुलपति डॉ. हरमिंदर सिंह बावेजा की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल, निष्पक्ष जांच हो: संदीपनी भारद्वाज
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कहा: सीबीआई मामलों, अभियोजन स्वीकृति और प्रबंधन मंडल की कार्यवाही को लेकर उठे सवालों का जवाब दें कुलपति
अक्तूबर 28, सोलन (हिमाचल प्रदेश): भाजपा प्रदेश प्रवक्ता एवं संगठनात्मक जिला सोलन के प्रभारी संदीपनी भारद्वाज ने डॉ. वाई.एस. परमार औद्यानिकी एवं वानिकी विश्वविद्यालय, नौणी के कार्यवाहक कुलपति डॉ. हरमिंदर सिंह बावेजा की कार्यप्रणाली को लेकर गंभीर सवाल उठाए हैं। उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालय के प्रशासनिक निर्णयों, प्रबंधन मंडल की कार्यवाही, शिक्षकों के स्थानांतरण और लंबित कानूनी मामलों से जुड़े आरोपों की निष्पक्ष एवं समयबद्ध जांच होनी चाहिए।
भारद्वाज ने कहा कि उपलब्ध कराई गई जानकारी के अनुसार डॉ. बावेजा के विरुद्ध सीबीआई न्यायालय, देहरादून में दो आरोपपत्र लंबित होने और संबंधित मामलों में अभियोजन स्वीकृति प्रदान किए जाने की बात सामने आई है। इसके अतिरिक्त उत्तराखंड और हिमाचल प्रदेश में उनके पूर्व प्रशासनिक कार्यकाल से संबंधित विभागीय जांचें लंबित होने के भी आरोप हैं।
उन्होंने कहा कि इन मामलों की वास्तविक स्थिति न्यायालय और संबंधित विभागों के आधिकारिक अभिलेखों से स्पष्ट की जानी चाहिए। आरोपपत्र लंबित होना दोष सिद्ध होने के समान नहीं है, लेकिन उच्च प्रशासनिक पद पर कार्यरत अधिकारी से पारदर्शिता की अपेक्षा अवश्य की जाती है। उन्होंने सवाल उठाया कि पूर्व कुलपति प्रो.
राजेश्वर सिंह चंदेल का कार्यकाल 8 मई 2026 को समाप्त होने के बाद डॉ. बावेजा को अतिरिक्त कार्यभार सौंपते समय लंबित मामलों और प्रशासनिक परिस्थितियों का क्या परीक्षण किया गया था? भारद्वाज ने प्रबंधन मंडल की 119वीं से 123वीं बैठकों की कार्यवाही से संबंधित आरोपों को विशेष रूप से गंभीर बताया।
उन्होंने कहा कि 12 अगस्त 2026 को आयोजित 123वीं बैठक के कार्यवृत्त में कथित बदलाव और राज्य सरकार के अधिकारियों की आपत्तियों की जांच आवश्यक है। यदि कार्यवाही में अनधिकृत संशोधन हुआ है, तो उसके आधार पर लिए गए निर्णयों की वैधानिकता भी जांची जानी चाहिए। भारद्वाज ने कहा कि यह विवाद केवल आरोपों तक सीमित नहीं है।
5 अक्तूबर को कुलपति द्वारा कुलसचिव सिद्धार्थ आचार्य की शक्तियां वापस लेने का आदेश प्रदेश सरकार ने 6 अक्तूबर को निरस्त कर दिया था। सरकार ने स्पष्ट किया कि कुलसचिव के वैधानिक अधिकार इस प्रकार दूसरे अधिकारी को नहीं सौंपे जा सकते। उन्होंने सवाल किया कि जब सरकार को स्वयं कुलपति का आदेश वापस लेना पड़ा, तो इस प्रशासनिक टकराव की जिम्मेदारी कौन लेगा?
उन्होंने कहा कि 12 अगस्त की प्रबंधन मंडल बैठक में डॉ. बावेजा के व्यक्तिगत सेवा लाभों से संबंधित विषय उठाए जाने पर वित्त विभाग ने हितों के टकराव की आपत्ति दर्ज की थी। पूर्व बैठकों की कार्यवाही को अमान्य घोषित करने के प्रस्ताव से पहले प्रदान की गई सीबीआई अभियोजन स्वीकृति प्रभावित होने का सवाल भी सामने आया है।
भारद्वाज ने मांग की कि इस पूरे प्रकरण की स्वतंत्र कानूनी जांच कराई जाए। भारद्वाज ने आरोप लगाया कि विश्वविद्यालय में लगभग 180 स्थानांतरण किए जाने, कुछ कर्मचारियों पर दबाव डालने और शैक्षणिक गतिविधियों में राजनीतिक हस्तक्षेप की शिकायतें भी सामने आई हैं। उन्होंने कहा कि इन आरोपों की पुष्टि के लिए स्थानांतरण आदेशों, संबंधित शिकायतों तथा परीक्षा प्रणाली के अभिलेखों का परीक्षण आवश्यक है।
विशेष रूप से थुनाग महाविद्यालय में शिक्षकों की उपलब्धता और कृषि विज्ञान केंद्रों में रिक्त पदों की स्थिति सार्वजनिक की जानी चाहिए। उन्होंने परीक्षा परिणामों को प्रभावित करने संबंधी आरोपों पर भी चिंता व्यक्त की। उन्होंने कहा कि यदि किसी विद्यार्थी के राजनीतिक संगठन से संबंध के आधार पर परीक्षा मूल्यांकन प्रभावित करने के निर्देश दिए गए हैं, तो यह विश्वविद्यालय की अकादमिक स्वतंत्रता का गंभीर विषय है।
इसकी निष्पक्ष जांच होनी चाहिए।