NEET UG पेपर लीक के बाद क्या बदलेगा? NTA के लिए समिति ने सुझाए ये बड़े सुधार
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NEET UG 2026: नीट यूजी 2026 पेपर लीक विवाद के बाद नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) की कार्यप्रणाली पर सवाल तेज हो गए हैं.
संसद की शिक्षा, महिला, बच्चे, युवा और खेल संबंधी स्थायी समिति ने एजेंसी की जवाबदेही तय करने के लिए कानूनी ढांचा तैयार करने की सिफारिश की है.
समिति का मानना है कि देश की बड़ी प्रवेश परीक्षाओं में पारदर्शिता और विश्वसनीयता बनाए रखने के लिए NTA की व्यवस्था में व्यापक सुधार जरूरी हैं.
समिति ने अपनी विस्तृत रिपोर्ट में कहा कि शिक्षा मंत्रालय ऐसा संसदीय ढांचा तैयार कर सकता है, जिससे NTA की संसद के दोनों सदनों के प्रति जवाबदेही सुनिश्चित हो.
रिपोर्ट में यह भी रेखांकित किया गया कि परीक्षाओं की विश्वसनीयता केवल शिक्षा का विषय नहीं, बल्कि सामाजिक न्याय और राष्ट्रीय हित से भी जुड़ी है.
NEET UG 2026 रद्द होने के बाद उठे गंभीर सवाल NTA ने पेपर लीक के आरोपों के बीच 3 मई 2026 को आयोजित NEET UG परीक्षा को 12 मई को रद्द कर दिया था.
समिति के अनुसार, इस घटना ने परीक्षा प्रणाली की सुरक्षा और निगरानी को मजबूत बनाने की जरूरत सामने रखी है.
रिपोर्ट में कहा गया कि परीक्षा में धांधली करने वाले संगठित गिरोह लगातार नए तरीके अपनाते हैं.
ऐसे में NTA को मजबूत सुरक्षा प्रोटोकॉल, पर्याप्त कर्मचारी, स्पष्ट जवाबदेही और परीक्षा संचालन के व्यापक डिजिटलीकरण पर ध्यान देना चाहिए.
पेन-पेपर की जगह कंप्यूटर आधारित परीक्षा पर जोर समिति ने पेन-पेपर आधारित परीक्षा के स्थान पर कंप्यूटर आधारित टेस्ट (CBT) मॉडल अपनाने की संभावनाओं पर जोर दिया है.
इसके साथ ही परीक्षा केंद्रों के लिए सरकारी स्वामित्व और संचालन वाली सुविधाओं को बढ़ावा देने तथा निजी केंद्रों पर निर्भरता कम करने की सिफारिश की गई है.
समिति ने परीक्षा में शामिल होने वाले अभ्यर्थियों की आयु सीमा और प्रयासों की संख्या की भी समीक्षा करने को कहा है.
फिलहाल NEET UG में प्रयासों की संख्या पर कोई निर्धारित सीमा नहीं है और अधिकतम आयु सीमा भी लागू नहीं है.
समिति ने स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय सहित संबंधित पक्षों के साथ विचार-विमर्श कर उचित नियम बनाने का सुझाव दिया है.
मेडिकल प्रवेश परीक्षा के लिए दो चरणों का प्रस्ताव समिति ने NEET UG के लिए दो चरणों वाली परीक्षा प्रणाली की संभावना तलाशने की सिफारिश की है.
इसके तहत सभी मेडिकल क्षेत्रों के लिए एक साझा प्रारंभिक परीक्षा और अलग-अलग पाठ्यक्रमों के लिए विशेष मुख्य परीक्षा आयोजित की जा सकती है.
इससे MBBS, BDS, नर्सिंग और AYUSH जैसे पाठ्यक्रमों में प्रवेश के लिए अभ्यर्थियों की अलग-अलग जरूरतों के अनुसार चयन प्रक्रिया तैयार करने में मदद मिल सकती है.
प्रश्न बैंक और स्थायी कर्मचारियों से मजबूत होगी व्यवस्था रिपोर्ट में प्रश्नपत्र लीक रोकने के लिए बड़ा और नियमित रूप से अपडेट होने वाला प्रश्न बैंक बनाने पर जोर दिया गया है.
इसके लिए IIT, AIIMS और IIM जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों के विशेषज्ञों की मदद लेने की सिफारिश की गई है.
प्रश्न तैयार करने वालों की पृष्ठभूमि की जांच और हितों के टकराव को रोकने के लिए भी व्यवस्था बनाने की बात कही गई है.
समिति ने परीक्षा से जुड़ी एजेंसियों और विक्रेताओं की राष्ट्रीय स्तर पर सूची बनाए रखने का सुझाव दिया है.
साथ ही NTA में कर्मचारियों की कमी पर चिंता जताते हुए स्थायी नियुक्तियों की मांग की है.
रिपोर्ट के मुताबिक, 39 स्वीकृत पदों में से केवल 23 अधिकारी प्रतिनियुक्ति पर कार्यरत थे, यानी करीब 41 प्रतिशत पद खाली थे.
समिति का स्पष्ट संदेश है कि परीक्षा प्रणाली में पारदर्शिता, जवाबदेही और सुरक्षा मजबूत किए बिना छात्रों का भरोसा बहाल करना मुश्किल होगा.
📡 स्रोत: NewsData.io