नेहा बोरा को लेकर चिराग पासवान का राहुल पर निशाना- 'जिस लड़की की तस्वीर...'
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केंद्रीय मंत्री चिराग पासवान ने रविवार (18 अक्टूबर, 2026) को कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) और विपक्ष की तरफ से देश में सत्ता परिवर्तन करने को लेकर दिए बयानों की आलोचना की है.
उन्होंने कहा कि दुनिया के सबसे बड़े लोकतंत्र में इस बात की सोच भी रखना कि यहां पर इस तरीके से रिजीम चेंज किया जा सकता है, ये हमारे देश की मुख्य विपक्षी पार्टी की ऐसी सोच, पूरे तरीके से देश में अराजकता का माहौल बनाने की सोच है.
उन्होंने विपक्ष पर हमला करते हुए कहा, जो लोग पूरी तरह से लोकतंत्र खत्म होने की दुहाई देकर अपनी राजनीतिक रोटियां सेक रहे हैं, क्या ये लोकतंत्र को खत्म करना नहीं है?
इनकी इसी सोच की वजह से ही देश की जनता इनसे और दूर होगी.
जनता इन्हें इस तरीके से नकार देगी कि 2029 तो छोड़िए, 2034 के चुनाव में भी ये लोग आसपास नहीं आएंगे.
जहां-जहां रिजीम चेंज हुआ, विदेशी ताकतों के हस्तक्षेप से हुआ- चिराग
केंद्रीय मंत्री चिराग पासवान ने कहा, इतिहास गवाह रहा है कि जहां-जहां रिजीम चेंज हुआ है, वो सत्ता परिवर्तन दूसरे तरीकों से हुआ है, दूसरी ताकतों के हस्तक्षेप से हुआ है, विदेशी ताकतों के हस्तक्षेप से हुआ है.
भारत में जब भी ऐसा हुआ है, तो वह चुनावी प्रक्रिया का इस्तेमाल करके किया गया है. ऐसे में रिजीम चेंज जैसे शब्द का इस्तेमाल करना, आखिर क्या चाहते हैं ये लोग?
VIDEO | Patna, Bihar: Union Minister Chirag Paswan criticises CJP's remarks on regime change in India, says, "In a democratic country like India, even entertaining the thought that it is possible to change the regime in this manner is anarchic.
When some of the country's biggest opposition parties entertain such thoughts, it is a sign of anarchy.
Those trying to exploit the situation for their own benefit by claiming that democracy is being destroyed are themselves undermining democracy." (Full video available on PTI Videos - h
📡 स्रोत: ABP Live
💡 पृष्ठभूमि (Background)
यह खबर केंद्रीय मंत्री चिराग पासवान द्वारा कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) और विपक्ष के सत्ता परिवर्तन के प्रयासों पर की गई आलोचना को दर्शाती है। वे कहते हैं कि ऐसी सोच से देश में अराजकता पैदा होगी। यह विषय महत्वपूर्ण है क्योंकि यह भारत के लोकतंत्र की स्थिरता और राजनीतिक संतुलन पर प्रकाश डालता है। यदि विपक्ष के इस दृष्टिकोण को स्वीकार किया गया, तो सरकार में बदलाव की प्रक्रिया तेज हो सकती है, जिससे नीति और प्रशासन में अनिश्चितता बढ़ेगी। आम जनता को नीति निरंतरता में कमी, निवेश में अनिश्चितता और सामाजिक व