निजीकरण की खबरों पर ISRO का आया रिएक्शन, कहा - 'यह पूरी तरह से...'
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भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) ने हाल ही में स्पेस सेक्टर में सुधारों, निजीकरण और ISRO की भूमिका को लेकर जारी अटकलों पर रविवार (6 सितंबर, 2026) को अपना रिएक्शन दिया है.
इसरो ने कहा कि ऐसे दावे पूरी तरह से निराधार और गलत हैं.
हम स्पष्ट तौर पर कहना चाहते हैं कि ISRO का न तो निजीकरण किया जाएगा और न ही उसके महत्व को कम किया जाएगा.
संगठन ने कहा कि ISRO एडवांस स्पेस रिसर्च और तकनीकी विकास, राष्ट्रीय और स्ट्रैटेजिक मिशनों, स्पेस साइंज एंड एक्सप्लोरेशन और महत्वपूर्ण और अत्याधुनिक अंतरिक्ष क्षमताओं के लिए भारत की प्रमुख संस्था बनी रहेगी.
स्पेस सेक्टर में निजी क्षेत्र की भागीदारी पर ISRO ने क्या कहा?
ISRO ने कहा, स्पेस सेक्टर में निजी क्षेत्र की भागीदारी का उद्देश्य किसी भी तरह से इसरो की भूमिका को कम करना नहीं है, बल्कि इसका उद्देश्य इसरो को भारत के स्पेस प्रोग्राम की अगली पीढ़ी पर और ज्यादा मजबूती से फोकस करने में सक्षम बनाना है, जबकि इंडस्ट्री मैच्योर टेक्नोलॉजिज और क्षमताओं को बड़े पैमाने पर विकसित करेगा.
संगठन ने कहा कि जो भी कुछ बदलाव हो रहा है वो ISRO के लिए महत्व में नहीं हो रहा, बल्कि भारत के स्पेस इकोसिस्टम के स्ट्र्क्चर और स्केल में हो रहा है.
ISRO posts clarification regarding media reports on concerns relating to Space Sector Reforms and the role of ISRO
ISRO tweets, "There has been considerable reporting in parts of the media around the future role of ISRO including speculations and misinformation that there is an https://t.co/awcIDTNYv1 pic.twitter.com/yWQGDgbXni
ANI (@ANI) September 6, 2026</bl
📡 स्रोत: ABP Live
💡 पृष्ठभूमि (Background)
यह खबर ISRO के निजीकरण के दावों पर उसके आधिकारिक रिएक्शन को दर्शाती है, जिसमें संगठन ने स्पष्ट किया कि किसी भी तरह का निजीकरण नहीं होगा। यह विषय महत्वपूर्ण है क्योंकि ISRO भारत की वैज्ञानिक प्रतिष्ठा और अंतरिक्ष नीति का केंद्र है, और निजीकरण के अफवाहें सार्वजनिक विश्वास और राष्ट्रीय सुरक्षा को प्रभावित कर सकती हैं। यदि ये अफवाहें गलत साबित हों तो जनता को यह स्पष्टता मिलेगी कि ISRO की स्वतंत्रता और मिशन स्थिर हैं, जिससे निवेशकों और शोधकर्ताओं का भरोसा बना रहेगा। इस तरह का स्पष्टीकरण भारत के अंतरि