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नोएडा में सर्वर हैक कर 2.42 करोड़ की ठगी:28 अलग-अलग बैंकों के खाते में गया पैसा, साइबर सेल कर रहा जांच

लेखक: JKS News Desk अंतिम अपडेट: 18 सितंबर 2026
प्रकाशक: जनता का संदेश
नोएडा में सर्वर हैक कर 2.42 करोड़ की ठगी:28 अलग-अलग बैंकों के खाते में गया पैसा, साइबर सेल कर रहा जांच

सेक्टर-65 स्थित एक फिनटेक कंपनी का सर्वर हैक कर साइबर ठगों ने करीब 2.42 करोड़ रुपये दूसरे बैंक खाते में ट्रांसपर कर लिए। आरोपियों ने कंपनी के एपीआई पोर्टल को निशाना बनाकर कुछ घंटों के भीतर 497 ट्रांजेक्शन किए। इसके बाद ठगी की रकम 28 अलग-अलग बैंकों के 58 खातों में ट्रांसफर कर दी गई।

कंपनी के डायरेक्टर की शिकायत पर साइबर थाना पुलिस ने मंगलवार को केस दर्ज कर लिया है। रिनोवा पेटेक प्राइवेट लिमिटेड कंपनी के डायरेक्टर राजकुमार ने पुलिस को बताया कि उनकी कंपनी फिनटेक से जुड़ी सेवाएं देती है। कंपनी के जरिए मोबाइल रिचार्ज, बिल पेमेंट, आधार के माध्यम से निकासी और डोमेस्टिक मनी ट्रांसफर जैसी सुविधाएं उपलब्ध कराई हैं।

कंपनी का कार्यालय सेक्टर-65 में है। 13 सितंबर को दोपहर करीब 12 बजे से शाम 8 बजे के बीच कंपनी का सर्वर हैक किया गया। 497 ट्रांजेक्शन किए गए इसी दौरान आरोपियों ने कंपनी के एपीआई पोर्टल का इस्तेमाल कर रकम ट्रांसफर करनी शुरू कर दी। कुछ घंटों में 497 ट्रांजेक्शन के जरिए कुल 2,42,62,576 रुपये अलग-अलग खातों में भेज दिए गए।

कंपनी को मामले की जानकारी होने के बाद ट्रांजेक्शन की जांच की गई तो ठगी का पता चला। कंपनी की ओर से पुलिस को बताया गया है कि ठगी की रकम 28 बैंकों के कुल 58 खातों में ट्रांसफर हुई है। ट्रांजेक्शन की जुटा रहे डिटेल मामले में कंपनी की तरफ से नेशनल साइबर क्राइम रिपोर्टिंग पोर्टल पर करीब शिकायत दर्ज कराई गई हैं।

पुलिस अब सर्वर और एपीआई पोर्टल की तकनीकी जांच कर रही है। साथ ही जिन बैंक खातों में रकम पहुंची है, उनके धारकों और ट्रांजेक्शन की जानकारी जुटाई जा रही है। पुलिस यह भी पता लगाने का प्रयास कर रही है कि सर्वर तक आरोपियों ने किस तरीके से पहुंच बनाई और ठगी की रकम को आगे किन खातों में भेजा गया।

📡 स्रोत: NewsData.io

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🎙️ जनता का संदेश का मत

साइबर अपराध से बचाव का पहला कदम है जागरूकता और सुरक्षित प्रोटोकॉल अपनाना। फिनटेक कंपनियों को मल्टी‑फैक्टर ऑथेंटिकेशन, एपीआई की कठोर निगरानी और नियमित सुरक्षा ऑडिट अनिवार्य बनाना चाहिए। यदि कोई अनियमितता दिखे तो तुरंत साइबर पुलिस को सूचित करें और कानूनी कार्रवाई शुरू करें। पीड़ितों को सहानुभूति और त्वरित सहायता देकर उनके विश्वास को पुनः स्थापित किया जा सकता है। समाज को तकनीक के प्रति सतर्क और जिम्मेदार बनना चाहिए, ताकि ऐसी ठगी फिर न हो।

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