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OBC क्रीमी लेयर पर सुप्रीम कोर्ट में आज सुनवाई:केंद्र बोला- CSE-2025 के 958 उम्मीदवारों की सर्विस अलोकेशन पुराने नियमों से हो

लेखक: JKS News Desk अंतिम अपडेट: 3 सितंबर 2026 👁️ 1 बार पढ़ा गया
प्रकाशक: जनता का संदेश
OBC क्रीमी लेयर पर सुप्रीम कोर्ट में आज सुनवाई:केंद्र बोला- CSE-2025 के 958 उम्मीदवारों की सर्विस अलोकेशन पुराने नियमों से हो

ओबीसी क्रीमी लेयर के नियमों को लेकर सुप्रीम कोर्ट में मंगलवार को सुनवाई होगी। केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट से CSE-2025 के 958 चयनित उम्मीदवारों की सर्विस अलोकेशन प्रक्रिया पुराने OBC क्रीमी लेयर मानदंड के आधार पर करने की अनुमति मांगी है। सुप्रीम कोर्ट ने ‘यूनियन ऑफ इंडिया बनाम रोहित नाथन’ मामले में 11 मार्च को OBC क्रीमी लेयर की पहचान को लेकर फैसला दिया था।

कोर्ट ने कहा था कि 14 अक्टूबर 2004 का स्पष्टीकरण पत्र 8 सितंबर 1993 के ऑफिस मेमोरेंडम (OM) को नहीं बदल सकता। साथ ही सिर्फ माता-पिता की सैलरी या आय के आधार पर किसी उम्मीदवार को OBC क्रीमी लेयर में शामिल नहीं किया जा सकता। इसके लिए माता-पिता के पद की स्थिति के साथ आय और संपत्ति संबंधी नियमों को भी देखना जरूरी है।

केंद्र की दलील- उम्मीदवारों ने पुराने नियम के तहत परीक्षा दी केंद्र ने कहा कि CSE-2025 की परीक्षा 11 मार्च के फैसले से पहले शुरू हो गई थी। नोटिफिकेशन 22 जनवरी 2025 को आया था। प्रीलिम्स 25 मई और मेन्स 22 से 31 अगस्त 2025 तक हुई। 6 मार्च 2026 को 958 उम्मीदवारों का रिजल्ट आया। इसके पांच दिन बाद 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट का नया फैसला आया।

केंद्र के मुताबिक, अगर नया फैसला पिछली तारीख से लागू हुआ तो उन उम्मीदवारों के साथ भेदभाव हो सकता है, जिन्होंने पुराने नियमों के आधार पर परीक्षा दी थी। OBC उम्मीदवारों को उम्र और अटेम्प्ट का नुकसान केंद्र ने कहा कि पुराने नियमों के कारण कुछ उम्मीदवार खुद को OBC-NCL के लिए अयोग्य मान सकते थे।

खासकर वे, जिनके माता-पिता PSU या निजी कंपनी में काम करते थे और उनकी आय तय सीमा से ज्यादा थी। ऐसे उम्मीदवारों ने जनरल कैटेगरी से परीक्षा दी होगी या OBC में आवेदन नहीं किया होगा। इससे उन्हें OBC-NCL की 3 साल की उम्र छूट और अतिरिक्त प्रयास का लाभ नहीं मिला होगा। वहीं, कुछ उम्मीदवारों ने OBC में आवेदन किया, लेकिन नए फैसले के बाद वे क्रीमी लेयर में आ सकते हैं।

इससे पुराने नियम पर भरोसा करने वाले उम्मीदवारों के साथ अलग-अलग व्यवहार की स्थिति बन सकती है। दोबारा जांच हुई तो पूरी परीक्षा पर असर सरकार ने कहा कि नए फैसले के बाद कई उम्मीदवारों के माता-पिता की नौकरी और पद की दोबारा जांच करनी पड़ सकती है। अगर यह जांच उन लोगों तक भी हुई, जिन्होंने OBC में आवेदन नहीं किया था, तो उनकी कैटेगरी, उम्र में छूट

📡 स्रोत: Dainik Bhaskar

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💡 पृष्ठभूमि (Background)

यह खबर ओबीसी क्रीमी लेयर के नियमों पर सुप्रीम कोर्ट की सुनवाई से संबंधित है, जहाँ केंद्र सरकार ने CSE-2025 के 958 चयनित उम्मीदवारों की सर्विस अलोकेशन पुराने मानदंडों के आधार पर करने का आग्रह किया है। यह विषय महत्वपूर्ण है क्योंकि ओबीसी क्रीमी लेयर की पहचान और उसके नियमों पर विवाद भारतीय न्याय व्यवस्था में एक प्रमुख मुद्दा बन चुका है, और इससे सरकारी पदों पर ओबीसी के प्रतिनिधित्व पर असर पड़ सकता है। आम जनता के लिए इसका असर यह हो सकता है कि ओबीसी उम्मीदवारों की नौकरी पाने की संभावनाएँ बदल सकती हैं,

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