पहली बार कांग्रेस में इंटरव्यू से चुने जाएंगे जिलाध्यक्ष:पर्यवेक्षक के सामने 15 नेताओं का दावा; 10 तक घोषित होंगे अध्यक्षों के नाम
ताज़ा खबरों से अपडेट रहने के लिए हमारे WhatsApp चैनल से जुड़ेंJoin करें →संगठनात्मक मजबूती की प्रक्रिया से गुजर रही कांग्रेस पहले कार्यकर्ताओं में विश्वास जगाने में जुटी है। यही कारण है कि पार्टी हाईकमान ने केंद्रीय पर्यवेक्षक भेजकर जिलाध्यक्ष व महानगर अध्यक्ष के रूप में उस नाम का चयन करने की योजना बनाई, जो सबसे योग्य हो और जिसका जन समर्थन हो। इसी क्रम में महाराष्ट्र के रामटेक से सांसद श्याम कुमार दौलत बरवे 5 दिनों के दौरे पर गोरखपुर आए थे।
उन्होंने एक-एक कर सभी दावेदारों से अकेले में मुलाकात की, उनकी बातें, संगठन को लेकर उनके काम समझे और उनका मूल्यांकन किया। गोरखपुर जिला व महानगर के लिए 15 नेताओं ने दावा किया है। जिनमें जिलाध्यक्ष के लिए 9 व महानगर अध्यक्ष के लिए 6 दावेदार हैं। इनमें से बरवे दोनों पदों के लिए 6-6 नाम की सूची लेकर गए हैं।
वरिष्ठ नेताओं की 6 सदस्यीय कमेटी से डिस्कस भी कर चुके हैं। अब 10 सितंबर तक अध्यक्षों के नाम की घोषणा होने की उम्मीद है। कांग्रेस ने इस बार यह तय किया है कि सिफारिश के आधार पर किसी भी अध्यक्ष की नियुक्ति नहीं की जाएगी। हर कार्यकर्ता को इसके लिए अवसर दिया जाएगा। केंद्रीय पर्यवेक्षक बरवे 26 अगस्त को गोरखपुर पहुंचे और 30 तक यहीं रहे।
सुबह-शाम दावेदारों से मुलाकात की। दिन में अलग-अलग ब्लाकों में जाकर वहां के कार्यकर्ताओं और आम नागरिकों से मिलकर पार्टी के बारे में फीडबैक लिया। कार्यकर्ताओं ने उन्हें विस्तार से जानकारी दी है। पहले जानिए किनके नाम चर्चा में हैं जिलाध्यक्ष पद के लिए वर्तमान जिलाध्यक्ष राजेश तिवारी का नाम भी चर्चा में है।
इसके अलावा महानगर अध्यक्ष रवि प्रताप निषाद ने भी इस पद के लिए आवेदन किया है। इसके साथ ही पूर्व जिलाध्यक्ष निर्मला पासवान, पूर्व महानगर अध्यक्ष अरुण अग्रहरि, प्रभारी जिलाध्यक्ष रहे राकेश यादव, अभिषेक राय गांधी, उमेंद्र पांडेय, जितेंद्र पांडेय शामिल हैं। बात महानगर अध्यक्ष पद की करें तो इसके लिए 6 आवेदन आए हैं।
जिला महासचिव अनवर हुसैन, कार्यकर्ता सुमित पांडेय, प्रेमलता चतुर्वेदी, अनुराग पांडेय एवं वरिष्ठ नेता तौकीर आलम ने भी महानगर अध्यक्ष पद के लिए अपनी दावेदारी पेश की है। सभी दावेदारों के साथ केंद्रीय पर्यवेक्षक ने अलग-अलग मुलाकात की है। अब सभी को सूची का इंतजार है। इंटरव्यू के आधार पर ही उनका चयन किया जाएगा।
इसके साथ ही उनके पुराने अनुभव पर भी नंबर मिलेंगे। केंद्रीय पर्यवेक्षक ने संगठन विस्तार के लिए बनी कमेटी के सामने सभी नाम डिस्कस किए हैं। इस कमेटी में राष्ट्रीय संगठन महासचिव केसी वेणुगोपाल, राष्ट्रीय महासचिव एवं उत्तर प्रदेश के प्रभारी राजेंद्र पाल गौतम, प्रदेश अध्यक्ष अजय राय, विधान मंडल दल की नेता आराधना मिश्रा मोना एवं सीडब्ल्यूडी सदस्य व राष्ट्रीय प्रवक्ता सुप्रिया श्रीनेत शामिल हैं।
केंद्रीय पर्यवेक्षक के आने से कार्यकर्ताओं का उत्साह बढ़ा केंद्रीय पर्यवेक्षक के आने से इस बार कार्यकर्ताओं का उत्साह बढ़ा है। आमतौर पर कांग्रेस कार्यकर्ता यही मानते रहे हैं कि ऊपर से जिसे भेजा जाएगा, वही जिलाध्यक्ष होगा। लेकिन पहली बार उन्हें मौका मिला है। सभी अपना बायोडाटा लेकर पहुंचे थे।
उन्हें कोई रोकने वाला नहीं था। उनके व केंद्रीय पर्यवेक्षक के बीच कोई और नहीं था। उन्होंने अपने जुड़ाव और महात्वाकांक्षा के बारे में उनसे बात की है। केंद्रीय पर्यवेक्षक संगठन विस्तार के बहाने ग्राउंड पर कांग्रेस की नब्ज टटोलने भी आए थे। उन्होंने जिले के सभी 20 ब्लाकों में जाकर कार्यकर्ताओं के साथ बैठक की।
उनसे मुलाकात की। शहर व ब्लाकों में आमलोगों के बीच जाकर भी फीडबैक लेते रहे। जानिए किन बातों का जवाब देना था सभी दावेदारों को 3 पन्ने का फार्म भरना था। उसके बाद उसे केंद्रीय पर्यवेक्षक को देना था। जो फार्म यहां मिले थे, उसमें से जिलाध्यक्ष व महानगर अध्यक्ष के लिए 6-6 फार्म का चयन किया गया।
उसे ही हाईपावर कमेटी के सामने डिस्कस किया जाएगा और दोनों पदों पर तैनाती कर दी जाएगी। दावेदारों को पूरा नाम, जन्मतिथि, पिता, पति, माता का नाम, जाति, उप जाति, वैवाहिक स्थिति, लिंग, शिक्षा, पेशा, पता, बूथ नंबर, ब्लाक, विधानसभा क्षेत्र, मोबाइल नंबर, वाट्सएप नंबर, फेसबुक आइडी, एक्स हैंडल की जानकारी देनी थी।
इसके साथ ही वह कांग्रेस पार्टी के सदस्य कब से हैं। पार्टी में पहला पद कौन सा मिला। वर्तमान पद क्या है और कब से इस पद पर कार्यरत हैं। अब तक कितने पदों पर काम किया और उसका कार्यकाल कितना रहा। यह जानकारी भी देनी होगी कि क्या किसी को कोई सरकारी पद भी दिया गया है। चुनाव लड़े हैं या नहीं, इसकी जानकारी भी देनी होगी।
सामाजिक कार्य, प्रशिक्षण शिविर में हिस्सा लेने की जानकारी भी देनी होगी। पहले किसी अन्य राजनीतिक दल के सदस्य रहे हों तो इसकी भी जानकारी देनी होगी। पार्टी से निकाला गया या पार्टी छोड़ी है, उसकी भी जानकारी देनी होगी। अध्यक्ष क्यों बनना चाहते हैं, इसके बारे में भी बताना होगा।
📡 स्रोत: NewsData.io