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पश्चिम बंगाल का नाम बदलने की तैयारी:समिक भट्टाचार्य बोले- अगले सत्र में बिल लाएगी सरकार; 1999 में ज्योति बसु सबसे पहले प्रस्ताव रखा था

लेखक: JKS News Desk अंतिम अपडेट: 6 अक्टूबर 2026
प्रकाशक: जनता का संदेश
पश्चिम बंगाल का नाम बदलने की तैयारी:समिक भट्टाचार्य बोले- अगले सत्र में बिल लाएगी सरकार; 1999 में ज्योति बसु सबसे पहले प्रस्ताव रखा था

पश्चिम बंगाल का नाम बदलकर पश्चिम बंगा करने के लिए राज्य सरकार जल्द विधानसभा में बिल पेश कर सकती है। BJP के प्रदेश अध्यक्ष समिक भट्टाचार्य ने सोमवार को कोलकाता में यह जानकारी दी। उन्होंने कहा कि बिल विधानसभा के इसी सत्र में भी पेश किया जा सकता है। राज्य का नाम पश्चिम बंगा रखने का फैसला उसके इतिहास से जोड़ने के लिए किया गया है।

भट्टाचार्य वाराणसी में प्रस्तावित पश्चिम बंगा भवन को लेकर प्रेस कॉन्फ्रेंस में सवालों के जवाब दे रहे थे। उन्होंने कहा कि अब बांग्ला या वेस्ट बंगाल जैसे नाम नहीं बोलने पड़ेंगे। पश्चिम बंगाल का नाम बदलने की कोशिशें 1999 में शुरू हुई थीं, जब ज्योति बसु की वाम मोर्चा सरकार ने राज्य का नया नाम 'पश्चिम बंग' रखने का प्रस्ताव पेश किया था।

वाराणसी में बनेगा पश्चिम बंग भवन भट्टाचार्य ने कहा कि राज्य के संस्कृति और पर्यटन विभाग ने केंद्र सरकार और कूच बिहार के राजपरिवार के वंशजों के साथ मिलकर वाराणसी में पश्चिम बंग भवन बनाने की योजना बनाई है। जो राज्य के सांस्कृतिक केंद्र के रूप में काम करेगा। यहां बंगाल से आने वाले पर्यटकों और तीर्थयात्रियों के लिए ठहरने की सुविधा भी होगी।

उन्होंने कहा कि वाराणसी का बंगाल से लंबे समय से संबंध रहा है। दोनों के बीच आध्यात्मिक जुड़ाव भी है। वहां पहला महिला कॉलेज एक बंगाली ने बनवाया था। शहर में बंगाली छात्रों के लिए कई स्कूल भी हैं। कूच बिहार के राजपरिवार ने 1836 में बनारस कालीबाड़ी की आधारशिला रखी थी। इसके एक दशक बाद वहां दो मंदिर बनवाए गए थे।

पहले भी नाम बदलने की कोशिश हुई 1999 में पहली कोशिश: पश्चिम बंगाल का नाम बदलने की कोशिशें 1999 से चली आ रही हैं। उस समय ज्योति बसु के नेतृत्व वाली लेफ्ट फ्रंट सरकार ने राज्य का नाम पश्चिम बंगा रखने का प्रस्ताव विधानसभा में रखा था। इसके बाद यह बहस हुई कि राज्य का नाम बांग्ला रखा जाए या नहीं।

लेफ्ट फ्रंट सरकार ने बाद में यह सुझाव भी स्वीकार किया और प्रस्ताव केंद्र सरकार को भेजा। इसका मुख्य तर्क औपनिवेशिक दौर के नाम से छुटकारा पाना था। साथ ही, राज्य की बंगाली पहचान दिखाने वाले नाम की मांग थी। हालांकि, इस प्रक्रिया को राजनीतिक सहमति नहीं मिली। केंद्र सरकार की मंजूरी नहीं मिलने के कारण यह प्रस्ताव आगे नहीं बढ़ सका।

2011 में दूसरी कोशिश: TMC के सत्ता में आने के कुछ समय बाद यह मुद्दा फिर उठा।

📡 स्रोत: Dainik Bhaskar

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💡 पृष्ठभूमि (Background)

पश्चिम बंगाल राज्य का नाम बदलकर "पश्चिम बंगा" करने का प्रस्ताव है, जिसे BJP के प्रदेश अध्यक्ष समिक भट्टाचार्य ने बताया कि सरकार अगले सत्र में बिल पेश कर सकती है। यह कदम राज्य के इतिहास और सांस्कृतिक पहचान को उजागर करने के लिए उठाया गया है। इस खबर का महत्व इसलिए है क्योंकि नाम परिवर्तन से राजनैतिक, सांस्कृतिक और प्रशासनिक स्तर पर गहरा प्रभाव पड़ेगा। आम जनता के लिए इसका असर भाषा, शिक्षा, सरकारी दस्तावेज़ और पर्यटन पर पड़ेगा, जिससे पहचान में बदलाव और नई प्रशासनिक प्रक्रियाएँ अपनानी पड़ेंगी।

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