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पश्चिम एशिया के संघर्ष पर BRICS की दोटूक, इजरायल-फिलिस्तीन विवाद में दो राष्ट्र सिद्धांत का समर्थन

लेखक: JKS News Desk अंतिम अपडेट: 28 अक्टूबर 2026
प्रकाशक: जनता का संदेश
पश्चिम एशिया के संघर्ष पर BRICS की दोटूक, इजरायल-फिलिस्तीन विवाद में दो राष्ट्र सिद्धांत का समर्थन

नई दिल्ली.

पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव और संघर्ष पर गहरी चिंता जताते हुए BRICS देशों के संसदीय नेताओं ने अंतरराष्ट्रीय कानून के विपरीत एकतरफा दबावकारी उपायों और आर्थिक प्रतिबंधों पर सवाल उठाए हैं.

नई दिल्ली में आयोजित 12वें BRICS संसदीय मंच की दो दिवसीय बैठक के समापन पर जारी संयुक्त घोषणा में इजरायल-फिलिस्तीन संघर्ष के शांतिपूर्ण समाधान के लिए दो राष्ट्र सिद्धांत का समर्थन किया गया.

घोषणा में फिलिस्तीनी जनता के आत्मनिर्णय, स्वतंत्रता और संप्रभु राष्ट्र के अधिकार को भी दोहराया गया.

लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला के नेतृत्व में हुई बैठक में संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में सुधार, आतंकवाद के खिलाफ जीरो टॉलरेंस, जलवायु परिवर्तन, डिजिटल संप्रभुता और विकासशील देशों की वैश्विक निर्णय प्रक्रिया में भागीदारी बढ़ाने जैसे मुद्दों पर चर्चा हुई.

भारत की 2026 BRICS अध्यक्षता के दौरान आयोजित इस मंच में प्रतिनिधियों ने अंतरराष्ट्रीय चुनौतियों के समाधान के लिए संवाद, सहयोग और शांतिपूर्ण कूटनीति को महत्वपूर्ण बताया.

पश्चिम एशिया के हालात पर जताई गहरी चिंता 27 अक्टूबर को संपन्न हुए संसदीय मंच की संयुक्त घोषणा में पश्चिम एशिया में बढ़ती शत्रुता और तनाव पर गंभीर चिंता व्यक्त की गई.

नेताओं ने क्षेत्र में शांति स्थापित करने के लिए संयम बरतने, नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित करने और संवाद के माध्यम से विवादों का समाधान निकालने की आवश्यकता पर जोर दिया.

घोषणा में एकतरफा दबावकारी उपायों और आर्थिक प्रतिबंधों को अंतरराष्ट्रीय कानून के अनुरूप नहीं मानने की बात कही गई.

प्रतिनिधियों ने संकेत दिया कि क्षेत्रीय संघर्षों का स्थायी समाधान सैन्य टकराव या आर्थिक दबाव के बजाय कूटनीतिक प्रयासों और बातचीत से तलाशा जाना चाहिए.

पश्चिम एशिया में अस्थिरता का असर क्षेत्रीय सुरक्षा, वैश्विक व्यापार और ऊर्जा आपूर्ति पर भी पड़ सकता है.

इजरायल-फिलिस्तीन विवाद में दो राष्ट्र सिद्धांत का समर्थन संयुक्त घोषणा में इजरायल-फिलिस्तीन संघर्ष के समाधान के लिए दो राष्ट्र सिद्धांत को दोहराया गया.

इस सिद्धांत के तहत इजरायल और फिलिस्तीन के दो स्वतंत्र राष्ट्रों के शांतिपूर्ण तथा सुरक्षित सह-अस्तित्व की परिकल्पना की जाती है.

घोषणा में फिलिस्तीनी लोगों के आत्मनिर्णय, स्वतंत्रता और अपने स्वतंत्र तथा संप्रभु राष्ट्र की स्थापना के अधिकार को रेखांकित किया गया.

BRICS संसदीय नेताओं ने संघर्ष के शांतिपूर्ण समाधान के लिए अंतरराष्ट्रीय प्रयासों और संवाद को आगे बढ़ाने की जरूरत बताई.

दो राष्ट्र सिद्धांत लंबे समय से अंतरराष्ट्रीय कूटनीति में प्रमुख प्रस्ताव रहा है.

हालांकि, इसे लागू करने से जुड़े क्षेत्रीय, राजनीतिक और सुरक्षा संबंधी मुद्दे अब भी जटिल बने हुए हैं.

संयुक्त घोषणा में इसका समर्थन शांतिपूर्ण सह-अस्तित्व की दिशा में साझा प्रतिबद्धता को दर्शाता है.

संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में सुधार की मांग BRICS संसदीय मंच की घोषणा में संयुक्त राष्ट्र प्रणाली में व्यापक सुधार की आवश्यकता पर जोर दिया गया.

इसमें सुरक्षा परिषद को अधिक न्यायसंगत, लोकतांत्रिक, प्रतिनिधित्वपूर्ण और प्रभावी बनाने की बात कही गई.

प्रतिनिधियों ने वैश्विक निर्णय प्रक्रिया में ग्लोबल साउथ और विकासशील देशों की आवाज मजबूत करने की आवश्यकता बताई.

घोषणा के अनुसार, अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं में प्रतिनिधित्व वैश्विक परिस्थितियों और विकासशील देशों की बढ़ती भूमिका के अनुरूप होना चाहिए.

BRICS देशों ने इंटर-पार्लियामेंटरी यूनियन सहित अंतरराष्ट्रीय संसदीय मंचों पर आपसी सहयोग मजबूत करने की प्रतिबद्धता भी जताई.

इसका उद्देश्य वैश्विक मुद्दों पर विकासशील देशों के साझा दृष्टिकोण को अधिक प्रभावी ढंग से सामने लाना है.

संयुक्त घोषणा में आतंकवाद की कड़ी निंदा करते हुए इसके खिलाफ साझा कार्रवाई की जरूरत बताई गई.

प्रतिनिधियों ने 22 अप्रैल 2025 को जम्मू-कश्मीर में हुए आतंकवादी हमले की निंदा की, जिसमें 26 लोगों की जान गई थी.

घोषणा में सीमा पार आतंकवादियों की आवाजाही, आतंकवादी गतिविधियों के वित्तपोषण और आतंकियों को सुरक्षित ठिकाने उपलब्ध कराने जैसी गतिविधियों के खिलाफ कार्रवाई पर जोर दिया गया.

साथ ही आतंकवाद से निपटने में दोहरे मानदंड समाप्त करने का आह्वान किया गया. संसदीय नेताओं ने आतंकवाद के प्रति जीरो टॉलरेंस की नीति का समर्थन किया.

आतंकवादी नेटवर्क की पहचान, वित्तीय सहायता रोकने और संबंधित देशों के बीच सूचनाओं के आदान-प्रदान को इस दिशा में महत्वपूर्ण माना गया.

डिजिटल संप्रभुता और AI पर चर्चा बैठक में कृत्रिम बुद्धिमत्ता और डिजिटल सार्वजनिक बुनियादी ढांचे से जुड़े विषयों पर भी चर्चा हुई.

संयुक्त घोषणा में BRICS देशों के बीच डिजिटल सार्वजनिक अवसंरचना से संबंधित साझा रिपॉजिटरी विकसित करने का प्रस्ताव सामने रखा गया.

इस पहल का उद्देश्य सदस्य देशों के बीच डिजिटल समाधानों से जुड़े अनुभव और जानकारी साझा करने की संभावनाओं को मजबूत करना है. हालांकि, इसके क्रियान्वयन की विस्तृत व्यवस्था की जानकारी नहीं दी गई.

घोषणा में डिजिटल संप्रभुता को मजबूत करने, व्यक्तिगत जानकारी की गोपनीयता और सुरक्षा सुनिश्चित करने तथा मजबूत राष्ट्रीय तकनीकी तंत्र विकसित करने पर जोर दिया गया.

ओम बिरला ने कहा कि AI और डिजिटल उपकरण संसदीय शोध, दस्तावेजों के विश्लेषण और जनता से संवाद को बेहतर बनाने में मदद कर सकते हैं.

जलवायु परिवर्तन पर साझा रणनीति जलवायु परिवर्तन भी बैठक के प्रमुख विषयों में शामिल रहा.

सदस्य देशों ने इसके प्रभावों को कम करने और उनसे निपटने की क्षमता बढ़ाने के लिए मजबूत प्रयासों की आवश्यकता बताई.

संयुक्त घोषणा में संयुक्त राष्ट्र के 2030 सतत विकास एजेंडे और संबंधित लक्ष्यों को लागू करने पर जोर दिया गया.

प्रतिनिधियों ने जलवायु कार्रवाई में साझा लेकिन अलग-अलग जिम्मेदारियों के सिद्धांत को महत्वपूर्ण बताया.

इसके अनुसार, सभी देशों की जिम्मेदारी स्वीकार करते हुए उनकी ऐतिहासिक भूमिका, क्षमताओं और परिस्थितियों को ध्यान में रखना चाहिए.

विकासशील देशों के लिए जलवायु अनुकूलन, तकनीक और संसाधनों की उपलब्धता भी महत्वपूर्ण है.

घोषणा में उत्सर्जन कम करने और जलवायु परिवर्तन के प्रभावों से निपटने की तैयारियों को मजबूत करने की जरूरत रेखांकित की गई.

ओम बिरला ने संवाद और सहयोग को बताया जरूरी लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने अपने संबोधन में कहा कि वैश्विक चुनौतियों के स्थायी समाधान युद्ध के बजाय संवाद, संघर्ष के बजाय शांति और प्रतिस्पर्धा के बजाय सहयोग से ही तलाशे जा सकते हैं.

उन्होंने राष्ट्रीय संप्रभुता के सम्मान, विवादों के शांतिपूर्ण समाधान और विकास के समान अवसरों पर आधारित वैश्विक व्यवस्था की आवश्यकता बताई.

उनके अनुसार, संसदों की भूमिका केवल कानून बनाने तक सीमित नहीं होनी चाहिए, बल्कि उन्हें पारदर्शी, प्रभावी और नागरिक-केंद्रित संस्थाओं के रूप में भी विकसित होना चाहिए.

बिरला ने कहा कि वैश्विक शांति का अर्थ सुरक्षा, सम्मान, न्याय और सभी के लिए बेहतर भविष्य सुनिश्चित करना है.

उन्होंने विशेष रूप से युवा पीढ़ी के भविष्य को ध्यान में रखकर अंतरराष्ट्रीय सहयोग बढ़ाने पर जोर दिया. 2027 के लिए चीन को सौंपी गई अध्यक्षता 26 और 27 अक्टूबर को नई दिल्ली में आयोजित 12वें BRICS संसदीय मंच का विषय लोगों-केंद्रित विकास के लिए संसदों को सशक्त बनाना था.

बैठक में सदस्य देशों और साझेदार देशों के संसदीय प्रतिनिधियों ने भाग लिया.

चर्चा में संसदीय संस्थाओं को मजबूत करने, तकनीकी नवाचार और सतत विकास जैसे विषय शामिल रहे.

भारत की 2026 BRICS अध्यक्षता के दौरान आयोजित इस मंच के समापन पर ओम बिरला ने 2027 के लिए अध्यक्षता चीन को सौंप दी.

संयुक्त घोषणा में अंतरराष्ट्रीय शांति, आतंकवाद के खिलाफ सहयोग, संयुक्त राष्ट्र में सुधार और विकासशील देशों की भागीदारी बढ़ाने जैसे मुद्दों को प्रमुखता मिली.

पश्चिम एशिया पर चिंता और इजरायल-फिलिस्तीन विवाद में दो राष्ट्र सिद्धांत का समर्थन बैठक के महत्वपूर्ण निष्कर्ष रहे.

कुल मिलाकर, मंच ने वैश्विक संघर्षों के शांतिपूर्ण समाधान, अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं में सुधार और तकनीकी तथा पर्यावरणीय चुनौतियों से निपटने के लिए सहयोग की आवश्यकता रेखांकित की.

अब इन घोषणाओं को ठोस नीतिगत और संसदीय पहलों में बदलना सदस्य देशों के सामने महत्वपूर्ण चुनौती होगी.

📡 स्रोत: NewsData.io

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